‘मृत्यु पर विजय पाने वाले’ महादेव का मंदिर, द्वाराहाट के मृत्युंजय मंदिर की क्या है खासियत?
भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अपनी प्राचीनता, धार्मिक आस्था और विशिष्ट नागर शैली की स्थापत्य कला के कारण आकर्षण का केंद्र है.कत्यूरी राजाओं के शासनकाल (लगभग 8वीं से 16वीं शताब्दी के बीच) में बनाए गए इस मंदिर को 'मंदिरों की नगरी' भी कहा जाता है, जहां कई प्राचीन मंदिर समूह मौजूद हैं.
Follow Us:
उत्तराखंड का अल्मोड़ा जनपद अपनी प्राकृति सुंदरता के साथ-साथ पौराणिक मंदिरों, लोकसंस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है. इसी जनपद के द्वाराहाट में स्थित मृत्युंजय मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है.
द्वाराहाट का प्राचीन मृत्युंजय मंदिर बना आस्था का केंद्र
मंदिर की वास्तु संरचना में गर्भगृह, अंतराल और मंडप का सुंदर संयोजन देखने को मिलता है. सोमवार के दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की भव्यता पर जोर दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट कर लिखा, "अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट में स्थित मृत्युंजय मंदिर आध्यात्मिक अनुभव का एक खास केंद्र है. यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी श्रद्धा, शांत वातावरण और बेहतरीन आर्किटेक्चरल कला के कारण भक्तों को अपनी ओर खींचता है. अल्मोड़ा जिले में आने पर आपको भी इस मंदिर में जरूर जाना चाहिए."
भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अपनी प्राचीनता, धार्मिक आस्था और विशिष्ट नागर शैली की स्थापत्य कला के कारण आकर्षण का केंद्र है.कत्यूरी राजाओं के शासनकाल (लगभग 8वीं से 16वीं शताब्दी के बीच) में बनाए गए इस मंदिर को 'मंदिरों की नगरी' भी कहा जाता है, जहां कई प्राचीन मंदिर समूह मौजूद हैं.
View this post on InstagramAdvertisement
नागर शैली की वास्तुकला खींचती है भक्तों को
'मृत्युंजय' का अर्थ होता है, मृत्यु पर विजय पाने वाला. यह मंदिर भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरूप को समर्पित है, जो नागर शैली में बना है. इसमें मुख्य रूप से गर्भ गृह, अंतराल और एक विशाल मंडप शामिल हैं.
दरअसल, मंदिर समूहों में दीये के साथ ही धूप, अगरबत्ती जलाई जाती हैं. धुएं से निकलने वाले सूट कार्बन को साफ करना इस जैविक रसायनिक सफाई व उपचार का मुख्य मकसद है. इसी कारण प्रथम चरण में महामृत्युंजय मंदिर के बाहरी भाग की सफाई की जा रही है जबकि महाशिवरात्रि के बाद मंदिरों के आंतरिक भागों का उपचार किया जाना है.
इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और संवारने का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया गया है. शांत वातावरण और पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण यह आध्यात्मिक साधना और शांति का एक प्रमुख केंद्र है.