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'भुगतने होंगे अंजाम…', ईरान से जारी तनाव के बीच ट्रंप ने चीन को क्यों दी कड़ी चेतावनी, जानें पूरा मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म कर दी है और युद्ध जीत चुका है. वाइट हाउस में उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना अब नहीं बची, जबकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बारूदी सुरंगें हटाई जा रही हैं.

'भुगतने होंगे अंजाम…', ईरान से जारी तनाव के बीच ट्रंप ने चीन को क्यों दी कड़ी चेतावनी, जानें पूरा मामला
Image Source: Screengrab / @WhiteHouse
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब खत्म होने के बजाय बढ़ने के आसार ज्यादा दिख रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान में समझौते के उद्देश्य से हुई अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरीक़े से नाकाम रही. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने तेहरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह खत्म कर दिया है. इसके साथ ही उन्होंने चीन को अपने निशाने पर लेते हुए कड़ी चेतावनी दी है.

ट्रंप का आत्मविश्वास भरा बयान

वाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप का अंदाज बेहद आत्मविश्वास से भरा नजर आया. उन्होंने साफ कहा कि ईरान के पास अब न तो मजबूत नौसेना बची है और न ही प्रभावी वायुसेना. ट्रंप ने कहा, 'ईरानी प्रतिनिधि घंटों से बातचीत कर रहे हैं। वे कोई समझौता करें या न करें, इससे फर्क नहीं पड़ता. अमेरिका के नजरिए से हम पहले ही जीत हासिल कर चुके हैं.' उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बड़ा दावा

ट्रंप ने आगे दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का काम तेजी से चल रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की 28 माइन लेयर नावें अब समुद्र की गहराई में जा चुकी हैं. इस बयान को लेकर विशेषज्ञों में बहस शुरू हो गई है कि क्या वास्तव में हालात इतने एकतरफा हैं या यह एक रणनीतिक बयानबाजी है.

चीन को कड़ी चेतावनी

इस बीच, चीन को लेकर भी ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है. ईरान को गुप्त रूप से एयर डिफेंस सिस्टम देने की खबरों पर उन्होंने बीजिंग को सीधी चेतावनी दी. ट्रंप ने कहा कि अगर युद्धविराम के दौरान चीन ईरान को हथियार देता पाया गया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. यह बयान अगले महीने संभावित ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक से पहले तनाव को और बढ़ा सकता है. इस्लामाबाद में चल रही वार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय संपर्क बताया जा रहा है. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत में शामिल हैं.

संभावित समझौते और शर्तें

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सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है, लेकिन ट्रंप ने इस पर स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा, 'देखते हैं आगे क्या होता है.' पाकिस्तान ने इस दौरान संयुक्त गश्त का प्रस्ताव रखा है, लेकिन अमेरिका जलमार्ग पर पूरी पकड़ बनाए रखना चाहता है.

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बताते चलें कि हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक ओर ट्रंप अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति पर कायम हैं, तो दूसरी ओर दुनिया की नजरें इस वार्ता के नतीजों पर टिकी हुई हैं. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह तनाव शांति में बदलता है या फिर एक नए संघर्ष का रूप लेता है.

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