जिसके जिम्मे थी नए आतंकियों की भर्ती, जो था भारत का दुश्मन, ऐसे लश्कर आतंकी बिलाल आरिफ को अज्ञात हमलावरों ने किया ढेर
बीते दिनों लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर को अज्ञात बंदूक़धारियों ने लश्कर मुख्यालय मुरीदके में ही ढेर कर दिया और वहां से भाग गया. सबसे बड़ी बात ये कि इस बार भी ये कार्रवाई किसी बाहरी और गुमनाम हमलावर ने की है, जिसके बाद पाक फौज में भी हड़कंप मच गया है.
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पाकिस्तान के मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय में बीते दिनों धमाका हुआ. कहा जा रहा है कि इसमें भारत का दुश्मन लश्कर-ए-तैयबा का सीनियर कमांडर बिलाल सलाफी मारा गया. इसके साथ ही कहा जाने लगा है कि भारत को नुकसान पहुंचाने में शामिल एक और आतंकी का खात्मा हो गया है. अब पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां हैरान हैं. जानकारी के मुताबिक ये घटना 21 मार्च को घटित हुई.
कहा जा रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय में हुए इस हमले को कुछ अज्ञात लोगों ने अंजाम दिया, जिसमें सलाफी ढेर हो गया. इस वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया गया, वो और भी चौंकाने वाली है. दरअसल मुरीदके लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वार्टर है और वहां ईद की नमाज चल रही थी. खबर के मुताबिक बिलाल के दोनों तरफ दो लोग नमाज पढ़ रहे थे. नमाज खत्म होते ही उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. इतना ही नहीं, संभवत: बिलाल पर चाकू से भी वार किया गया और सबके सामने मारा गया. इस दौरान और वहां लोगों की भीड़ लग गई और चीख-पुकार मच गई.
कौन था भारत का दुश्मन बिलाल आरिफ सलाफी?
बिलाल वही आतंकी था जो पाकिस्तान में नौजवानों को कश्मीर में जिहाद के लिए रिक्रूट किया करता था. इसे लश्कर-ए-तैयबा का सेकंड-इन-कमांड भी समझा जाता था. यह वही व्यक्ति था जिसने हमास वालों को मुरीदके में बुलाया था. इसके हमास और सीधे फिलीस्तीन से संबंध थे. इसने हमास वालों को बुलाकर बाकायदा ट्रेनिंग दिलवाई और यह खुद ट्रेनिंग मास्टर था. इसने पूरे पाकिस्तान में घूम-घूम कर 12 से लेकर 17 साल के बच्चों को इकट्ठा किया और कश्मीर में जिहाद के लिए भेजा.
किसी ने नहीं दिखाई बिलाल के हमलावरों से निपटने की हिम्मत!
पाकिस्तान में बीते कई साल से इन लोगों का खात्मा अज्ञात लोगों द्वारा किया जा रहा है. पाकिस्तान का उर्दू मीडिया इन्हें नामालूम अफराद कह कर संबोधित करते हैं. हैरानी की बात ये रही कि वहां मौजूद बिलाल के अन्य गुर्गों में से किसी की हिम्मत नहीं थी कि उन दो हमलावरों को छू भी सकें. इसलिए वे आए, अपना काम किया और चले गए.
अब सवाल ये उठाए जा रहे हैं कि ये आतंकी जो पाकिस्तानी फौज-ISI के पिट्ठू हैं, उन्हीं के पैसे पर पलते हैं, उन्हें कौन मार सकता है. इसलिए कहा जाने लगा है कि ऐसा भी हो सकता है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों में अब ऐसे लोग आ गए हों जो इतने त्रस्त हों और वे खुद टिप दे रहे हों कि इन्हें मारो. इसकी दो थ्योरी बताई जा रही है. दरअसल इन आतंकियों को सांप कहना गलत नहीं होगा. क्योंकि इन्हें दूध पिलाने वाला ये नहीं कह सकता कि उसे डसेगा नहीं.
क्या आसिम मुनीर ने लश्कर को दिया संदेश!
ऐसे में ईरान-इजरायल और अफगानिस्तान के साथ जंग में ये आतंकी फौज, मुनीर को दबाव में ला रहे थे और आंखें दिखा रहे थे. ऐसे में इनसे परेशान होकर आर्मी ने ही इन्हें जहन्नुम भेज दिया. दूसरी थ्योरी है भारत वाली, जिसमें कि भारत के दुश्मनों को चुन-चुनकर अज्ञात हमलावरों द्वारा खात्मा किया जा रहा है. बिलाल की भी हत्या उस जगह हुई है, जहां ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की कार्रवाई हुई थी और ये लश्कर का गढ़ है, आतंकी यहां 24 घंटे रहते हैं.
नामालूम अफराद से खौफ में पाक फौज!
आपको बताएं कि लश्कर का यह मरकज़ सबसे सुरक्षित जगह है. वहां घुसकर मार देना बताता है कि कोई अंदर से नामालूम अफराद को टिप दे रहा है. हवाई हमला तो फिर भी आसान है, लेकिन इन नामालूम अफरादों का एक्सेस बहुत गहरा है, जिसमें भारत की कोई भी भूमिका नहीं है. खौफ का आलम यह है कि आसिम मुनीर जब छह आर्मी कमांडरों की बैठक लेता है, तो वह बुलेटप्रूफ शीशे के पीछे जैकेट पहनकर बैठता है कि ना मालूम उन कमांडरों में से ही कौन नामालूम अफराद निकल जाए. पाकिस्तानी मीडिया कह रहा है कि मुनीर जब बाथरूम जाता है, तब भी वहां दो बॉडीगार्ड खड़े रखता है कि कहीं बाथरूम में कोई नामालूम अफराद या देवदूत प्रकट न हो जाए.
ऑपरेशन सिंदूर में लश्कर-ए-तैयबा के इसी मुख्यालय को भारतीय सेना ने निशाना बनाया था, जिसे इन्होंने फिर से खड़ा कर लिया था. वहां नमाज पढ़ी जा रही थी और अज्ञात बंदूकधारी यानी नामालूम अफराद ने ना सिर्फ लश्कर के मुख्यालय में घुसपैठ की बल्कि लश्कर के इस मुख्य चेहरे को ठोक कर निकल गया.
इससे पहले एक आतंकी खैबर पख्तूनख्वा में दाढ़ी बनवा रहा था, वहां पता चला कि नाई ने उनका गला रेत दिया और वह नाई भी नामालूम अफराद निकला. पाकिस्तानी सवाल उठा रहे हैं कि बेचारे अपने ही देश में सुरक्षित नहीं हैं. आखिर कौन है वो गुमनान गनमैन जो इनको ठोक कर निकल जा रहा है. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स तो ये भी कह रहे हैं कि ईद पर बिलाल को ईदी दे दी गई.
आसिम मुनीर को शियाओं की धमकी!
पाकिस्तान में फौज और आतंकी सरगना इन दिनों हर वक्त बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर रह रहे हैं. उन्हें डर है कि ना जाने कौन कब उसे आकर मार दे. यही पाकिस्तान में सबसे बड़ा डर है. नेता नहीं डरते क्योंकि उन्हें मारकर कोई धरती का बोझ कम नहीं करना चाहता, लेकिन ये सब जिहादियों और आर्मी वालों को मार रहे हैं. खबर के मुताबिक एक शिया धर्मगुरु इशारों ही इशारों में पाकिस्तानी आर्मी में ही बगावत पैदा कर दी. उन्होंने धमकी दी कि तुम्हारी 14 लाख की आर्मी में 3 लाख शिया हैं, तो पता नहीं कहां-कहां नामालूम अफराद मिलेंगे. ये बयान आसिम मुनीर के उस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने 18 मार्च को शिया उलेमाओं को धमकी दी थी कि उन्हें अगर ईरान से इतनी ही मोहब्बत है तो वहीं चले जाएं.
कितने बदल गए भारत-पाक में हालात!
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याद करिए आज स्थिति कितनी बदल गई है. ये वो ही पाकिस्तान है जिसने 2014 के पहले भारत के अहमदाबाद, सूरत, वाराणसी, दिल्ली, मुंबई, मालेगांव, औरंगाबाद, हैदराबाद और बेंगलुरु में बम ब्लास्ट करवाए. अब इन 10 सालों में ऐसा क्या बदला कि भारत में कुछ नहीं हो रहा और पाकिस्तान में वही सेना और वही अधिकारी होने के बावजूद वे अपने ही, मुस्लिम देश में ईद नहीं मना पा रहे हैं. भारत के मुसलमान अच्छे से रोजा रख पा रहे हैं, ईद मना रहे हैं. अब तो फैज खान जैसे मुस्लिम भी बिल्कुल ठीक कहने लगे हैं कि यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, इसलिए मुसलमान बहुत इत्मीनान से रह रहे हैं.
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