‘पुलिस इतनी अंसवेदनशील कैसे हो गई’ 4 साल की मासूम से दुष्कर्म, जांच का तरीका देख CJI हैरान, कमिश्नर-DGP को नोटिस
आरोप है कि बच्ची को कई दिनों तक पुलिस स्टेशन, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के दफ्तर, मजिस्ट्रेट कोर्ट और अस्पताल जाना पड़ा, पुलिस बार-बार केस वापस लेने का दबान बनाती रही.
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सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराध और बच्ची से दुष्कर्म के एक मामले में हरियाणा पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए संवेदनशीलता और कानून की परिभाषा बता दी.
हरियाणा के गुरुग्राम में 4 साल की मासूम बच्ची के रेप के मामले पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े हो गए हैं. मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया है और पुलिस कमिश्नर समेत वरिष्ठ अधिकारियों को पेश होने के आदेश जारी कर दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागजी ने इस मामले में हैरानी जताते हुए पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किए. बेंच ने पुलिस की कार्रवाई को असंवेदनशील करार दिया और जांच के तरीके को बेहद चौंकाने वाला बताया.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जिस तरीके से हरियाणा पुलिस ने जांच की है वो बेहद असंवेदनशील और परेशान करने वाली है. कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि मजिस्ट्रेट ने जब बच्ची का बयान दर्ज किया था तब आरोपी उसके बेहद पास खड़ा था. कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को पूरे रिकॉर्ड के साथ पेश होने के लिए कहा है.
पीड़िता के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में चौंकाने वाली बातें बताई
पीड़ित बच्ची के माता-पिता की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पैरवी की. इस दौरान उन्होंने बेंच के सामने बताया कि महिला जांच अधिकारियों ने भी पीड़ित माता-पिता पर केस वापस लेने का दबाव बनाया है.
उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि महिला जांच अधिकारी पॉक्सो के दूसरे मामले में निलंबित हो चुकी हैं और इस केस में भी वही रवैया अपनाया जा रहा है. आरोप है कि बच्ची को कई दिनों तक पुलिस स्टेशन, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के दफ्तर, मजिस्ट्रेट कोर्ट और अस्पताल जाना पड़ा. जहां मजिस्ट्रेट ने बच्ची से कहा कि ‘सच बोलो’, इस दौरान आरोपी बच्ची के सामने था. जो कानूनी रूप से गलत है. मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस केस में आरोपियों के नाम सामने आने के बाद भी उन पर कोई सख्त एक्शन नहीं लिया गया. मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम बेंच से मांग कि है कि मामले की जांच CBI या SIT को सौंपी जाए.
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हालांकि राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि शुरुआत में महिला अधिकारी ही मामले की जांच कर रही थी बाद में उसके निलंबन के बाद SHO ने जांच अपने हाथ में ली. कोर्ट ने सरकार की जांच प्रक्रिया पर अंसोतष जताया महिला पुलिस अधिकारियों का पूरा विवरण कोर्ट में हलफनामे के साथ दाखिल करने के निर्देश दिए.
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पुलिस इतनी असंवेदनशील कैसे- सुप्रीम कोर्ट
पुलिस की कार्रवाई पर चीफ जस्टिस वाली बेंच ने नाराजगी जताई. CJI सूर्यकांत ने कहा, पहले से मानसिक सदमा झेल रहे बच्चे के लिए पुलिस इतनी असंवेदनशील कैसे हो सकती है. यह एक मेट्रोपोलिटन शहर की पुलिस का हाल है. CJI सूर्यकांत ने आगे कहा कि आप (पुलिस अधिकारी) एक सदमे से गुजर रहे बच्चे के मामले को संभाल रहे हैं. उन्होंने हैरानी जताई कि पुलिस ने माता-पिता से पूछा कि वे क्या करना चाहते हैं? यह चौंकाने वाली बात है. क्या FIR दर्ज करना उनका कर्तव्य नहीं है? क्या उन्हें कानून की बुनियादी बातें भी समझ नहीं आतीं?
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