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मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट! अमेरिका ने ईरान पर शुरू किया नया हमला, IRGC ने भी पलटवार का दावा
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हमलों का नया दौर शुरू किया है. सेंटकॉम के मुताबिक, ये कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई है.
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Iran-US Conflict: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है. अमेरिका और ईरान लगातार एक दूसरे पर हवल हमले कर रहे हैं. इसी कड़ी में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हमलों का एक नया दौर शुरू किया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम है. जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में केवल दुनिया के कई देश पर देखने को मिल सकता है.
सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'आज शाम 4 बजे अमेरिकी सेना ने कमांडर इन चीफ के कहने पर ईरान के खिलाफ हमलों का एक नया दौर शुरू किया. ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हमला करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईरानी सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करने के लिए किए गए हैं.'
Today at 4 p.m. ET, U.S. forces began a new round of strikes against Iran at the Commander in Chief's direction. The strikes are designed to further degrade Iranian military capabilities used to attack commercial shipping in the Strait of Hormuz.
— U.S. Central Command (@CENTCOM) ?ref_src=twsrc%5Etfw">July 20, 2026Advertisement
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अमेरिकी सेना चला रही अभियान
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इससे पहले, सेंटकॉम ने कहा था कि अरब सागर में अमेरिकी नौसैनिक और वायुसेना के संसाधन ईरान के खिलाफ घोषित नौसैनिक नाकेबंदी को लागू करने और ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को सीमित करने के अभियान के तहत लगातार अभियान चला रहे हैं. सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'यूएसएस बॉक्सर (एलएचडी- 4) युद्धपोत पर तैनात अमेरिकी सैनिक अरब सागर में दिन-रात उड़ान ऑपरेशन्स का समर्थन कर रहे हैं. 20 जुलाई तक अमेरिकी सेना सात वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदलने के साथ एक जहाज को निष्क्रिय कर चुकी है, ताकि वे ईरानी बंदरगाहों से बाहर न जा सकें और न ही वहां प्रवेश कर सकें.'
IRGC ने किया बड़ा दावा
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इससे पहले सोमवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया था कि उसकी सेनाओं ने जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और परिसंपत्तियों पर जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. आईआरजीसी ने अपने आधिकारिक न्यूज आउटलेट सेपाह न्यूज पर जारी बयान में कहा कि उसने जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह शहर के हवाई अड्डे पर मौजूद अमेरिकी बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर III और बोइंग पी-8 पोसाइडन विमानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया, जिससे इनमें से कई विमान काफी क्षतिग्रस्त हो गए. उसने आगे कहा कि उसकी सेनाओं ने ड्रोन से हमला किया और कुवैत में एक अमेरिकी अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया, और अली अल सलेम एयर बेस पर इक्विपमेंट और एयरक्राफ्ट पार्ट्स के एक वेयरहाउस के साथ-साथ एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के हैंगर को निशाना बनाया, जिससे कई अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) में आग लग गई.
दोनों देशों ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, आईआरजीसी ने कहा कि ये हमले ईरान के इलाके पर अमेरिका के लगातार हमलों का बदला लेने के लिए किए गए थे. सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं शाम को सफलतापूर्वक हमला किया है. इसमें आगे कहा गया, 'सेंटकॉम के एसेट्स ने ईरानी सैन्य कमांड सेंटर्स, एयर डिफेंस और कोस्टल सर्विलांस साइट्स, समुद्री क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स और कम्युनिकेशन नेटवर्क्स को टारगेट किया ताकि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और आम नाविकों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को और कम किया जा सके.'
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बहरहाल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है.