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कहां है ये चमत्कारी शिव मंदिर, जहां सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा, रहस्यों से भरा मंदिर

गुजरात के कच्छ में एक शिवलिंग है, जो सदियों से टूटा हुआ है और आज भी उसकी पूजा पूरे विधि-विधान से होती है. गुजरात के कच्छ में माधापार, भुज के पास कल्याणेश्वर महादेव मंदिर है. यह मंदिर आस्था और भक्तों की गहरी भक्ति को दिखाता है.

कहां है ये चमत्कारी शिव मंदिर, जहां सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा, रहस्यों से भरा मंदिर
Image Credits: kalyaneshwar mahadev temple/AI /IANS
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देशभर में कई ऐसे शिवलिंग स्थापित हैं, जो अपने चमत्कार और अनोखे रूपों के लिए पूजे जाते हैं. देश में कई ऐसे मंदिर मौजूद हैं, जहां स्थापित शिवलिंग की विशेष महत्ता है.

किस मंदिर में होती है सदियों से टूटे शिवलिंग की पूजा

गुजरात के कच्छ में एक शिवलिंग है, जो सदियों से टूटा हुआ है और आज भी उसकी पूजा पूरे विधि-विधान से होती है. गुजरात के कच्छ में माधापार, भुज के पास कल्याणेश्वर महादेव मंदिर है. यह मंदिर आस्था और भक्तों की गहरी भक्ति को दिखाता है.

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सदियों से टूटे शिवलिंग की पूजा

यह मंदिर अपनी मान्यताओं और अनोखे शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर को भक्त रहस्यमयी शिव मंदिर बताते हैं कि क्योंकि मंदिर में मौजूद प्रमुख शिवलिंग स्वरूप प्राकृतिक रूप से टूटा हुआ है. कुछ शिवलिंग समय के साथ अपना आकार और रूप खो देते हैं, लेकिन यह शिवलिंग मंदिर के निर्माण से पहले से ही इसी अवस्था में मौजूद था और आज भी इस पर जल, दूध, या अन्य सामग्री चढ़ाई जाती है.

शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल धरती मां ग्रहण कर लेती हैं

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कल्याणेश्वर महादेव मंदिर को लेकर भक्तों के बीच कई मान्यताएं मौजूद हैं. माना जाता है कि मंदिर में किसी को सांप काट ले, तो जान नहीं जाती है, क्योंकि महादेव स्वयं भक्त की रक्षा करते हैं. महादेव मंदिर में मौजूद सांपों को संरक्षण भी देते हैं. इसके अलावा, शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध या जल कहां जाता है, यह किसी को नहीं पता है. मान्यता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल धरती मां ग्रहण कर लेती हैं.

इस शिवलिंग की स्थापना किनके हाथों हुई थी

कल्याणेश्वर महादेव मंदिर को पांडव, कर्ण और शिवाजी महाराज से जोड़कर देखा गया है. माना जाता है कि अज्ञात वास के समय पांडवों ने इसी स्थल पर आकर तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना भी उन्हीं के हाथों हुई थी। इसके अलावा, कर्ण ने भी इस मंदिर में आकर भगवान शिव को पूजा था। शिवाजी महाराज को भी सफलता पाने के लिए कल्याणेश्वर महादेव मंदिर ही आना पड़ा था.

छत्रपति शिवाजी महाराज ने तीन महीने तक लगातार यज्ञ किया था

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इस मंदिर में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए मराठा छत्रपति शिवाजी महाराज ने तीन महीने तक लगातार यज्ञ किया था और महादेव का आशीर्वाद पाया था. मंदिर इन रहस्यों और कथाओं की वजह से ही भक्तों की आस्था को और बढ़ाता है. महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है. भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं.

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