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कहां है मां धारी देवी का चमत्कारी मंदिर, प्रार्थना करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं मां काली

पहाड़ों और नदी से घिरा यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है बल्कि अपनी अनोखी मान्यताओं और पौराणिक इतिहास के कारण भी खास महत्व रखता है. मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की भव्यता पर प्रकाश डाला है.

कहां है मां धारी देवी का चमत्कारी मंदिर, प्रार्थना करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं मां काली
Image Credits: @pushkardhami/X
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उत्तराखंड की पावन धारा अपने धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है. इन्हीं प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है मां धारी देवी मंदिर, जो अलकनंदा नदी के बीचों-बीच स्थित एक प्राचीन और आस्था से जुड़ा मंदिर है. मां धारी देवी को उत्तराखंड के चार धामों की रक्षक और आपदाओं से बचाने वाली देवी माना जाता है.

 सीएम धामी ने मंदिर का खास वीडियो जारी किया

पहाड़ों और नदी से घिरा यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है बल्कि अपनी अनोखी मान्यताओं और पौराणिक इतिहास के कारण भी खास महत्व रखता है. मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की भव्यता पर प्रकाश डाला है.

मां धारी देवी मंदिर अनगिनत भक्तों की आस्था का केंद्र है

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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो जारी कर लिखा, "पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर में स्थित मां धारी देवी मंदिर अनगिनत भक्तों की आस्था का केंद्र है. सरकार के लगातार प्रयासों से साल 2026 के पहले 6 महीनों में यहां भक्तों की संख्या में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है. हमारी सरकार राज्य के तीर्थ स्थलों के समग्र विकास, भक्तों के लिए बेहतर सुविधाओं और धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए लगातार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है."

प्रार्थना करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं मां

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित चार धाम की संरक्षक एवं रक्षक देवी हैं. मान्यता है कि मां के मंदिर के सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

मां धारी देवी को काली के रूप में पूजा जाता है

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मां धारी देवी का ऊपरी भाग उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित है जबकि मूर्ति का निचला आधा हिस्सा कालीमठ में स्थित है, जहां उन्हें देवी काली के रूप में पूजा जाता है.

मां धारी देवी चारों धामों की रक्षा करती हैं

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स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि मां धारी देवी बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यानी चारों धामों की रक्षा करती हैं. उनके आशीर्वाद के बिना चारधाम यात्रा अधूरी मानी जाती है. लोगों का मानना है कि जब जून 2013 में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए माता की मूर्ति को उनके मूल स्थान से हटाया गया था, तब उसी दिन उत्तराखंड में भीषण केदारनाथ आपदा आई थी. इसे माता के प्रकोप से जोड़कर देखा जाता है.

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