नाग पंचमी पर आज भूलकर भी न करें ये काम, नाग देवता की पूजा में इन नियमों का रखें खास ध्यान
आज पूरे देश में नाग पंचमी का त्योहार बड़ी ही आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. आज के दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष से भी मुक्ति मिलती है. नाग पंचमी पर काशी के नागकूप मंदिर में नाग कुआं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.
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Nag Panchami 2026: हिंदू धर्म के तमाम त्योहारों में से एक नाग पंचमी का त्योहार आस्था और श्रद्धा से जुड़ा हुआ पर्व है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त यानी सोमवार मनाया जा रहा है. इस दिन भगवान शिव के प्रिय और आभूषण माने जाने वाले नाग देवताओं की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक नाग देवता और भगवान शिव का पूजन करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है. इस दिन प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी मिलता है. खास तौर पर सांपों को नुकसान न पहुंचाने और उनके संरक्षण की भावना को इस पर्व से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष जैसी स्थिति होती है, वे भी इस दिन विशेष पूजा करते हैं. ऐसे में बाबा भोलेकि नगरी काशी में आज के दिन नागकूप मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नाग कुआँ के दर्शन को उमड़ती है.
नाग पंचमी की पूजा में क्या-क्या चाहिए?
पूजा से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह रख लेना बेहतर माना जाता है. इसके लिए धातु के नाग-नागिन की प्रतिमा, मिट्टी का शिवलिंग, रुद्राक्ष की माला, तांबे का लोटा और बेलपत्र रख सकते हैं. इसके अलावा जल, दूध, रोली, अक्षत, फूल और मिठाई की भी जरूरत होती है. घर के मुख्य द्वार पर नाग देवता की आकृति बनाने के लिए गोबर, हल्दी या चंदन का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं, कालसर्प दोष से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चांदी या तांबे के नाग-नागिन के जोड़े का पूजन भी किया जाता है.
कैसे करें नाग पंचमी की पूजा?
नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा का संकल्प लें. इसके बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर गोबर, हल्दी या चंदन से नाग देवता की आकृति बनाएं. पूजा स्थल पर मिट्टी का शिवलिंग स्थापित करें. तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र और रुद्राक्ष चढ़ाएं. नाग-नागिन की प्रतिमा पर भी जल, दूध, रोली और अक्षत अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करें. पूजा के दौरान नाग स्तोत्र का पाठ और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जा सकता है. आखिर में नाग देवता और भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें. आज के दिन आग देवता की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति का वास होता है.
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इन बातों का रखें खास ध्यान
नाग पंचमी पर कुछ परंपरागत नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है. इस दिन खेत की खुदाई या जमीन खोदने से बचने की मान्यता है. किसी भी जीवित सांप को परेशान करना या उसे जबरदस्ती दूध पिलाना उचित नहीं है. पूजा के नाम पर वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना भी सही नहीं माना जाता. इस दिन घर में शांति का माहौल बनाए रखें और किसी से विवाद करने से बचें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, फल या वस्त्र का दान करना भी शुभ माना जाता है.
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बताते चलें नाग पंचमी का असली संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान भी है. इसलिए पूजा के साथ यह संकल्प लेना भी जरूरी है कि हम किसी जीव को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे.