जिन इजरायलियों का भारत में होता है दिल खोलकर स्वागत, उनके देश इजरायल में कितनी है हिंदुओं की आबादी, कैसी है स्थिति?

भारत और इजरायल की दोस्ती अटूट है. यहूदियों का हिंदुस्तान में दिल खोलकर स्वागत किया जाता है. इसी कड़ी में पीएम मोदी का 9 साल बाद इजरायल दौरा हो रहा है. ऐसे में जानिए कि वहां हिंदुओं की आबादी कितनी है और मुस्लिमों की कितनी जनसंख्या है.

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25 Feb 2026
( Updated: 25 Feb 2026
02:08 PM )
जिन इजरायलियों का भारत में होता है दिल खोलकर स्वागत, उनके देश इजरायल में कितनी है हिंदुओं की आबादी, कैसी है स्थिति?
इजरायल/ X

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी जमीन पर एक और इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े हैं. पीएम मोदी नेसेट यानी इजरायली संसद को संबोधित करेंगे और ऐसा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे. भारत-इजरायल की दोस्ती अपने आप में अनोखी और दशकों पुरानी है. एक ओर जहां दोनों देशों की सरकारों के बीच बेहतर कूटनीतिक और रक्षागत संबंध हैं, वहीं आम लोगों के स्तर पर भी एक-दूसरे के प्रति प्यार, सम्मान और विश्वास का रिश्ता है.

एक ओर जहां हिंदुस्तान के लोग इजरायलियों के लिए स्वागत और ‘अतिथि देवो भवः’ का रवैया रखते हैं, तो वहीं इजरायली भी भारत को अपना दूसरा घर मानते हैं और यहां सबसे सुरक्षित महसूस करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर भारतीयों के मन में यहूदियों के लिए इतना अपनापन है और उन्हें कभी यहां एंटी-सेमेटिक व्यवहार से नहीं गुजरना पड़ा, तो हिंदुओं का वहां कैसा हाल है, क्या स्थिति है?

आपको बता दें कि इजरायल को यहूदी लैंड यानी यहूदियों का देश कहा जाता है. दुनिया के किसी भी कोने में अगर यहूदी हैं और वे इजरायल आना चाहते हैं, तो उन्हें नागरिकता मिल सकती है और इजरायली सरकार उन्हें अपना नागरिक मानती है. इजरायल की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1948 में हुई थी. यहां यहूदियों और मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र धार्मिक स्थल बैतुल मकदस और डोम ऑफ द रॉक स्थित हैं. जेरूसलम को अब आधिकारिक तौर पर राजधानी माना जाने लगा है, हालांकि तेल अवीव लंबे समय तक इजरायल की राजधानी रहा है.

इजरायल का मुख्य धर्म क्या है?

इजरायल की कुल आबादी लगभग 85 से 90 लाख के आसपास है, जहां यहूदी, अरब मुसलमान और ईसाई भी रहते हैं. इजरायल में बहुसंख्यक और सबसे बड़ा धर्म यहूदी धर्म है, जिनकी आबादी करीब 73 प्रतिशत है. इजरायली संविधान में सभी धर्मों को मानने की आजादी दी गई है, लेकिन शासन-प्रशासन और नीतियों में यहूदी परंपराओं, मान्यताओं, भावनाओं तथा उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इजरायल की स्थापना ही यहूदियों के लिए की गई थी.

इजरायल में हिंदुओं की आबादी कितनी है?

इजरायल में हिंदुओं के लिए सुरक्षित माहौल और स्वागत योग्य रवैया होने के बावजूद यहां हिंदू आबादी बहुत कम है. 2020 के आंकड़ों के अनुसार इजरायल में हिंदू लगभग ना के बराबर हैं, यानी कुल आबादी के 0.1 प्रतिशत से भी कम. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस यहूदी देश में लगभग 11,000 से 12,000 हिंदू रहते हैं.

इजरायल में रहने वाले हिंदू कौन हैं?

इजरायल के भूगोल और इतिहास से हिंदुओं का सीधा संबंध नहीं रहा है, इसलिए उनकी संख्या नगण्य है. मुसलमानों की बड़ी आबादी इसलिए है क्योंकि इजरायल इस्लामी और अरब देशों के बीच स्थित है. फिलिस्तीनी लोगों और गाजा सहित अन्य मुस्लिम समुदायों की बसावट यहां अच्छी-खासी संख्या में है. वहीं जो हिंदू यहां रहते हैं, वे मुख्य रूप से भारत या अन्य देशों से गए प्रवासी, आईटी, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवर, छात्र या विदेशी कामगार हैं. संख्या कम होने के बावजूद उनका प्रभाव उल्लेखनीय माना जाता है. इजरायल में हिंदू समुदाय छोटा जरूर है, लेकिन वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करता है. यहां हिंदू या भारतीय रेस्टोरेंट्स भी काफी लोकप्रिय हैं.

इजरायल में मुस्लिमों की आबादी कितनी है?

इजरायल के केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, 2024 के अंत तक देश में मुस्लिम आबादी 18 लाख से अधिक है. यह कुल आबादी का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा है. मुस्लिम समुदाय इजरायल का सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग है. इनमें ज्यादातर लोग अरब मूल के हैं. बड़ी संख्या में मुस्लिम जेरूसलम और उत्तरी क्षेत्रों में रहते हैं. केवल जेरूसलम शहर में ही करीब 3.8 लाख से अधिक मुस्लिम निवास करते हैं.

इजरायल की मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत युवा है. लगभग 31 प्रतिशत मुस्लिम बच्चे 14 वर्ष से कम आयु के हैं, जबकि 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. परिवारों का आकार भी सामान्य तौर पर बड़ा होता है. करीब 27 प्रतिशत मुस्लिम परिवारों में 6 या उससे अधिक सदस्य होते हैं.

पीएम मोदी का दो दिवसीय इजरायल दौरा ऐतिहासिक माना जा रहा है. करीब 9 साल बाद हो रहे इस दौरे के कई मायने हैं. वह संसद को संबोधित करने के साथ-साथ अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे और कई समझौतों को अंतिम रूप देंगे. जानकारी के अनुसार पीएम मोदी गुरुवार 26 फरवरी को दोपहर 2 बजे इजरायल से स्वदेश रवाना हो सकते हैं.

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इजरायली प्रधानमंत्री ने रविवार को अपनी साप्ताहिक कैबिनेट बैठक और बाद में एक्स पर साझा किए गए वक्तव्यों में पीएम मोदी के दौरे को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि इजरायल इस क्षेत्र में या इसके आसपास “देशों का एक एक्सिस” बनाना चाहता है, जिसमें भारत, ग्रीस, साइप्रस तथा कुछ अरब, अफ्रीकी और एशियाई देश शामिल हो सकते हैं. इजरायली पीएम नेतन्याहू ने इस दौरे को एक बड़े रणनीतिक ढांचे को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

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