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कहां है ऋषेश्वर महादेव मंदिर, यहां पूजा करने से पूरी होती हैं सारी मनोकामनाएं, संतान सुख का भी मिलता है आशीर्वाद

लोहावती नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का यह मंदिर कभी कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर एक पड़ाव था. ऋषेश्वर महादेव मंदिर लोहाघाट के लोगों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन किए बिना लोहाघाट की यात्रा अधूरी मानी जाती है.

कहां है ऋषेश्वर महादेव मंदिर, यहां पूजा करने से पूरी होती हैं सारी मनोकामनाएं, संतान सुख का भी मिलता है आशीर्वाद
Image Credits: pushkardhami/X
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उत्तराखंड के चंपावत जिले में लोहावती नदी के पवित्र तट पर स्थित ऋषेश्वर महादेव मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यह स्थान कभी प्राचीन कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था.

सीएम धामी ने शेयर किया मंदिर का वीडियो

पौराणिक मान्यताओं और स्थानीय संस्कृति को समेटे यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है बल्कि यह इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का भी एक अभिन्न अंग है. बुधवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की भव्यता पर टिप्पणी साझा की.

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 ‘ऋषेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है’

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक खास वीडियो पोस्ट किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, "चंपावत जिले में लोहावती नदी के पवित्र तट पर स्थित ऋषेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित पूजा का एक पुराना केंद्र है, जो आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है. सावन के महीने में यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा करने से आत्मा को असीम शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है. चंपावत पहुंचने पर आपको भी इस पवित्र मंदिर के दर्शन ज़रूर करने चाहिए."

दर्शन किए बिना लोहाघाट की यात्रा अधूरी मानी जाती है

लोहावती नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का यह मंदिर कभी कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर एक पड़ाव था. ऋषेश्वर महादेव मंदिर लोहाघाट के लोगों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन किए बिना लोहाघाट की यात्रा अधूरी मानी जाती है.

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यहां भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण वेश में प्रकट हुए थे

ऐसी पौराणिक मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण वेश में प्रकट हुए थे. यहां आने वाले भक्तों और निसंतान दंपत्तियों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर में सालभर शिव पूजा, यज्ञोपवीत संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहते हैं.इस पावन स्थल पर मुख्य ऋषेश्वर महादेव के साथ-साथ माता कालिका, दुर्गा और राधा-कृष्ण के मंदिर भी बने हुए हैं. यहाँ अखंड भैरव धूनी, बच्चों के लिए पार्क, धर्मशाला और पार्वती रसोई जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं.

सच्चे मन से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं 

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स्थानीय लोगों की इस मंदिर में गहरी आस्था है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और निसंतान दंपत्तियों को संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है. यहां सालभर धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञोपवीत संस्कार और शिव पूजा होती रहती है

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