बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पाकिस्तान, राष्ट्रपति जरदारी ने भारत से लगाई 'सिंधु जल समझौता' बहाल करने की गुहार
जल संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि बहाल करने की मांग की. राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कई क्षेत्रों में पानी की गंभीर समस्या सामने आई है.
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पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने जो सिंधु जल समझौता स्थगित किया था, अब वो पाकिस्तान का गला अच्छे से सुखाने लगा है. यही वजह है कि झूठी अकड़ में रहने वाले पाकिस्तानी नेताओं के सुर अब बदलने लगे हैं. इसको लेकर ताजा प्रतिक्रिया पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की सामने आई है. उन्होंने कहा कि संधि के स्थगित होने से पाकिस्तान की आम जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने भारत से अपील की है की इस सिंधु जल संधि को फिर से बहाल कर दिया जाए.
भारत के फैसले पर पाकिस्तान की नाराजगी
दरअसल, विश्व जल दिवस के मौके पर अपने संदेश में राष्ट्रपति जरदारी ने कहा कि साझा जल संसाधनों को इस तरह ‘हथियार’ बनाना चिंता का विषय है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने में बाधा डाल रहा है और पहले से तय तंत्रों को रोक रहा है. उनके मुताबिक, यह कदम न केवल संधि की भावना को कमजोर करता है, बल्कि दशकों से चले आ रहे संतुलन को भी बिगाड़ सकता है.
पाकिस्तान में बढ़ीं आम लोगों की मुश्किलें
जरदारी ने अपने बयान में यह भी बताया कि संधि के स्थगित होने का असर सीधे आम नागरिकों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कई इलाकों में लोग अब भी सुरक्षित और नजदीकी जल स्रोतों से वंचित हैं. खासकर महिलाएं और लड़कियां रोजाना घंटों पानी लाने में खर्च कर रही हैं, जिससे उनकी शिक्षा और रोजगार पर असर पड़ रहा है. उन्होंने साफ पानी की कमी को स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बताया. उनके अनुसार, यह स्थिति सिर्फ एक संसाधन की कमी नहीं है, बल्कि सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देती है. इसलिए इस समस्या का समाधान बेहद जरूरी है.
बातचीत ही समाधान
राष्ट्रपति जरदारी ने भारत के साथ संवाद की वकालत करते हुए कहा कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है. उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति किसी भी देश के लिए फायदेमंद नहीं होती. उनका यह भी कहना था कि पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार है और वह चाहता है कि दोनों देश मिलकर समाधान निकालें.
‘जल-आतंकवाद’ का आरोप और बढ़ती चिंता
जरदारी ने भारत के फैसले को ‘जल-आतंकवाद’ तक करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पानी के बहाव को राजनीतिक दबाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. इस तरह के आरोपों से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है. सिंधु जल संधि को लेकर मौजूदा हालात ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों को संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है. एक ओर जहां पाकिस्तान संधि बहाल करने की मांग कर रहा है, वहीं भारत की सुरक्षा चिंताएं भी अपनी जगह पर हैं. अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में क्या दोनों देश बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं या यह विवाद और गहराता है.
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गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते की खाई और गहरी हो गई. हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कड़ा कूटनीतिक प्रहार करते हुए ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया. भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि तब तक लागू नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह से बंद नहीं करता. सरकार ने कहा पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते.
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