Advertisement
नहीं चाहिए तुम्हारी खैरात...बिना वीटो के UNSC की स्थायी सदस्यता के पैंतरे को भारत ने किया फेल, किया साफ इनकार
भारत ने बिना वीटो के UNSC की स्थायी सदस्यता की कोशिशों को फेल कर दिया है. भारत की ओर से साफ कर दिया कि वीटो नहीं तो स्थायी सदस्यता नहीं, बिना इसके ये महज सेकंड क्लास स्टेटस के समान है.
Advertisement
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वीटो को लेकर अपना रुख साप कर दिया है. भारतीय प्रतिनिधि ने 'डी फैक्टो वीटो' की आलोचना करते हुए कहा कि वीटो अधिकार का नहीं बल्कि जिम्मेदारी का एहसास कराता है. UNGA में पांच स्थायी सदस्यों (P5) के वीटो अधिकारों पर हुई बहस के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए 'इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स' (आईजीएन) के तहत यह एक अहम मुद्दा था, लेकिन कुछ देशों ने 'अप्रत्यक्ष वीटो' का इस्तेमाल किया जिससे ये प्रक्रिया अटक गई है.
उन्होंने कहा, "आईजीएन प्रक्रिया में भी 'आम सहमति' की दलील का इस्तेमाल एक डी फैक्टो वीटो (छिपे हुए) के रूप में किया जा रहा है." भारत के अनुसार, वीटो पावर का विशेषाधिकार किसी संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ को साधने का साधन नहीं बनना चाहिए.
नहीं चाहिए ‘सेकंड क्लास स्टेटस’
Advertisement
'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' नाम के देशों के एक छोटे समूह ने प्रक्रिया संबंधी पैंतरों का इस्तेमाल करके आईजीएन को बातचीत के लिए कोई मसौदा अपनाने से रोक दिया है. इस समूह का नेतृत्व इटली कर रहा है और इसमें पाकिस्तान भी शामिल है.
Advertisement
हरीश ने कहा कि 2008 का महासभा प्रस्ताव, जो "आईजीएन के लिए आधारभूत निर्णय है, बिल्कुल स्पष्ट है: इसका मुख्य सिद्धांत 'अधिकतम राजनीतिक स्वीकृति' है, न कि 'आम सहमति'." उन्होंने बताया कि बातचीत के 17 दौर पूरे होने के बाद भी, "हमारे पास दिखाने के लिए कोई नतीजा नहीं है." इसका कारण वह 'व्यावहारिक वीटो' है, जिसका आईजीएन को बनाने वाले प्रस्ताव में कोई आधार नहीं है.
भारत ने यूएनएससी में 'डी फैक्टो वीटो' पर उठाए सवाल
Advertisement
उन्होंने कहा कि व्यापक सुधारों की शुरुआत के लिए "स्पष्ट समय-सीमा और लक्ष्यों के साथ, मसौदे पर आधारित बातचीत को जल्द शुरू करना" जरूरी है. इसके अलावा कुछ ऐसे गुप्त वीटो भी हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर में मान्यता नहीं मिली है, फिर भी कुछ अहम मामलों में गैर-स्थायी सदस्यों को भी इनका इस्तेमाल करने दिया जाता है.
इस ओर इशारा करते हुए हरीश ने कहा, "वीटो सिर्फ वह नहीं है जिसका इस्तेमाल खुले तौर पर किया जाता है. इसके अलावा एक डी फैक्टो वीटो भी होता है, जो सुरक्षा परिषद के हर सदस्य, चाहे वह चुना गया हो या नहीं के पास होता है. इसका इस्तेमाल वे अध्यक्षीय बयानों, प्रेस बयानों और प्रतिबंध समितियों के फैसलों पर कर सकते हैं."
बिना वीटो के UNSC की स्थायी सदस्यता से भारत ने किया साफ मना
Advertisement
ऐसा इसलिए है क्योंकि "आम सहमति के 'अलिखित नियम' के तहत, कोई भी एक सदस्य किसी प्रस्ताव को रोक सकता है, और अक्सर इसके लिए उसे कोई कारण भी नहीं बताना पड़ता." चीन ने कई बार प्रतिबंध समिति की गुप्त बैठकों में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों - जैसे लश्कर-ए-तैयबा के जकी-उर-रहमान लखवी और शाहिद महमूद, तथा जैश-ए-मोहम्मद के साजिद मीर और मसूद अजहर, पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों को रोका है.
हरीश ने व्यापक सुधारों की वकालत करते हुए कहा, "सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता, वैधता और प्रभावशीलता से जुड़े सवालों का जवाब सिर्फ वीटो को मैनेज करने से नहीं मिलेगा. इन सुधारों में परिषद का विस्तार करना और नए स्थायी सदस्य शामिल करना भी शामिल होना चाहिए."
भारत ने पश्चिमी देशों को तगड़ा लताड़ा
Advertisement
उन्होंने कहा, "इन सवालों का जवाब एक ऐसी परिषद से मिलेगा जो अपने उद्देश्य के लिए पूरी तरह उपयुक्त हो, जिसकी संरचना आज की वास्तविकताओं को दर्शाती हो, न कि आठ दशक पहले हुए युद्ध के नतीजों को."
ये भी पढ़ें: कंगाल PAK को लगी इंडियन प्रोडक्ट्स की लत! बैन के बावजूद छुप-छुप कर धड़ल्ले से मंगवा रहा भारतीय सामान, बेचा जीरो
हरीश ने बताया कि भारत ने एक "सिद्धांत-आधारित रुख" अपनाया है, जिसके अनुसार सुधारों के जरिए स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होने वाले किसी भी देश के पास वीटो का अधिकार भी होना चाहिए.
Advertisement
उन्होंने कहा, "हम फिर दोहराते हैं कि जब तक वीटो का प्रावधान मौजूद है, तब तक एक सुधारी गई परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास यह अधिकार होना चाहिए." उन्होंने कहा कि "निष्पक्षता और न्याय की यही मांग है."
ये भी पढ़ें: 'कई आए और गए, मिटाने वाले खुद मिट गए...', UN में अफगानिस्तान के लिए दहाड़ा भारत, पाकिस्तान को दिन में दिखाए तारे
हरीश ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों की नई "दूसरे दर्जे" (सेकंड क्लास) की श्रेणियां बनाने के विचार को भी खारिज कर दिया - जैसे कि लंबे कार्यकाल वाले सदस्य या बिना वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्य. उन्होंने कहा कि "इससे सुधारों पर चल रही पहले से ही कठिन चर्चा और अधिक जटिल हो जाएगी, और यह उस असमानता को और गहरा कर देगा जिसे हम दूर करना चाहते हैं."
Advertisement
भारत ने UNSC में रिफॉर्म को डिरेल करने की कोशिशों को लेकर लताड़ा
यह भी पढ़ें
हरीश इस विचार को लेकर भी संशय में थे कि सुरक्षा परिषद में वीटो का इस्तेमाल करने वाले देशों को महासभा के सामने आकर अपने कदम के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसका मकसद "बदलाव लाना" और जवाबदेही तय करना था, लेकिन जब से यह व्यवस्था लागू हुई है, तब से वीटो के इतने अधिक इस्तेमाल ने "बिल्कुल उलट कहानी बयां की है."