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कहां है बिल्वेश्वर महादेव मंदिर, 40 दिनों ये काम करने से पूरी होती भक्तों की मनोकामनाएं, सावन में दूर-दूर से आते श्रद्धालु

बिल्वेश्वर महादेव मंदिर आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है. यहां स्वयंभू धातु का शिवलिंग स्थापित है. मान्यता है कि 40 दिनों तक लगातार दीपक जलाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सावन के महीने में यहां विशेष जलाभिषेक का आयोजन होता है और दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं.

कहां है बिल्वेश्वर महादेव मंदिर, 40 दिनों ये काम करने से पूरी होती भक्तों की मनोकामनाएं, सावन में दूर-दूर से आते श्रद्धालु
Image Credits: Bilveshwar mahadev mandir/UP Tourism
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 देश-दुनिया के कोने-कोने में देवाधिदेव महादेव के कई अद्भुत मंदिर हैं, जो देखने में सुंदर तो अपने अंदर कई रहस्य और भक्ति भाव को सिमेटे हुए हैं. उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में भी ऐसा ही एक शानदार शिवालय है, जहां लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी ने कठोर तपस्या कर महादेव से वरदान पाया था.  

 रावण की पत्नी मंदोदरी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, बिल्वेश्वर महादेव मंदिर केवल एक शिव मंदिर नहीं, बल्कि रामायण काल की जीवंत साक्षी है. जनश्रुतियों के अनुसार, यह वही पावन स्थल है जहां रावण की पत्नी मंदोदरी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. मंदोदरी ने महादेव से एक ऐसे जीवनसाथी की कामना की थी जो विद्वान भी हो और अत्यंत शक्तिशाली भी. मंदोदरी की भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने मनोकामना पूरी की और बाद में मंदोदरी का विवाह लंकापति रावण से हुआ. इसी कारण मेरठ को 'रावण का ससुराल' भी कहा जाता है.

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 बिल्वेश्वर महादेव मंदिर आकर शिव की पूजा करती थीं मंदोदरी

मंदिर के पीछे पौराणिक कथा भी है, जिसके अनुसार मेरठ या प्राचीन नाम मयराष्ट्र में मय दानवों का राजा मयराष्ट्र रहता था और मंदोदरी उनकी पुत्री थी. मंदोदरी नियमित रूप से बिल्वेश्वर महादेव मंदिर आकर शिव की पूजा करती थीं. यहां उन्होंने अखंड तपस्या की. भगवान शिव ने उनकी भक्ति स्वीकार की और उन्हें वरदान दिया. मंदिर परिसर में आज भी एक प्राचीन कुआं मौजूद है, जिसके जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता था. हालांकि, वर्तमान में कुआं बंद रहता और विशेष अवसरों पर खोला जाता है. मंदिर का वर्तमान स्वरूप मराठा काल में बना. मराठा शासन के दौरान इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया. उस समय यहां बिल्व के वृक्षों की भरमार थी, इसलिए इसका नाम बिल्वेश्वर महादेव पड़ा. मंदिर की वास्तुकला में मराठा शैली की झलक दिखती है.

40 दिनों तक दीपक जलाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती 

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बिल्वेश्वर महादेव मंदिर आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है. यहां स्वयंभू धातु का शिवलिंग स्थापित है. मान्यता है कि 40 दिनों तक लगातार दीपक जलाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सावन के महीने में यहां विशेष जलाभिषेक का आयोजन होता है और दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. मंदिर परिसर में मुख्य द्वार की बनावट बद्रीनाथ धाम से मिलती-जुलती है. खास बात है कि यहां लगा प्राचीन पीतल का घंटा सात अलग-अलग सुरों में बजता है.

कैसे करने पहुंचे मंदिर के दर्शन

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मंदिर सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है. बिल्वेश्वर महादेव मंदिर मेरठ शहर के कैंट क्षेत्र में सदर थाना के पास स्थित है. मेरठ कैंट रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी मात्र 1-2 किलोमीटर है. मंदिर पहुंचने के लिए ऑटो, रिक्शा या पैदल भी आसानी से पहुंच सकते हैं. सड़क मार्ग से मेरठ अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद आदि शहरों से बस या टैक्सी के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है.

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