बैटरी डाउन? टेंशन नहीं! चलते-चलते खुद चार्ज हो जाती है REEV कार
Reev Car: REEV एक इलेक्ट्रिक कार ही होती हैं लेकिन थोड़ी “स्मार्ट”.यह गाड़ी पूरी तरह बैटरी से चलती है, यानी ड्राइव करते वक्त आपको वही स्मूद और साइलेंट अनुभव मिलता है जो एक EV में मिलता है.
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REEV ELECTRIC CAR: आजकल हर कोई इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बात कर रहा हैं , लेकिन सच ये भी हैं कि बहुत से लोग अभी भी इन्हें खरीदने से हिचक रहे हैं. वजह सीधी हैं , डर ये डर कि कहीं रास्ते में बैटरी खत्म न हो जाए , और कार बीच सड़क पर कड़ी रह जाए. स्क्रीन पर लोग बैटरी या 0 % देखा किसी भी ड्राइवर के लिए टेंशन भरा हो सकता हैं. यही डर लोगों को पेट्रोल -डीज़ल या हाइब्रिड गाड़ियों कि तरफ बनाए रखता हैं और इसी समस्या का हल निकालने के लिए ऑटो कंपनिया नई - नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं. उन्हीं में से एक है रेंज एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल (REEV) जो धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है.
क्या होती है REEV गाड़ी?
REEV एक इलेक्ट्रिक कार ही होती हैं लेकिन थोड़ी “स्मार्ट”.यह गाड़ी पूरी तरह बैटरी से चलती है, यानी ड्राइव करते वक्त आपको वही स्मूद और साइलेंट अनुभव मिलता है जो एक EV में मिलता है. फर्क बस इतना है कि इसमें एक छोटा पेट्रोल इंजन भी होता है , लेकिन ये इंजन गाड़ी को सीधे नहीं चलाता. इसका काम सिर्फ इतना होता है कि जब बैटरी कम होने लगे, तो ये इंजन एक जनरेटर को चलाकर बिजली बनाता है और बैटरी को फिर से चार्ज कर देता है. यानी आप चलते-चलते भी बैटरी चार्ज कर सकते हैं.
कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी?
जब आप REEV गाड़ी चला रहे होते हैं, तो आपको बिल्कुल भी फर्क महसूस नहीं होता कि अंदर क्या चल रहा है. गाड़ी चुपचाप, स्मूद तरीके से चलती रहती है.
लेकिन जैसे ही बैटरी एक तय लेवल से नीचे जाती है, अंदर लगा छोटा इंजन अपने आप चालू हो जाता है. वो बैटरी को चार्ज करता है और आप बिना रुके अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको हर बार चार्जिंग स्टेशन ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती. खासकर लंबी दूरी पर ये बहुत राहत देता है.
और क्योंकि इंजन सिर्फ चार्जिंग के लिए चलता है, वो एक ही स्पीड पर चलता है , जिससे उसकी एफिशिएंसी भी बेहतर रहती है और फ्यूल की खपत भी कंट्रोल में रहती है.
हाइब्रिड और REEV में क्या फर्क है?
बहुत लोग REEV को हाइब्रिड समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं. हाइब्रिड कार में इंजन और बैटरी दोनों मिलकर गाड़ी को चलाते हैं. कभी इंजन काम करता है, कभी बैटरी, और कभी दोनों साथ. लेकिन REEV में गाड़ी सिर्फ इलेक्ट्रिक मोटर से चलती है. इंजन का रोल सिर्फ बैकअप जैसा होता है, जो बैटरी को चार्ज करता है, न कि गाड़ी को सीधे चलाता है. यानी ड्राइविंग का अनुभव पूरी तरह इलेक्ट्रिक ही रहता है.
भारत जैसे देश के लिए क्यों जरूरी है ये टेक्नोलॉजी?
भारत में अभी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है. हर जगह चार्जिंग स्टेशन मिलना अभी भी मुश्किल है, खासकर छोटे शहरों और हाईवे पर. ऐसे में REEV एक बीच का रास्ता बन सकती है. ये उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो EV लेना चाहते हैं, लेकिन “कहीं फंस न जाएं” वाले डर से पीछे हट जाते हैं.
ये टेक्नोलॉजी लोगों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ ले जा सकती है, बिना ज्यादा रिस्क के.
दुनिया में कहां-कहां इस्तेमाल हो रही है ये टेक्नोलॉजी?
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दुनिया के कई देशों में REEV टेक्नोलॉजी पहले से इस्तेमाल हो रही है.BMW i3 REx इसका एक अच्छा उदाहरण है, जिसमें छोटा इंजन बैटरी की रेंज बढ़ाने का काम करता है.चीन और यूरोप में भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम हो रहा है.चीन की कंपनी Leapmotor ने भी इस टेक्नोलॉजी पर गाड़ी बनाई है, Leapmotor C10 REEV जो दावा करती है कि ये एक बार में 1000 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज दे सकती है. इस कंपनी में Stellantis का भी हिस्सा है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और बढ़ जाती है.
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