'अफवाहों, जमाखोरों पर एक्शन...कोस्टल, बॉर्डर, साइबर एजेंसियां अलर्ट', PM मोदी ने खाड़ी संकट पर साफ कर दिया भारत का रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी में पैदा हुआ हालात पर संसद को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने देश को संघर्ष के दौरान उत्पन्न हुई स्थिति पर देश को विश्वास में लिया. उन्होंने दो टूक कहा कि संसद से पूरी दुनिया को एकजुट और एकमत संदेश देना जरूरी.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश के समक्ष पैदा हुए हालात पर संसद को संबोधित किया. उन्होंने इस दौरान कहा कि खाड़ी में इस संकट को अब तीन हफ्ते से ज्यादा बीत गए हैं. पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए प्रयासरत है. उन्होंने आगे कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत की संसद से भी यह संदेश दुनिया में जाना चाहिए कि संकट का जल्द समाधान हो. उन्होंने युद्ध के बीच स्वदेश लौटे भारतीयों की जानकारी सदन में दी और कहा कि भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. हमारे मिशन प्रभावित देशों में लगातार भारतीयों की मदद कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान पश्चिमी एशिया की स्थिति को चिंताजनक बताया. उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उससे भारत के सामने आई परिस्थितियों पर बोलते हुए कहा कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर सहायता के लिए तत्पर है.
'देश के लिए अप्रत्याशित चुनौतियां'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के सामने भी युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियों खड़ी की हैं. ये चुनौतियों आर्थिक भी हैं, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं. युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक और व्यापारिक रिश्ते हैं. जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी महत्वपूर्ण रास्ता है. विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है.
'पूरी दुनिया में एकजुट आवाज देनी जरूरी'
उन्होंने कहा कि हमारे लिए ये क्षेत्र एक और कारण से भी अहम है. लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां काम करते हैं. वहां समंदर में जो कमर्शियल शिप चलते हैं, उनमें भारतीय क्रू मैंबर की संख्या भी बहुत अधिक है. ऐसे अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएं स्वभाविक रूप से अधिक हैं. इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए.
पीएम मोदी ने कहा कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, जब से हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है. मैंने खुद पश्चिम एशिया के देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है. सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है. दुर्भाग्य से कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ घायल हुए हैं. ऐसे मुश्किल हालात में प्रभावित परिवारों को आवश्यक मदद दी जा रही है. जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन हैं, वे लगातार भारतीयों की मदद में जुटे हैं. वहां काम करने वाले भारतीय हों या टूरिस्ट हों, सभी को हर संभव मदद दी जा रही है. हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं. यहां भारत और अन्य प्रभावित देशों में 24 घंटों कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की गई हैं. सभी भारतीयों को त्वरित जानकारी दी जा रही है.
'भारत का रुख साफ, कूटनीति भी स्पष्ट'
वहीं पश्चिम एशिया में जंग पर भारत के रुख पर पीएम मोदी ने कहा कि, "कूटनीति में भारत की भूमिका स्पष्ट है. शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है. मैंने पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बात की है. मैंने सभी से तनाव कम करने और इस संघर्ष को समाप्त करने का आग्रह किया है. भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन अवसंरचना पर हमलों की निंदा की है. वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को अवरुद्ध करना अस्वीकार्य है. भारत इस युद्ध जैसे माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति के माध्यम से लगातार प्रयास कर रहा है. भारत ने हमेशा मानवता के कल्याण और शांति का समर्थन किया है. मैं दोहराता हूं कि इस समस्या का एकमात्र समाधान संवाद और कूटनीति है. हमारे सभी प्रयास तनाव कम करने और इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में हैं. इस युद्ध में किसी के भी जीवन को खतरे में डालना मानवता के हित में नहीं है. इसलिए, भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है..."
"जब ऐसे संकट उत्पन्न होते हैं, तो कुछ तत्व उनका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. इसलिए, सभी कानून और व्यवस्था एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया कर दिया गया है. सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है." तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या रणनीतिक प्रतिष्ठान हों, उन्हें मजबूत किया जा रहा है, इस युद्ध के कारण जो स्थिति उत्पन्न हुई है उसके दूरगामी और लंबे समय तक प्रभाव देखने को मिलेंगे, इसलिए हमें एकजुट रहना होगा, तैयार रहना होगा..."
'भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता'
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है. युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.72 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं. ईरान से एक हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं. इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं. खाड़ी के देशों में भारतीय स्कूलों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं. सीबीएसई ने ऐसे सभी भारतीय स्कूलों में होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. छात्रों की पढ़ाई लगातार चलती रहे, इसके लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है.
इससे पहले रविवार को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया में विकसित हो रहे संकट के बीच निर्बाध आपूर्ति और स्थिर वितरण सुनिश्चित करना था.
बैठक में पूरे देश में आवश्यक सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने, लॉजिस्टिक्स को स्थिर रखने और वितरण प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया गया. अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को ईंधन की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी.
सूत्रों के अनुसार, सरकार वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर उपभोक्ताओं और उद्योगों पर न पड़े, इसके लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं. बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच पर्याप्त भंडार बनाए रखने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं. यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में हैं. यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, "India's role in diplomacy is clear. From the beginning, we have expressed our deep concern about this conflict. I have personally spoken to all the relevant leaders in West Asia. I have urged everyone to… pic.twitter.com/e5rcScVtoh
— ANI (@ANI) March 23, 2026
पीएम मोदी ने इस दौरान सरकार द्वारा उर्जा सुरक्षा को लेकर किए गए कार्यों पर कहा कि भारत ने पिछले 11 साल में अपनी क्रूड ऑयल इम्पोर्ट का डाइवर्सिफिकेशन किया है. प्रधानमंत्री ने संसद को जानकारी दी कि पहले भारत 27 देशों से एनर्जी इम्पोर्ट करता था, आज 41 देशों से इम्पोर्ट कर रहा है. उन्होंने क्रूड ऑयल को तेल, डीजल और अन्य प्रोडक्ट्स में तब्दील करने के प्रॉसेस पर कहा हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी में भी वृद्धि हुई है. हमारे पास 53 लाख मीट्रिक टन क्रूड ऑयल का रिजर्व है. हमारा लक्ष्य 65 लाख मीट्रिक टन का है.
उन्होंने आगे कहा कि हमारा प्रयास है कि हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज सुरक्षित भारत पहुंचें. हम हर पक्ष से संवाद कर रहे हैं. ऐसे प्रयासों के कारण होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं. पिछले 10-11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर बहुत काम हुआ है. पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग हो रही है. इससे भी बचत हो रही है. हमने मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाया है. हमने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बहुत अधिक बल दिया. आज वैकल्पिक ईंधन पर जिस कदर काम हो रहा है, भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा. एनर्जी आज इकोनॉमी की रीढ़ है. ग्लोबल एनर्जी जरूरतों को पूरा करने वाला वेस्ट एशिया है. दुनियाभर की अर्थव्यवस्था वर्तमान संकट से प्रभावित हो रही है.
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, "The difficult conditions created in the world by this war are likely to have lasting effects for a long time, so we must be prepared and remain united. We have faced such challenges with unity during the… pic.twitter.com/MCv6tiqyRq
— ANI (@ANI) March 23, 2026
PM मोदी ने बताई सरकार की रणनीति
पीएम ने आगे कहा कि सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म प्रभाव के लिए भी रणनीति के साथ काम कर रही है. हम हर स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा कर रहे हैं. जहां भी जरूरत है, सपोर्ट दिया जा रहा है. इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है, जो हर रोज मिलता है. साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे. भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है. खरीफ सीजन की ठीक से बुवाई हो सके. सरकार ने खाद्य की पर्याप्त व्यवस्था की है. हमने पहले भी किसानों पर संकटों का बोझ नहीं पड़ने दिया था. दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी तीन हजार रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन भारत के किसानों को वही बोरी तीन सौ रुपये से भी कम कीमत पर दी गई थी.
'बातचीत के जरिए होर्मुज से भारत के कई जहाज निकले'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि बीते दिनों होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए हैं. उन्होंने बताया कि सरकार अलग-अलग देशों के सप्लायर के साथ संपर्क में है. प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई होती रहे.
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "सरकार अलग-अलग देशों के सप्लायर के साथ भी संपर्क में है. प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई होती रहे. भारत सरकार गल्फ और आसपास के शिपिंग रूट्स पर निरंतर नजर बनाए हुए है. हमारा प्रयास है कि तेल हो, गैस हो या फर्टिलाइजर हो, जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें. हम अपने सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं, ताकि हमारे मैरीटाइम कॉरिडोर सुरक्षित रहें." उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों के कारण बीते दिनों होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं.
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से भारत के सामने आई परिस्थितियों पर पीएम मोदी ने कहा, "भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं. युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है. पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो, देश के सामान्य परिवारों को परेशानी कम से कम हो, इस पर फोकस रहा है."
घरेलू उर्जा स्त्रोतों पर सरकार कर रही काम: पीएण
पीएम मोदी ने सदन में जानकारी दी कि देश अपनी जरूरत की 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. उन्होंने कहा कि इसकी सप्लाई में अनिश्चितता के कारण सरकार ने एलपीजी के घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी है. इसके साथ ही, एलपीजी के देश में उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है. देश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सुचारू रूप से होती रहे, इस पर लगातार काम किया गया है.
उन्होंने कहा, "एनएसडी सिक्योरिटी को लेकर बीते एक दशक में उठाए गए कदम और भी प्रासंगिक हो गए हैं. भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपने ऊर्जा आयात का डायवर्सिफिकेशन किया है. पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी और एलपीजी, एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से आयात किया जाता था. आज भारत 41 देशों से ऊर्जा आयात करता है."
कच्चे तेल के भंडारण पर सरकार का जोर!
सदन में पीएम मोदी ने कहा कि बीते दशक में संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है. आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व है. 65 लाख से अधिक मीट्रिक टन के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है. हमारी तेल कंपनियों के पास जो रिजर्व रहता है, वह अलग है. पिछले 11 साल में हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
काम आई सरकार की तैयारी: PM मोदी
उन्होंने कहा, "संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी काम आ रही है. पिछले 10-11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है. एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक-डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी थी. आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं. इसके कारण प्रति वर्ष करीब 4.5 करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है. ऐसे ही रेलवे के बिजलीकरण से फायदा हो रहा है."
मुख्य शिपिंग मार्गों में व्यवधान को लेकर भी चिंता जताई गई, खासकर होमुर्ज जलडमरू मध्य को लेकर, जहां से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. एक दिन पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपित से बातचीत की थी और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करते हुए शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया था. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया था और चेतावनी दी कि किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है.
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मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिए, भारत ने अपने तेल और गैस आयात के स्रोतों में विविधता लाई है और अमेरिका, रूस व नाइजीिरया जैसे देशों से खरीद बढ़ाई है. अब भारत के लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी क्षेत्र के बाहर के स्रोतों से आते हैं. सरकार ने एलपीजी आपूर्ति प्रबंधन के प्रयास भी तेज किए हैं, जिसमें संभावित कमी को दूर करने के लिए अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की खरीद शामिल है. हालांकि एलपीजी उपलब्धता को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं. अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आई है और ऑनलाइन बुकिंग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है.
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