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पश्चिम बंगाल से आकर गंगोलीहाट में बसीं मां काली, हाटकलिका मंदिर में रात में बिस्तर पर पड़ती हैं सिलवटें

स्कंद पुराण के मानस खंड के अनुसार, इस स्थान पर माता काली ने सुमैया नामक दैत्य का वध किया था। सोमवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर प्रकाश डाला.

पश्चिम बंगाल से आकर गंगोलीहाट में बसीं मां काली, हाटकलिका मंदिर में रात में बिस्तर पर पड़ती हैं सिलवटें
Images Credits:@pushkardhami/X
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देवभूमि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित 'मां हाटकलिका मंदिर' एक प्रसिद्ध और जागृत शक्तिपीठ है. मान्यता है कि माता काली पश्चिम बंगाल से आकर गंगोलीहाट में बस गईं थीं.

 इस स्थान पर माता काली ने सुमैया नामक दैत्य का वध किया था

स्कंद पुराण के मानस खंड के अनुसार, इस स्थान पर माता काली ने सुमैया नामक दैत्य का वध किया था. सोमवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर प्रकाश डाला.

सीएम धामी ने शेयर किया मंदिर का वीडियो

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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का भव्य वीडियो पोस्ट कर लिखा, "पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में मौजूद हाटकलिका मंदिर, मां महाकाली के प्रति अनगिनत भक्तों की अटूट आस्था का पवित्र केंद्र है. यह मंदिर अपनी दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा, शानदार इतिहास और समृद्ध धार्मिक परंपराओं के लिए एक खास पहचान रखता है."

यहां मां हाटकलिका के पवित्र दर्शन जरूर करें

उन्होंने लिखा, "भक्तों की सुविधाओं के हिसाब से मंदिर में जरूरी डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम किए जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ यहां धार्मिक टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि भक्तों की संख्या भी बढ़ रही है. पिथौरागढ़ आने पर, मां हाटकलिका के पवित्र दर्शन जरूर करें."

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यहां के सैनिकों की अटूट आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है

यह मंदिर भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य और संरक्षक देवी माना जाता है. यहां के सैनिकों की अटूट आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है. इस सिद्ध पीठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी.

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मां काली पश्चिम बंगाल से आकर यहां स्थापित हुईं

इसका निर्माण 9वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी और चंद वंश के राजाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है. स्कंद पुराण के मानस खंड में इस स्थान का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि मां काली पश्चिम बंगाल से आकर यहां स्थापित हुईं और उन्होंने सुमैया नामक दैत्य का वध किया था.

मंदिर के पुजारी रोजाना रात को माता के लिए बिस्तर लगाते हैं

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स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय मां काली मंदिर में विश्राम करने के लिए आती हैं. मंदिर के पुजारी रोजाना रात को माता के लिए बिस्तर लगाते हैं और सुबह जब कपाट खोले जाते हैं, तो बिस्तर पर सिलवटें दिखाई देती हैं, जिसे भक्त चमत्कार मानते हैं.

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