×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

Indus Water Treaty: सिंधु पर भारत को घेरने चला था पाकिस्तान, अब कोर्ट में भर रहा करोड़ों की फीस!

Indus Water Treaty: भारत के अदालत में शामिल नहीं होने के बावजूद पाकिस्तान ने PCA की कार्यवाही जारी रखने का फैसला किया. अदालत ने भी जून 2025 में खुद को इस मामले की सुनवाई के लिए सक्षम बताया. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया में आमतौर पर दोनों पक्षों को खर्च उठाना पड़ता है.

Author
17 Jul 2026
( Updated: 17 Jul 2026
11:22 AM )
Indus Water Treaty: सिंधु पर भारत को घेरने चला था पाकिस्तान, अब कोर्ट में भर रहा करोड़ों की फीस!
Image Source: IANS file photo/for representation
Advertisement

Indus Water Treaty: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है. इस मामले में एक दिलचस्प स्थिति सामने आई है. जिस अंतरराष्ट्रीय अदालत की कार्रवाही में भारत हिस्सा नहीं ले रहा है, उसे जारी रखने के लिए पाकिस्तानी को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है. रिपोर्ट्स के मताबिक, पाकिस्तान अब तक इस प्रक्रिया में 6 लाख डॉलर से ज्यादा यानी करीब 5.77 करोड़ रूपये खर्च कर चुका है. खास बात यह है कि इसमें वह खर्च भी शामिल है, जो सामान्य तौर पर भारत और पाकिस्तान दोनों को मिलकर उठाना होता है. 

आखिर क्या है सिंधु जल संधि विवाद?

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 में सिंधु जल संधि हुई थी. इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे. इस संधि के अनुसार भारत को कुछ नदियों पर परियोजनाएं बनाने का अधिकार है, लेकिन उनके डिजाइन और पानी के इस्तेमाल को लेकर कुछ शर्तें भी तय की गई हैं. विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारत ने किशनगंगा जलविद्युत परियोजना और चिनाब नदी पर रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट शुरू किया. पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं के डिजाइन पर आपत्ति जताई. उसका कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स का निर्माण सिंधु जल संधि की शर्तों के अनुसार नहीं है.

बलूचिस्तान की चीख यूरोप तक पहुंची! EU की फटकार से हिल गया पाकिस्तान, बंद होगी मुफ्त की कमाई!

Advertisement

भारत और पाकिस्तान के बीच रास्ते को लेकर मतभेद

इस विवाद को सुलझाने के तरीके पर भी दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई. भारत का कहना था कि यह एक तकनीकी मामला है और इसका समाधान न्यूट्रल एक्सपर्ट यानी तटस्थ विशेषज्ञ के जरिए होना चाहिए. 
वहीं पाकिस्तान चाहता था कि इस मामले को सीधे पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) यानी मध्यस्थता अदालत में ले जाया जाए. इसी वजह से एक ही विवाद को लेकर दो अलग-अलग प्रक्रियाएं शुरू हो गईं. भारत लगातार इसका विरोध करता रहा और उसका कहना था कि एक ही मुद्दे पर दो समानांतर कानूनी प्रक्रियाएं नहीं चल सकतीं.

भारत ने क्यों किया अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार?

साल 2023 से भारत ने PCA की सुनवाई में हिस्सा लेना बंद कर दिया. भारत का तर्क है कि इस अदालत को इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार ही नहीं है और इसकी प्रक्रिया वैध नहीं है. इसके बाद अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को भी स्थगित करने का फैसला किया. भारत ने साफ कर दिया कि वह फिलहाल इस विवाद से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं में शामिल नहीं होगा.

Advertisement

पाकिस्तान क्यों उठा रहा है भारत का खर्च?

भारत के अदालत में शामिल नहीं होने के बावजूद पाकिस्तान ने PCA की कार्यवाही जारी रखने का फैसला किया. अदालत ने भी जून 2025 में खुद को इस मामले की सुनवाई के लिए सक्षम बताया. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया में आमतौर पर दोनों पक्षों को खर्च उठाना पड़ता है. लेकिन भारत के शामिल नहीं होने के कारण वह अपनी तरफ से कोई खर्च नहीं दे रहा है. ऐसे में पाकिस्तान को पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपने हिस्से के साथ-साथ भारत से जुड़े खर्च का भार भी उठाना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अब तक इस मामले में 6 लाख डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है. यह रकम पाकिस्तानी मुद्रा में करीब 16.5 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.


आगे क्या होगा?

यह भी पढ़ें

सिंधु जल संधि विवाद अब सिर्फ पानी के बंटवारे का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और कानूनी खींचतान का बड़ा मुद्दा बन चुका है. भारत का रुख है कि मौजूदा प्रक्रिया सही नहीं है, जबकि पाकिस्तान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मामले की सुनवाई जारी रहे.आने वाले समय में इस विवाद का समाधान किस रास्ते से निकलेगा, इस पर दोनों देशों के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है..

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें