होर्मुज से भारत के लिए गुड न्यूज... ईरान के विदेश मंत्री अराघची का बड़ा ऐलान, इन देशों के जहाजों को नहीं रोका जाएगा
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान ने भारत समेत पांच देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह अहम जलमार्ग पूरी तरह बंद नहीं है और मित्र देशों के लिए खुला रहेगा.
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मिडिल ईस्ट में बीते 28 फरवरी से चल जंग के बीच ईरान ने भारत से सच्ची दोस्ती दिखाते हुए बड़ी राहत दी है. ईरान ने घोषणा की है कि वो भारत समेत पांच मित्र देशों के जहाजों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति दी जाएगी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि यह होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है और मित्र देशों के जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी. इस कदम को वैश्विक सप्लाई चेन और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर उन देशों के लिए जिनका ईरान के साथ लंबा व्यापार और कूटनीतिक संबंध है.
सोशल मीडिया पर वाणिज्य दूतावास ने की पुष्टि
मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने भी इस फैसले की पुष्टि सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से की। पोस्ट में विदेश मंत्री अराघची के हवाले से कहा गया कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध की स्थिति में ईरान अपने दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं देगा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसके माध्यम से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात होता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर गहरा असर पड़ता है.
#Iran FM Abbas #Araghchi: We permitted passage through the Strait of #Hormuz for friendly nations including China, Russia, India, Iraq, and Pakistan. pic.twitter.com/RvLtiwYB4v
— Consulate General of the I.R. Iran in Mumbai (@IRANinMumbai) March 25, 2026
अराघची का अमेरिका पर बयान
अराघची ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है. उनके अनुसार, मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान बातचीत नहीं माना जा सकता. सरकारी टेलीविजन से बातचीत में उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन अलग-अलग माध्यमों से संदेश भेज रहा है, लेकिन ईरान इसे औपचारिक कूटनीति नहीं मानता. अराघची ने जोर देकर कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में अपने लक्ष्य हासिल करने में विफल रहा है, न तो जल्दी जीत संभव हुई और न ही ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सका.
ईरान की सुरक्षा और कूटनीति
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि ईरान ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है और दुनिया को दिखाया है कि कोई भी देश उसकी सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकता. उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहता, लेकिन समाधान केवल उसकी शर्तों पर ही होगा. अराघची ने कहा कि 'ईरान युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन वह इस संघर्ष का स्थायी और सुरक्षित अंत चाहता है', जो कि इस क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील
इस महत्वपूर्ण कदम के पीछे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की अपील भी प्रमुख भूमिका निभाई है. उन्होंने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद रहने के गंभीर परिणामों पर चिंता जताई थी. उनके अनुसार, तेल, गैस और उर्वरकों की आवाजाही में रुकावट वैश्विक कृषि और आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर डाल रही है. गुटेरेस ने कहा कि आम नागरिक इस स्थिति से गंभीर नुकसान झेल रहे हैं और दुनिया को इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी.
जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की शर्तें
ईरान की यह घोषणा विशेष रूप से रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. इससे वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आएगी और मित्र देशों के व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रहेंगे. साथ ही, यह कदम ईरान की कूटनीतिक क्षमता और सुरक्षा नीति की पुष्टि करता है. जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरान ने कुछ शर्तें भी रखी हैं. 25 मार्च को न्यूयॉर्क में ईरानी मिशन ने कहा था कि गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी. इन जहाजों को किसी भी तरह की आक्रामक गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए और न ही उनका समर्थन करना चाहिए. इसके साथ ही, उन्हें घोषित सुरक्षा और संरक्षा नियमों का पालन करना होगा. ईरानी रक्षा परिषद ने यह भी तय किया है कि पारगमन से पहले सभी जहाजों को सक्षम ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करना अनिवार्य होगा.
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बताते चलें कि यह कदम मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत और अन्य मित्र देशों के लिए राहत भरा संकेत है. इससे वैश्विक व्यापार और तेल की आपूर्ति पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, यह ईरान की कूटनीतिक समझदारी और सुरक्षा रणनीति का प्रमाण भी है. इस तरह, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने का फैसला न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी एक बड़ा संदेश है. ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध का समाधान केवल उसकी शर्तों पर होगा, लेकिन मित्र देशों के जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो वैश्विक स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
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