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श्रीनगर का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जहां 108 कमल लेकर पहुंचे थे भगवान राम!

इस मंदिर मान्यता है कि त्रेता युग में रावण वध के पश्चात ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी. राम ने शिव जी को 108 कमल के फूल अर्पित करने का संकल्प लिया था.

श्रीनगर का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जहां 108 कमल लेकर पहुंचे थे भगवान राम!
Image Credit:Facebook/@Pushkar Singh Dhami
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देवभूमि उत्तराखंड की हर घाटी, नदी और पहाड़ों में देवी-देवताओं का वास माना दाता है. पौढ़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित श्री कामेश्वर महादेव मंदिर ऐसी ही एक पवित्र और प्राचीन धरोहर है. मान्यता है कि यह मंदिर भगवान शिव के 'काम' यानी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला स्वरूप है.

श्रीनगर का कामेश्वर महादेव मंदिर

स्कंद पुराण के केदार खंड के अनुसार, यह मंदिर हिमालय क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के पांच महत्वपूर्ण महेश्वर पीठों में से एक है. गुरुवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की भव्यवता पर जोर दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, "पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में मौजूद श्री कामेश्वर महादेव मंदिर, देवभूमि के पुराने और मशहूर शिव मंदिरों में से एक है. स्कंद पुराण में बताया गया यह पवित्र धाम भगवान शिव की पूजा और भक्ति का एक बड़ा केंद्र है. अगर आप श्रावण के पवित्र महीने में पौड़ी गढ़वाल इलाके में घूम रहे हैं, तो देवाधिदेव महादेव के इस दिव्य धाम के दर्शन जरूर करें."

जहां भगवान राम ने की थी शिव की आराधना

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मंदिर की शांत वातावरण और अलकनंदा का किनारा इसे ध्यान और साधना के लिए भी आदर्श बनाता है.

मान्यता है कि त्रेता युग में रावण वध के पश्चात ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी. राम ने शिव जी को 108 कमल के फूल अर्पित करने का संकल्प लिया था. परीक्षा लेने के लिए शिव जी ने एक कमल का फूल छिपा दिया, तब राम जी ने अपनी आंख (कमल नयन) चढ़ाने का निश्चय किया. उनकी इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया. तभी से इस धाम का नाम कमलेश्वर पड़ा.

बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर होगी है एक विशेष अनुष्ठान

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इस मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर एक विशेष अनुष्ठान होता है. इस रात निसंतान दंपति हाथ में जलता हुआ दीया (खड़ा दीया) लेकर रातभर खड़े रहकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भक्तों को संतान सुख की प्राप्ति होती है.

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मुख्य गर्भ गृह में स्वयंभू भू-लिंग (शिवलिंग) विराजमान है. इसके साथ ही परिसर में माता गंगा, सरस्वती, अन्नपूर्णा, गणेश जी और पंचमुखी हनुमान की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.

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