खुद को बनाया ‘गॉड’, अपने ही धर्मगुरु पर ट्रंप ने उठाए सवाल, पोप ने एक झटके में तोड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति का घमंड!
दुनिया को अपने इशारे पर कंट्रोल करने की चाह रखने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने खुदको ‘ईश्वर’ घोषित कर दिया. ईरान संग वार्ता फेल होने के बाद ईसाईयों के सर्वोच्च धर्मगुरु ने उन्हें आईना क्या दिखाया ट्रंप बुरी तरह भड़क गए. जानें क्या है पूरा मामला
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Donald Trump Comment on Pope Leo: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज तक आए, शांति वार्ता के लिए थाली भी सजी, लेकिन उस थाली के पकवान मुंह को न लगे. 21 घंटे की लंबी बातचीत का नतीजा जब शिफर रहा तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए स्थिति ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसी हो गई. जब ऐसी सिचुएशन में ईसाईयों के सबसे बड़े धर्म गुरु माने जाने वाले पोप लियो ने ट्रंप को आईना दिखा दिया तो ट्रंप बौखला गए और खुद की तुलना भगवान से कर दी.
पोप लियो ने हाल ही में ईरान संघर्ष पर चिंता जताई थी. उन्होंने अपने अलग-अलग संबोधन में हिंसा खत्म करने की अपील करते हुए कहा था कि ताकत का घमंड खतरनाक होता है. उन्होंने इससे बचने के लिए प्रार्थना और शांति को जरूरी बताया था. उन्होंने जंग रोकने और वार्ता के लिए सभी देशों को साथ आने की अपील की. पोेप ने ट्रंप का बिना नाम लिया कहा था, उनके हाथ खून से सने हैं.
बौखलाए ट्रंप ने खुदको ‘यीशु’ बनाया
पोप लियो की टिप्पणी से भड़के ट्रंप ने खुदको उनसे बड़ा बता दिया. ट्रुथ सोशल पोस्ट में पोप की आलोचना करते हुए कहा कि वो कट्टर लेफ्ट के प्रभाव में हैं और विदेश नीति को कमजोर कर रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने Truth पर एक पोस्ट भी किया. जिसमें एक तस्वीर पोस्ट की गई है. इस तस्वीर में उन्होंने खुद को यीशु मसीह जैसी वेशभूषा में दिखाया. तस्वीर में उन्होंने बिस्तर पर पड़े व्यक्ति के सिर पर हाथ रखा हुआ है. उनकी उंगलियों से प्रकाश निकल रहा है, जबकि एक सैनिक, एक नर्स, एक प्रार्थना करती महिला और बेसबॉल टोपी पहने एक दाढ़ी वाला व्यक्ति सभी उन्हें प्रशंसा भरी निगाहों से देख रहे हैं. ऊपर आकाश में चीलें, एक अमेरिकी झंडा और धुंधली छवियां दिखाई दे रही हैं. ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘पोप लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति के लिए बहुत बुरे हैं.’ पोप लियो पर ट्रंप की इस टिप्पणी से हाइट हाउस और वेटिकन के बीच तनाव फिर से बढ़ गया.
ट्रंप ने लिखा, ‘पोप मेरी सरकार के 'डर' की बात तो करते हैं, लेकिन वो उस डर के बारे में कुछ नहीं बोलते जो कोरोना के समय चर्च ने झेला था. उस वक्त चर्च में प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए पादरियों और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा था.’
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर पोप की राय पर भी निशाना साधा और कहा कि वे उस नरमी से सहमत नहीं हैं जिसे उन्होंने (पोप ने) नरमी बताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो सोचता हो कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार होना ठीक है.’
ट्रंप ने वेनेजुएला समेत विदेशों में अमेरिका के कामों का बचाव किया. उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो सोचता हो कि यह बहुत बुरा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया, एक ऐसा देश जो अमेरिका में भारी मात्रा में ड्रग्स भेज रहा था. वह देश अपनी जेल खाली कर अपराधियों को हमारे देश में भेज रहा था.’
कट्टर लेफ्ट के प्रभाव में पोप- ट्रंप
पोप की आलोचना यहीं तक नहीं रूकी. राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यक्तिगत तौर पर हमला करते हुए पोप की तुलना उनके भाई से की. उन्होंने कहा, ‘मुझे उनका भाई लुइस उनसे ज्यादा पसंद है, क्योंकि लुइस पूरी तरह से एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के समर्थक हैं. वह इसे समझते हैं और लियो नहीं.’
ट्रंप ने लंबे चौड़े ट्रुथ सोशल पोस्ट में पोप की आलोचना करते हुए कहा कि वो कट्टर लेफ्ट के प्रभाव में हैं और विदेश नीति को कमजोर कर रहे हैं.
पोप लियो ने दिया ट्रंप को जवाब
पोप लियो XIV ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से किसी भी तरह के डिबेट से स्पष्ट इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा ऐसा इसलिए क्योंकि ‘उनका काम राजनीति करना नहीं बल्कि दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाना है.’
पोप ने कहा कि वह ‘अपनी भूमिका को एक राजनीतिज्ञ के तौर पर नहीं देखते, मैं कोई राजनेता नहीं हूं, और मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता.’ इसके अलावा, ‘मुझे नहीं लगता कि गॉस्पेल (ईशोपदेश) का गलत इस्तेमाल किया जाना चाहिए जैसा कि कुछ लोग कर रहे हैं.’
वेटिकन न्यूज के मुताबिक, उन्होंने जंग को अनावश्यक बताते हुए आगे कहा, ‘मैं युद्ध के खिलाफ पूरी ताकत से बोलता रहता हूं और समस्याओं का हल खोजने के लिए देशों के बीच शांति, बातचीत और बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने की कोशिश करता हूं.’ आज बहुत से लोग परेशान हैं, बहुत से बेगुनाह लोगों की जान जा रही है, और मेरा मानना है कि किसी को तो खड़े होकर कहना चाहिए कि एक बेहतर तरीका है.’
पोप ने फिर शांति अपील करते हुए कहा, ‘मैं यह बात दुनिया के सभी नेताओं से कहता हूं, सिर्फ उनसे (ट्रंप) नहीं, आइए हम युद्ध खत्म करें और शांति-सुलह को बढ़ावा दें.’
अमेरिकी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए, जिसने यही सवाल पूछा था, पोप ने कहा, ‘मुझे ट्रंप प्रशासन से या गॉस्पेल के संदेश को बोलने से कोई डर नहीं है, मेरा मानना है कि मैं यही करने के लिए यहां हूं, चर्च का यही काम है.’
उन्होंने फिर कहा, ‘हम राजनेता नहीं हैं, हम विदेश नीति को उसी नजरिए से नहीं देखते जैसा वह समझते होंगे, लेकिन मैं एक शांतिदूत के तौर पर गॉस्पेल के संदेश में विश्वास करता हूं.’
पोप लियो ने हाल ही में ईरान संघर्ष पर चिंता जताई थी. उन्होंने अपने अलग-अलग संबोधन में हिंसा खत्म करने की अपील करते हुए कहा था कि ताकत का घमंड खतरनाक होता है. उन्होंने इससे बचने के लिए प्रार्थना और शांति को जरूरी बताया था.
ईरान ने की ट्रंप की आलोचना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पोप लियो पर विवादित टिप्पणियों के बाद ईरान ने भी ट्रंप को आईना दिखाया. ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘पोप ने शांति के लिए प्रार्थना की, ट्रंप ने उन्हें कमजोर कहा और बोला कि मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो मेरी आलोचना करे.’
दूतावास ने ट्रंप पर सवाल उठाते हुए कुछ घटनाक्रम का हवाला दिया. ईरानी दूतावास ने कहा, इस व्यक्ति (ट्रंप) के कारनामों से जानते हैं कि यह कौन है- वह सालों तक लगातार एपस्टीन के आइलैंड पर जाता रहा, जब उसकी पत्नी प्रेग्नेंट थी, तो उसने एक पोर्न स्टार को चुप रहने के लिए पैसे दिए और इसके लिए उसे सजा हुई. 34 गंभीर अपराध. उसकी मिसाइल मिनाब में मासूम बच्चों से भरे एक स्कूल से टकराई, जिसमें 168 की मौत हुई.
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ईरानी दूतावास ने आगे कहा, ‘छह महीने पहले, उसने (ट्रंप) अपने मुंह से कहा था, मैं स्वर्ग नहीं जा रहा हूं (यह एकमात्र ईमानदार वाक्य था जो उसने कभी कहा था), पोप ने तुम्हारी आत्मा के लिए एक मोमबत्ती जलाई, लेकिन स्वर्ग के दरवाजे पर 168 छोटी लड़कियां हैं जो तुमसे पहले वहां पहुंच गईं, तुम्हारी वजह से, उन्हें तुम्हारा नाम याद रहेगा, नरक तुम्हारा इंतजार कर रहा है, डॉन.’
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