ईरान के धार्मिक ढांचे को गिराकर ही रुकेगी जंग…! मिडिल ईस्ट के देशों ने ट्रंप से की हमला तेज करने की मांग
जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जंग रोकने के लिए कदम बढ़ाने की ओर हैं, तब मिडिल ईस्ट के देश ईरान पर हमला तेज करने की मांग कर रहे हैं. सऊदी अरब, UAE समेत कई देश तेहरान पर हमले बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.
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US-Iran Attack: एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच जंग को शांत करने के लिए बातचीत की पेशकश की गई है, दूसरी ओर खाड़ी देश अमेरिका पर इस जंग को जारी रखने का दबाव बना रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि खाड़ी देश तेहरान के नेतृत्व और धार्मिक ढांचे को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं.
अमेरिका और इजरायल के अधिकारियों का कहना है कि खाड़ी देश चाहते हैं कि अभी तक के भीषण हमलों के बावजूद ईरान का धार्मिक शासन जारी है. जिस पर बड़ी चोट के लिए हमले जारी रखने चाहिए.
ट्रंप से क्या चाहते हैं खाड़ी देश?
दावा किया जा रहा है कि सऊदी अरब, UAE, कुवैत और बहरीन ने डोनाल्ड ट्रंप से मांग की है कि सैन्य ऑपरेशन तब तक न रोका जाए, जब तक ईरानी शासन में पूरी तरह बदलाव नहीं आता है. हालांकि अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता और सेना के टॉप कमांडर्स की मौत हो गई है.
इसके बाद ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी भी मारे गए. फिर नेवी चीफ अलीरेजा तांगसिरी भी मार दिया गया. US के हमलों में ईरान को बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन जवाब में ईरान ने भी मिडिल ईस्ट की जमीन से अमेरिका में हाहाकार मचा दिया है. आलम ऐसा है कि अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर गए हैं. ‘नो किंग्स’ के नारे लगाए जा रहे हैं.
ऐसे वक्त में डोनाल्ड ट्रंप खुद युद्ध को न बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं. वह कई बार ईरान से बातचीत का दावा कर चुके हैं, लेकिन अब खाड़ी देशों के दबाव के चलते वह अपने कदम पीछे खींच सकते हैं. जबकि जंग में अकेले ईरान में 1900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. वही, मिडिल ईस्ट और इजरायल के देशों को शामिल कर लें तो यह आंकड़ा 3 हजार से ज्यादा है.
ट्रंप ने खाड़ी देशों को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया ब्रीफिंग में खाड़ी देशों के पलटवार के बारे में बात की. उन्होंने बताया, ईरान पर सऊदी अरब, कतर, UAE-कुवैत और बहरीन लगातार पलटवार कर रहे हैं. इन देशों से अमेरिकी सेना ईरान पर हमला कर रही है जबकि उन्होंने खुद इस जंग में हिस्सा नहीं लिया है, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई में इन देशों को भी नुकसान पहुंचा है ऐसे में वह अब इस जंग को रोकने के पक्ष में नहीं हैं. इनमें से सऊदी अरब और UAE का अमेरिका पर दबाव सबसे ज्यादा है.
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इसकी एक वजह ये भी है कि UAE ने ईरान के ड्रोन हमलों का सबसे ज्यादा सामना किया है. अन्य खाड़ी देशों ने भी युद्ध लंबा खींचने का समर्थन किया है. इन देशों की मांग है कि अमेरिका ईरान के ताबूत में आखिरी कील ठोककर ही इस युद्ध को खत्म करे और इस आखिरी वार में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना, बैलेस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना और हिजबुल्लाह जैसे तेहरान के प्रॉक्सी संगठनों को मिटाना शामिल हो. ट्रंप की जंग में पीसे इन खाड़ी देशों की नई मांग ने उन्हीं को फंसा दिया है अब गेंद अमेरिका के पाले में है, देखना होगा ट्रंप इस युद्ध को कब तक जारी रख पाते हैं.