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पाकिस्तान में अब सेना बनाम सरकार की लड़ाई, मुनीर ने शहबाज की एक न सुनी, जासूसों के सरदार को बना दिया NSA

पाकिस्तान में सरकार बनाम सेना हो गई है. मुनीर ने शहबाज के सिर पर एक NSA को लाद दिया है जो पहले से ही बदनाम एजेंसी ISI का चीफ़ है. अब कहा जा रहा है कि मुनीर ने अब पूरा मामला खुलकर अपने हाथों में ले लिया है.

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01 May 2025
( Updated: 10 Dec 2025
06:33 PM )
पाकिस्तान में अब सेना बनाम सरकार की लड़ाई, मुनीर ने शहबाज की एक न सुनी, जासूसों के सरदार को बना दिया NSA
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पहलगाम हमले में पाकिस्तान, पाक आर्मी, उसके गुर्गों की भूमिका सामने आ गई है. भारत ने इस वारदात के बाद कई रणनीतिक फैसले लिए हैं और आगे क्या रणनीति अपनाई जाए और क्या एक्शन लिए जाएं, उसके लिए बैठकों का दौर जारी है. पीएम मोदी के बदले मूड और हिंदुस्तान में भड़के गुस्से के बाद पाक में हड़कंप मचा हुआ है. वो दुनिया भर के देशों, राष्ट्राध्यक्षों और UN महासचिव से शांति की गुहार लगा रहा है. लेकिन इस बार पानी सर के ऊपर से बह गया है, हां ये पानी अब पाकिस्तान नहीं जाएगा. आतंकवाद के पनाहगाह देश में सुरक्षा तंत्र की तो ऐसी स्थिति है कि वहां एक NSA 3 साल से नहीं था, जिसे अब आनन-फानन में नियुक्त किया गया है. ISI के मौजूदा चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद असीम मलिक को ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. 


आसिम बनाम असीम

पाकिस्तान में सुरक्षा तंत्र और देश की बागडोर वैसे तो पूरी तरह सेना के हाथ में हैै लेकिन उसके नापाक मंसूबों को अंजाम देने का काम ISI का चीफ करता है. लेकिन अब ISI के चीफ़ को एक और जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें अब देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) भी बना दिया गया है.


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कौन है असीम मलिक?

मूल रूप से सैन्य पृष्ठभूमि से आने वाले असीम मलिक ने पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी, काकुल से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया. फिलहाल वो खुफिया, सियासी और किडनैपिंग सहित तमाम बदनाम कार्रवाईयों के लिए मशहूर एजेंसी ISI के चीफ हैं. 


कहा जा रहा है कि मलिक की नियुक्ति 29 अप्रैल को ही हो गई थी, लेकिन मीडिया को इसकी जानकारी 30 अप्रैल को आधी रात को दी गई, जिसपर अब सवाल उठने लगे हैं. असीम मलिक को सितंबर 2024 में ISI का चीफ बनाया गया था. 

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अप्रैल 2022 में मोईद यूसुफ के बाद से पाकिस्तान में कोई NSA नहीं था. इस अपॉइंटमेंट के बाद असीम मलिक के पास अब दो जिम्मेदारियां (ISI चीफ और NSA) होंगी.


बलूचिस्तान में संभाली है डिवीजन की कमान

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असीम मलिक ने अपने आर्म्ड फोर्सेस करियर के दौरान बलूचिस्तान और दक्षिणी वजीरिस्तान में भी डिवीजनों की कमान संभाली है. यह दोनों ही क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा में हैं भी और नहीं भी. दोनों ही इलाके पाक आर्मी की नाक में दम किए रहते हैं.


आसिम मुनीर ने सिविलिन सरकार और शबहाज शरीफ की एक न सुनी

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पाकिस्तान में NSA का पद काफी विवादास्पद रहा है. वैसे इस देश में यह पद आम तौर पर किसी सेना से आने वाले व्यक्ति को ही दिया जाता है लेकिन जब शहबाज शरीफ की सरकार आई तो उन्होंने किसी को भी NSA नहीं बनाने का फैसला किया. शहबाज का ये मानना था कि जब सुरक्षा से संबंधित हर फैसले आर्मी ही लेती है, वही खलल भी पैदा करती है और समाधान खोजने के काम के लिए सरकार को लगा देती है. लेकिन जब भारत ने उसके कान खींचे हैं तो मुनीर ने आनन-फानन में नए NSA के तौर पर असीम मलिक का नाम सुझा दिया और बनवा भी दिया. यानी अंदरखाने सरकार बनाम आर्मी हो गई. पाक में मुनीर के गुर्गों को लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है. अवाम सड़कों पर है. सिंध और बलूचिस्तान में पंजाबी जनरल के खिलाफ़ विद्रोह कभी भी भड़क सकता है. पाकिस्तान सरकार ने मलिक की नियुक्ति ऐसे समय में की है जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है. इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी.


मलिक के आने से बढ़ी शहबाज सरकार की टेंशन

असीम मलिक की दोहरी भूमिका को लेकर पाकिस्तान में भी सवाल उठ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को देखें तो ये पद आम तौर पर किसी सिविलियन को जाता है, जैसे भारत में ब्रजेश मिश्रा से लेकर शिवशंकर मेनन और अब डोवाल तक, हर कोई लोक सेवा आयोग का ब्यूरोक्रेट रहा है. वहीं पाकिस्तान में हर पद के लिए आर्मी का ही कोटा है और यह उसकी जागीर है. हां, मोईद युसूफ जरूर अमेरिकी थे. 


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भारत ने भी NSAB का किया नए सिरे से गठन

इधर 30 अप्रैल को भारत सरकार ने NSA बोर्ड (NSAB) का नए सिरे से गठन किया है. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW, रॉ) के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी को इसका नया चेयरमैन बनाया गया. अब NSAB में 6 सदस्य होंगे. इनमें आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के पूर्व अफसर हैं. साथ ही पूर्व डिप्लोमैट और पूर्व IPS अफसर को भी इसमें शामिल किया गया है. यह फैसला PM मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई CCS) की दूसरी बैठक में लिया गया. अब NSAB राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को इनपुट देगा.

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