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‘इस काम पर जनता का पैसा बर्बाद न करें’, बॉलीवुड स्टार्स पर क्यों भड़का बॉम्बे हाई कोर्ट? कहा- मराठी कलाकारों से करें संपर्क

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉलीवुड पर पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियानों में शामिल होने के लिए फ़ीस मांगने के रवैये पर सख्त अपनाया है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने सीधा सीधा कह दिया है कि बॉलीवुड हस्तियों को जनता के पैसे से भुगतान नहीं किया जाना चाहिए.

‘इस काम पर जनता का पैसा बर्बाद न करें’, बॉलीवुड स्टार्स पर क्यों भड़का बॉम्बे हाई कोर्ट? कहा- मराठी कलाकारों से करें संपर्क
Image Credits: https://bombayhighcourt.gov.in/bhc/
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त्योहारों की शुरुआत हो चुकी है, इस दौरान आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण और शोर-शराबे से कई लोगों को परेशानी होती है, ख़ासकर बच्चों और बूढ़े लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वहीं इस बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने  पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियानों में शामिल होने के लिए फ़ीस मांगने के रवैये पर सख्त अपनाया है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने सीधा सीधा कह दिया है कि बॉलीवुड हस्तियों को जनता के पैसे से भुगतान नहीं किया जाना चाहिए.

ब़ॉलीवुड स्टार्स के रवैये पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने उठाया सख्त रुख़

मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण और नवरात्रि के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान, जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने यह जानकर नाराजगी जताई कि ऐसी हस्तियां इन अभियानों में शामिल होने के लिए भारी फीस लेती हैं.

‘इस काम पर जनता का पैसा बर्बाद न करें’

जस्टिस कुलकर्णी ने टिप्पणी की, "अगर ये हस्तियां मुफ्त में आगे आने को तैयार नहीं हैं, तो उनसे संपर्क करने की कोई जरूरत नहीं है. अगर वो फीस मांगती हैं, तो यह पूरी तरह से गलत तरीका है. वो इसी शहर में रही हैं और उन्हें यहां से बहुत कुछ मिला है. अगर वो इस शहर से अपनापन महसूस करती हैं, तो उन्हें कुछ वापस देने के लिए खुद आगे आना चाहिए. इस काम पर जनता का पैसा बर्बाद न करें.”

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‘अगर बॉलीवुड नहीं तो मराठी कलाकारों से करें संपर्क'

बेंच ने यह भी सवाल किया कि जो मशहूर हस्तियां मुंबई पुलिस के सालाना कार्यक्रम 'उमंग' में शामिल होती हैं, वो किसी सामाजिक कार्य के लिए 15 मिनट का समय क्यों नहीं निकाल सकतीं? बेंच ने सुझाव दिया कि अगर जरूरत पड़े तो मराठी कलाकारों से संपर्क किया जा सकता है, क्योंकि वो बिना किसी फीस के इस अभियान में शामिल होने के लिए तैयार हो जाते हैं.

 सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने क्या कहा?

सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि कुछ बॉलीवुड हस्तियों ने पहले ही इंस्टाग्राम के जरिए लोगों से पटाखे न फोड़ने की अपील की है. इस पर अदालत ने कहा कि उन्हें सरकार के जागरूकता अभियान में भी बिना किसी फीस के शामिल होने के लिए तैयार रहना चाहिए. 

स्कूलों में जागरूकता और स्लम इलाकों के लिए विशेष निर्देश

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इस बीच, अदालत ने पटाखों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के प्रयासों की सराहना की. इन प्रयासों में अखबारों, टेलीविजन, रेडियो और सोशल मीडिया पर विज्ञापन देना, और स्कूली छात्रों को पटाखे न जलाने की शपथ दिलाना शामिल है. 

अदालत ने इस मुद्दे से जुड़ी शिकायतों के लिए BMC के हेल्पलाइन नंबर '1916' शुरू करने के प्रस्ताव पर भी ध्यान दिया.हालांकि, पीठ ने जोर देकर कहा कि जागरूकता अभियान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाना चाहिए. साथ ही, झुग्गी-बस्तियों वाले इलाकों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा गया.

‘हम झुग्गी-बस्तियों में रहने वालों के खिलाफ नहीं हैं’

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न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने निर्देश दिया, "हम झुग्गी-बस्तियों में रहने वालों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वो रात के 2 बजे तक पटाखे जलाते हैं. वहां जागरूकता फैलाने के लिए नगर पार्षदों और इलाके के प्रमुख नागरिकों की मदद लें."

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