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जिस पर देशकरता है भरोसा
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समंदर में भारतीयों की मौत पर गरजे PM मोदी, जी7 मंच से ट्रंप को दिया सख्त संदेश

G7 Summit: पीएम मोदी ने साफ़ शब्दों में कहा कि जब देश एक-दूसरे पर विश्वास खो देते हैं, तब वैश्विक साझेदारियां कमजोर पड़ जाती हैं ओर संघर्ष बढ़ने लगते हैं. उन्होंने दुनिया की बड़ी ताकतों को याद दिलाया कि अगर भविष्य को सुरक्षित बनाना हैं तो सबसे पहले देशों के बीच भरोसे को दोबारा मजबूत करना होगा..

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17 Jun 2026
( Updated: 17 Jun 2026
09:10 AM )
समंदर में भारतीयों की मौत पर गरजे PM मोदी, जी7 मंच से ट्रंप को दिया सख्त संदेश
Image Source: PM Modi/ x Post
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G7 Summit: जी7 शिखर सम्मलेन के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा मुद्दा उठाया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि देशों के बीच लगातार घटता भरोसा है, पीएम मोदी ने साफ़ शब्दों में कहा कि जब देश एक -दूसरे पर विश्वास खो देते हैं, तब वैश्विक साझेदारियां कमजोर पड़ जाती हैं ओर संघर्ष बढ़ने लगते हैं. उन्होंने दुनिया की बड़ी ताकतों को याद दिलाया कि अगर भविष्य को सुरक्षित बनाना हैं तो सबसे पहले देशों के बीच भरोसे को दोबारा मजबूत करना होगा...

ट्रंप के सामने बैठे-बैठे रखी बड़ी बात

जी7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक-दूसरे के बिल्कुल पास बैठे थे. दुनिया भर की निगाहें इस बात पर थीं कि दोनों नेता किस तरह बातचीत करेंगे. लेकिन इस बार सिर्फ औपचारिक मुस्कान और हाथ मिलाने तक ही बात सीमित नहीं रही. पीएम मोदी ने वैश्विक मंच से ऐसी बातें कहीं, जिन्हें कई जानकार अमेरिका और अन्य बड़ी शक्तियों के लिए एक सीधा संदेश मान रहे हैं. उन्होंने बिना बात धुमाये कहा कि दुनिया में बढ़ते संघर्षों और एकतरफा कार्रवाइयों ने देशों के बीच विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है. उनका यह बयान साफ संकेत था कि केवल ताकत दिखाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा.

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भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा भी उठाया

प्रधानमंत्री मोदी ने उन भारतीय नागरिकों और नाविकों का भी जिक्र किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय तनाव और संघर्षों के कारण अपनी जान गंवाई. उन्होंने कहा कि जब निर्दोष लोग किसी युद्ध या सैन्य कार्रवाई की चपेट में आते हैं, तो उसका दर्द केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा देश उसे महसूस करता है. पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और दुनिया के किसी भी हिस्से में भारतीयों की जान को खतरा पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है.

समुद्र में काम करने वालों की सुरक्षा पर जोर

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अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी मजबूती से उठाया. उन्होंने कहा कि दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है और लाखों नाविक दिन-रात काम करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलाने में योगदान देते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि समुद्री रास्ते हर हाल में सुरक्षित और खुले रहने चाहिए ताकि व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहें. साथ ही, समुद्र में काम करने वाले लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि वे बिना किसी डर या खतरे के अपना काम कर सकेंगे. अगर समुद्री सुरक्षा कमजोर होती है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

दुनिया को दी चेतावनी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि शांति केवल भाषणों और कागजी समझौतों से नहीं आती. इसके लिए जमीन पर ठोस कदम उठाने पड़ते हैं. उन्होंने दुनिया की बड़ी शक्तियों को चेतावनी भरे अंदाज में याद दिलाया कि यदि भरोसा लगातार टूटता रहा, तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग कमजोर होगा और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

उनका संदेश साफ था कि शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा जरूरी जिम्मेदारी और विश्वास है. अगर दुनिया को सुरक्षित और स्थिर बनाना है तो देशों को अपने फैसलों और कार्यों में पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता दिखानी होगी.

अब मोदी-ट्रंप बैठक पर टिकी हैं निगाहें

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जी7 सम्मेलन के दौरान दिए गए इस बयान के बाद अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक पर हैं. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच वैश्विक सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है.

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पीएम मोदी के इस संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर अपने हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाने में किसी तरह की हिचक नहीं दिखा रहा. उनका संदेश साफ था, दुनिया का भविष्य ताकत के संतुलन से नहीं, बल्कि देशों के बीच भरोसे और जिम्मेदारी से तय होगा..

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