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सबको एक करते-करते खुद कहां पिछड़ गया हिंदू समाज? RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बताई सबसे बड़ी कमी

RSS प्रमुख मोहन भागवत तेलंगाना में केशव स्फूर्ति मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए. जहां उन्होंने हिंदुओं की सबसे बड़ी कमी के बारे में बताया.

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12 Apr 2026
( Updated: 12 Apr 2026
11:48 AM )
सबको एक करते-करते खुद कहां पिछड़ गया हिंदू समाज? RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बताई सबसे बड़ी कमी
Screengrab- Youtube/Rashtriya Swayamsevak Sangh
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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदुओं में एकता की कमी की बात कही. उन्होंने RSS के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का जिक्र करते हुए उनके विचार और योगदान याद दिलाए. 

मोहन भागवत ने कहा, हेडगेवार ने देश को विदेशी शासन से आजाद कराने और हिंदुओं के बीच फूट को खत्म करने के मकसद से RSS की स्थापना की थी. उनका (हेडगेवार) मानना था कि समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी की बड़ी वजह रही. RSS प्रमुख ने कहा, 

‘हिंदू समाज में एकता की कमी है, जबकि इस समाज में अलग-अलग विचारों और पंरपराओं का सम्मान किया जाता है.’ 

‘समाज में एकता की कमी, गुलामी की वजह’

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दरअसल, RSS प्रमुख तेलंगाना के निजामाबाद के कंडाकुर्थी गांव में एक सभा को संबोधित कर रहे थे. मौका था श्री केशव स्फूर्ति मंदिर के उद्घाटन समारोह का, जहां मोहन भागवत ने समाज के भीतर एकता की कमी पर बात की. उन्होंने कहा, हेडगेवार का मानना था कि समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी की बड़ी वजह रही. 

हेडगेवार का मानना था कि अगर इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो देश को बार-बार आजादी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा. उन्होंने कहा, RSS की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं हुई थी. इसे किसी पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि को गुलामी से मुक्त कराने के लिए शुरू किया गया था. 

संघ प्रमुख ने कहा कि हेडगेवार ने ब्रिटिश शासन को खत्म करने के लिए राजनीतिक और हथियारबंद विरोध समेत कई रास्तों पर काम किया था. उन्होंने कहा, ‘आजादी के लिए काम करते हुए हेडगेवार को यह एहसास हुआ कि अंग्रेज भारतीयों को गुलाम बनाने वाले पहले बाहरी शासक नहीं थे. उनका मानना था कि समस्या सिर्फ बाहर से आने वाली ताकत नहीं थी, बल्कि समाज के भीतर भी एक कमी थी. हममें कोई कमी थी, जिसकी वजह से हमें बार-बार हार का सामना करना पड़ा. इसलिए उस कमी को दूर करना जरूरी था.’

मोहन भागवत ने कहा, 

‘हिंदू समाज सबको मान्यता देता है, खान-पान, रीति-रिवाज, भाषा कोई भी हो, दूसरो का सम्मान करो, तकलीफ मत दो, मिल जुलकर काम करो, लेकिन हिंदू समाज की अपनी स्थिति में जाति-पाति का भेद है, भाषाओं का भेद, प्रांत का भेद चल रहा है, इसलिए हिंदुओं का आधार खुद हिंदुओं को जुटाना है. पहले हिंदू एक हों.’ 

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RSS प्रमुख ने बताई हिंदुत्व की असली परिभाषा 

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मोहन भागवत ने कहा, हिंदुत्व का मतलब दूसरों के साथ मिलकर रहना, अपने रास्ते पर चलना और बाकी लोगों का सम्मान करना है. RSS की प्रार्थना में भी ये गुण नीहित है. उन्होंने दावा किया कि शाखा में आने वाले लोगों में भी ये ही संस्कार विकसित होते हैं. जैसा हेडगेवार ने सोचा था, उसी दिशा में काम करने वाले कार्यकर्ता आज सक्रिय हैं और समाज को मजबूत बनाने में लगे हैं. 

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