ट्रंप के पास केवल 15 दिन बाकी, जा सकती है कुर्सी! ईरान से जंग के बीच एक्सपर्ट ने दी बड़ी वॉर्निंग
ईरान पर हमले फैसले को अमेरिकी संसद का भी समर्थन नहीं मिला था. अमेरिकी कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ है. वहीं, अमेरिका के लाखों लोग ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर हैं. लोग बड़े पैमाने पर ट्रंप की नीतियों का विरोध कर रहे हैं.
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पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चली ईरान और US के बीच 21 घंटे की लंबी बातचीत का नतीजा सिफर रहा. इसका खामियाजा ईरान से ज्यादा अमेरिका को भुगतना पड़ेगा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबाव की रणनीति यहां काम आती नहीं दिखी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस खाली हाथ बेआबरू होकर कूचे से निकले. इस वार्ता के फेल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल है क्या युद्ध फिर से शुरू होगा? अगर ऐसा होता है तो क्या उसकी आंच ट्रंप की कुर्सी तक भी आएगी?
भारत के पूर्व राजनयिक महेश सचदेव ने युद्ध जारी रखने की नीति को ट्रंप के लिए खतरे की घंटी बताया है. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान के साथ संघर्ष जारी रहा तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग का खतरा मंडरा सकता है.
निचले स्तर पर पहुंची ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग
चूंकि ईरान पर हमले के ट्रंप के फैसले को अमेरिकी संसद का भी समर्थन नहीं मिला था. अमेरिकी कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ है. वहीं, अमेरिका के लाखों लोग ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर हैं. लोग बड़े पैमाने पर उनकी नीतियों का विरोध कर रहे हैं. न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए महेश सचदेव ट्रंप के लिए बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा, अमेरिका में ट्रंप की लोकप्रियता तेजी से घट रही है और उनकी अनुमोदन रेटिंग (Approval Rating) अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.
महेश सचदेव ने बताया कि दो-तिहाई से ज्यादा अमेरिकी ईरान पर युद्ध जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में ट्रंप को महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को संवैधानिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ रहा है. अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को देश के बाहर युद्ध छेड़ने का अधिकार तो है, लेकिन संघर्ष शुरू होने के 60 दिनों के अंदर कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी. युद्ध पहले ही 40 दिनों से ज्यादा चल चुका है और अस्थायी विराम के पांच दिन बीत गए हैं, अब केवल करीब 15 दिन बचे हैं.
अमेरिका की विकास दर के लिए क्या है चिंता?
पूर्व राजनयिक महेश सचदेव ने कहा कि पहली तिमाही की अमेरिकी विकास दर घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई है, जो पहले 4.5 प्रतिशत थी. इसके अलावा, राष्ट्रपति की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है. हालांकि अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन बहुमत है, लेकिन कई रिपब्लिकन सांसद और अधिकांश डेमोक्रेट युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि मध्यावधि चुनाव (Midterm Election) मात्र सात महीने दूर हैं.
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महेश सचदेव ने आगे कहा, अगर यह संघर्ष जारी रहा तो ट्रंप पर महाभियोग का वास्तविक खतरा पैदा हो सकता है, क्योंकि एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप और उनके सहयोगियों का नाम पहले ही आ चुका है. इसके बाद अमेरिकी कांग्रेस और अमेरिकियों की नाराजगी उन पर और भी भारी पड़ सकती है. लगातार युद्ध से रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर नकारात्मक असर पड़ेगा और ट्रंप के लिए हालात ज्यादा मुश्किल हो जाएंगे.
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