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स्कूलों की मनमानी बेनकाब… दूसरी क्लास की किताबों का बिल 9 हजार पार, वायरल वीडियो से मची हलचल

बच्चों की पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ता जा रहा है. चंडीगढ़ के एक वायरल वीडियो में पिता ने बताया कि क्लास 2 की किताबें तय दुकान से खरीदनी पड़ीं, जिनका बिल 9 से 12 हजार रुपये तक पहुंच गया. साथ ही बच्चों के भारी बैग ने चिंता और बढ़ा दी है.

स्कूलों की मनमानी बेनकाब… दूसरी क्लास की किताबों का बिल 9 हजार पार, वायरल वीडियो से मची हलचल
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आज के दौर में बच्चों की पढ़ाई अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी बनती जा रही है. नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही अभिभावकों पर किताबों और स्टेशनरी का भारी खर्च टूट पड़ता है. हाल ही में चंडीगढ़ से सामने आए एक वायरल वीडियो ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है. वीडियो में एक पिता ने जिस तरह अपनी परेशानी बताई, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि छोटे बच्चों की किताबें खरीदना भी कई परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है.

दूसरी कक्षा की किताबें बनीं महंगी सौदा

वीडियो में दिख रहा है कि नियम होने के बावजूद अभिभावकों को एक तय दुकान से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दूसरी कक्षा के एक बच्चे की किताबों का बिल करीब 9 हजार रुपये तक पहुंच गया. कुछ मामलों में यह खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक भी बताया जा रहा है. इतना ही नहीं, बच्चों के बैग का वजन भी चिंता का विषय बनता जा रहा है, जो लगभग 30 किलो तक बताया जा रहा है. यह न केवल आर्थिक बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर मुद्दा है.

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हर स्कूल का वही हाल

यह समस्या केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है. लखनऊ समेत कई शहरों से भी ऐसी ही शिकायतें सामने आ रही हैं. अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों और चुनिंदा दुकानों के बीच मिलीभगत होती है, जिसके चलते उन्हें निर्धारित दुकानों से ही महंगी किताबें खरीदनी पड़ती हैं. कई माता-पिता का कहना है कि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता और उन्हें मजबूरी में ऊंची कीमत चुकानी पड़ती है. महानगरों में तो यह खर्च और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

सोशल मीडिया पर उठा सवालों का तूफान

इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा भड़का दिया है. यूजर्स लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब किताबें “सोने के बिस्किट” जैसी महंगी हो गई हैं. कई लोगों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है, ताकि इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगाई जा सके. कुछ यूजर्स ने तो यह तक कह दिया कि आजकल छोटे बच्चों की पढ़ाई का खर्च उच्च शिक्षा से भी ज्यादा महसूस होने लगा है. वायरल हो रहे वीडियो ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियंत्रण की जरूरत को उजागर कर दिया है.

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बताते चलें कि यह मुद्दा सिर्फ खर्च का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या अभिभावकों को इस बढ़ती परेशानी से राहत मिल पाती है.

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