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‘मेरी मां को मत बताना मुझसे गलती हो गई’ किडनी रैकेट के पीड़ित आयुष की आपबीती, डॉक्टर्स के दलाल बनने की पूरी कहानी

Kanpur Kidney Racket: कानपुर के किडनी रैकेट का शिकार हुए बिहार का आयुष इस केस की अहम कड़ी है. अपने परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए आयुष ने अपनी किडनी बेच दी थी, लेकिन बदले में उसे पैसे नहीं मिले.

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‘मेरी मां को मत बताना मुझसे गलती हो गई’ कानपुर के हैलट अस्पताल के बेड पर पड़ा आयुष ये कहते हुए फफक पड़ता है. वह मां से झूठकर बोलकर कानपुर आया था कि उसे यहां नौकरी मिल गई, लेकिन कानपुर में नौकरी नहीं उसका इंतजार कर रहा था एक ऐसा नेटवर्क, जो लोगों की मजबूरियों का सौदा उनके अंग लेकर करता था. 

कानपुर के किडनी रैकेट का शिकार हुए बिहार का आयुष इस केस की अहम कड़ी है. अपने परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए आयुष ने अपनी किडनी बेच दी थी, लेकिन बदले में उसे पैसे नहीं मिले. जिसके बाद उसने किडनी माफियाओं का पर्दाफाश कर दिया. आयुष पुलिस से डॉक्टर से बार-बार ये ही कह रहा है कि उसकी मां को इस बारे में कुछ मत बताना. 

क्या है कानपुर का किडनी रैकेट? 

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कानपुर किडनी रैकेट (Kanpur Kidney Racket) का पूरा मामला एक बड़ा अवैध ऑर्गन ट्रांसप्लांट सिंडिकेट है. जिसका खुलासा 30 मार्च को हुआ. यह रैकेट गरीबों और जरूरतमंद युवाओं को लालच देकर उनकी किडनी खरीदने और अमीर मरीजों (देशी-विदेशी) को करोड़ों में बेचने का संगठित नेटवर्क था. 

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कैसे खुलासा हुआ?

इस रैकेट की कुंडली 50 हजार के छोटे-से पेमेंट विवाद से खुली. जब एक MBA स्टूडेंट आयुष कुमार ने अपनी किडनी का सौदा किया. आयुष देहरादून में MBA की पढ़ाई कर रहा है. 

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आयुष ने पुलिस को बताया कि पिता की मौते के बाद उस पर घर की कई जिम्मेदारियां थी. घर पर लोन चल रहा था, वह अपनी फीस तक नहीं भर पा रहा था. पढ़ाई जारी रखने और परिवार पर बोझ को कम करने के लिए उसने अपनी किडनी बेचने का फैसला किया, लेकिन सर्जरी होने के बाद भी उसके खाते में पूरी रकम नहीं पहुंची. आयुष ने इसकी शिकायत पुलिस से की. 

इसके बाद कानपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जॉइंट टीम ने कल्यानपुर-रावतपुर इलाके के तीन अस्पतालों पर छापा मारा.  
इसी दौरान आयुष की सर्जरी 29-30 मार्च को अहूजा अस्पताल में हुई थी, रिसीवर मुजफ्फरनगर की परुल तोमर थी, इसके बाद एक एक कर इस पूरे रैकेट के बारे में खुलासे होते गए. 

कैसे काम कता था किडनी रैकेट और कौन था टारगेट?

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यह किडनी रैकेट ऑनलाइन बेहद एक्टिव था. जो टेलीग्राम ग्रुप के जरिए डीलर्स और एजेंट के संपर्क में रहता था. ये गिरोह ऐसे लोगों को चंगुल में फंसाता था जो गरीब, जरुरतमंद और बेरोजगार हैं. इसके बाद एजेंट या मिडिलमैन इन लोगों से संपर्क कर डीलर तक पहुंचाते थे. इस रैकेट में डॉक्टर्स और अस्पताल संचालक भी शामिल थे. 

ये ही डॉक्टर्स और सर्जन, किडनी लेने की प्रक्रिया पूरी करते थे और इस प्रोसेस का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था. 

कानपुर किडनी सिंडिकेट के ये 6 चेहरे

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  • डॉ. प्रीति आहूजा, संचालक आहूजा हॉस्पिटल 
  • डॉ. सुरजीत आहूजा, संचालक आहूजा हॉस्पिटल 
  • शिवम अग्रवाल, दलाल 
  • डॉ. राजेश कुमार, संचालक, मेड लाइफ हॉस्पिटल
  • डॉ. नरेंद्र सिंह, संचालक, प्रिया हॉस्पिटल
  • डॉ. राम प्रकाश, संचालक मेड लाइफ हॉस्पिटल

पुलिस ने इन सभी को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है ये रैकेट पिछले 3-4 साल से 40-60 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका. ये नेटवर्क लखनऊ, मुंबई, कोलकाता तक फैला हुआ था. इस रैकेट के कई अहम और बड़े चेहरे फरार हैं. हालांकि पुलिस को छापेमारी में 1.75 लाख कैश और दवाइयां बरामद हुईं हैं. पुलिस ने रावतपुर थाने में Transplantation of Human Organs Act 1994 की धाराओं में केस दर्ज किया है. इसके साथ ही 50 से ज्यादा हॉस्पिटल जांच के दायरे में हैं. वहीं, CMO ने मेडलाइफ अस्पताल सील कर दिया, बाकी अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है. इस मामले में ED की भी एंट्री हो गई है जो मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है. 

अब कैसी है आयुष की हालत? 

किडनी बेचने वाला MBA स्डूटेंट आयुष हैलट अस्पताल के सुपर स्पेशसिलयिटी में बने ICU में एडमिट है. उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है. वह बार-बार एक ही बात कह रहा है कि उसकी मां को इस बारे में न बताया जाए. हालांकि उसकी रिक्वेस्ट पर बिहार से दोस्त को बुलाया गया है. जो उसे देखते ही फफक पड़ी. इस नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस कानपुर से लेकर दिल्ली और लखनऊ मेरठ तक छापेमारी कर रही है. इस गिरोह में अभी और नए बड़े खुलासे होने की उम्मीद है. पुलिस का कहना है कि वह जल्द से जल्द इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक भी पहुंच जाएगी.  

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