मध्यस्थता नहीं मदद करता है भारत...खाड़ी जंग के बीच भारतीयों की ओर से भेजी गई ईरान को मदद, राजदूत ने कहा शुक्रिया
खाड़ी जंग और मध्यस्थता पर हो-हल्ला के बीच भारत की ओर से ईरानी लोगों के लिए बड़ी मदद भेजी गई है. इसी सिलसिले में चिकित्सीय सहायता की एक और खेप रवाना कर दी गई है. ईरान के राजदूत ने आभार जताते हुए कहा कि आज साबित कर दिया है कि भारतीय सच में बड़े दयालु और सहृदयी हैं.
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खाड़ी जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर मचे हो-हल्ले के बीच भारत ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है. भारत सरकार और भारतीय लोगों ने बिना शोर मचाए वो किया है जिससे की सही मायने में ईरान और ईरानी लोगों की मदद हो सके. दरअसल भारतीयों के हवाले से ईरान को एक बार फिर मेडिकल सप्लाई रवाना कर दी गई है. आपको बता दें कि भारत के लोगों की ओर से दान में दी गई चिकित्सा सामग्रियों की दूसरी खेप को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की रेड क्रिसेंट सोसायटी के लिए रवाना कर दिया गया है. यह कदम मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत उठाया गया है.
ईरान ने भारतीयों की मदद के लिए जताया आभार!
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक्स पर एक वीडियो क्लिप पोस्ट की है. उन्होंने इसके जरिए भारत के लोगों और सरकार का आभार जताया. 3 मिनट के इस वीडियो में सहायता सामग्री की लोडिंग और ट्रक से रवानगी दिखाई गई है.
उन्होंने कहा, " ये मेरा कर्तव्य है कि मैं भारत सरकार और भारतीयों का निस्वार्थ भाव से भेजी गई सहायता सामग्री के लिए आभार जताऊं. उनके स्वैच्छिक दान की मदद से हमने जरूरी मेडिकल उपकरण और सामान खरीदे हैं. भारत सरकार और यहां के नागरिकों ने दर्शा दिया है कि मुश्किल समय में वो हमारी मदद को तैयार हैं. उन्होंने जता दिया है कि वो भरोसे के लायक और सहृदयी हैं."
ईरान के राजदूत का बयान सोशल मीडिया पर वायरल!
फथाली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिए अपने वीडियो संदेश में कहा, "बिस्मिल्लाह अर-रहमान अर-रहीम. मैं इसे अपना कर्तव्य मानता हूँ कि मैं भारत की जनता और सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करूँ, जिन्होंने इन कठिन समय में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की जनता और सरकार के प्रति अपनी सहानुभूति और एकजुटता दिखाई है. दिल्ली स्थित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के दूतावास ने भारत की जनता के स्वैच्छिक योगदान का उपयोग दवाएँ खरीदने के लिए किया; और आप इन प्रयासों का एक हिस्सा यहाँ देख सकते हैं. मैं यह कहना चाहता हूँ कि भारत की जनता ने यह साबित कर दिया है कि वे कठिन और मुश्किल समय में भरोसेमंद और दयालु भागीदार हैं. साथ ही, मैं भारत सरकार को भी धन्यवाद देना चाहूँगा कि उन्होंने सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुगम बनाने में सहयोग दिया.
मालूम हो कि यह सहायता उन जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से भेजी गई है, जो ईरान संघर्ष परिस्थितियों के कारण प्रभावित हुए हैं. इस खेप में आवश्यक दवाइयां, मेडिकल उपकरण और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सामग्री शामिल हैं.
भारत पहले भी सहायता भेज चुका है!
भारत ने पहले भी चिकित्सा सहायता की एक खेप भेजी थी, जिसे प्रभावित क्षेत्रों में वितरित किया गया. दूसरी खेप का प्रेषण इस बात का संकेत है कि भारत मानवीय संकट के समय मित्र देशों के साथ खड़ा रहने की अपनी नीति पर कायम है. इस तरह की सहायता न केवल आपदा प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाती है, बल्कि देशों के बीच मानवीय और कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत करती है.
भारत ने लगातार यह दोहराया है कि वह वैश्विक स्तर पर मानवीय सहायता और राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा, खासकर तब जब किसी देश को चिकित्सा और आपात सहायता की आवश्यकता हो.
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ईरान के अलावा और किन देशों की भारत ने की मदद!
आपको बताएं कि जंग की शुरुआत होने के बाद से ईरान को पहला देश नहीं है जिसे भारत ने मदद भेजी है. इससे पहले नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव और बुर्कीना फासो को भी विभिन्न तरीके से मदद की है.
आपको बता दें कि भारत ने 10 मार्च को 5,000 टन डीजल भेजा, अगले सप्ताह 10,000 टन और भेजा जाएगा. जबकि 7,000 टन की एक नई खेप भी रवाना की जा रही है. इसके अलावा भारत ने नेपाल, श्रीलंका और भुटान को सप्लाई जारी रखी और डीजल-तेल की अतिरिक्त सप्लाई रवाना की थी. इतना ही नहीं श्रीलंका को भी हजारों मीट्रिक टन तेल और डीजल की सप्लाई की गई है.
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The second shipment of donated medical supplies from the people of India has been dispatched to the Red Crescent Society of the Islamic Republic of Iran. pic.twitter.com/3tH9NzdbBp
— Iran in India (@Iran_in_India) April 11, 2026
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