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G7 Summit: पीएम मोदी-कार्नी की मुलाकात से बना भारत-कनाडा के बीच सहयोग का नया रास्ता, दोनों देशों ने लिया बड़ा फैसला

G7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किए जाने और गर्मजोशी से स्वागत के बाद दोनों देशों के संबंधों में नया मोड़ आता नजर आ रहा है. G7 समिट के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को फिर से मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई.

G7 Summit: पीएम मोदी-कार्नी की मुलाकात से बना भारत-कनाडा के बीच सहयोग का नया रास्ता, दोनों देशों ने लिया बड़ा फैसला
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भारत और कनाडा के बीच हालिया वर्षों में चली आ रही कूटनीतिक खटास अब कम होती दिख रही है. G7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किए जाने और गर्मजोशी से स्वागत के बाद दोनों देशों के संबंधों में नया मोड़ आता नजर आ रहा है. 

G7 समिट के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को फिर से मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई. बता दें कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक दशक बाद पहली कनाडा यात्रा थी, जबकि कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात रही. बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "प्रधानमंत्री के चुनाव के बाद मुझे उनसे मिलने का यह पहला मौक़ा मिला है. मैं उन्हें इस चुनाव में उनकी शानदार जीत के लिए बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि आने वाले समय में भारत और कनाडा कई क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगे."

भारत-कनाडा संबंधों में आई नई रफ्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के साथ संबंधों को ‘लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन’ पर आधारित बताते हुए कहा कि दोनों देश आपसी मैत्री को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने द्विपक्षीय बैठक को "शानदार" बताते हुए बताया कि "व्यापार, ऊर्जा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ शानदार बैठक हुई. जी-7 शिखर सम्मेलन की सफल मेज़बानी के लिए उन्हें और कनाडा सरकार को बधाई दी. भारत और कनाडा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन में दृढ़ विश्वास से जुड़े हुए हैं.”

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वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी G7 में मोदी की मौजूदगी को सम्मानजनक बताते हुए कहा, “जी7 में आपकी मेज़बानी करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है. यह आपके देश की अहमियत, आपके नेतृत्व और उन मुद्दों के महत्व का नतीजा है, जिनसे हम मिलकर निपटना चाहते हैं.” कार्नी ने भारत के साथ सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर जोर देते हुए कहा, “ऊर्जा सुरक्षा से लेकर ऊर्जा परिवर्तन तक, जिसकी अगुआई में आप मदद कर रहे हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य तक और अंतरराष्ट्रीय दमन व आतंकवाद के खिलाफ़ हमारी साझा लड़ाई तक इन सभी में आपका योगदान बेहद अहम है.”  जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात भारत-कनाडा संबंधों में आए तनाव को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत की तरफ बढ़ने का संकेत है.

भारत-कनाडा ने की उच्चायुक्तों की नियुक्ति की घोषणा
PM मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात में दोनों देशों के बीच संबंध सुधार को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है. भारत और कनाडा एक-दूसरे देशों के लिए उच्चायुक्तों की नियुक्ति करेंगे.

क्या-क्या चर्चा हुई?
बैठक में दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर विचार साझा किए. तकनीक, सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया. साथ ही, वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाने और उभरते खतरों का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई. कनाडाई सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री कार्नी ने भारत और कनाडा में नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति पर भी सहमति जताई है. इसका उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों और व्यवसायों को फिर से सामान्य काउंसलर और राजनयिक सेवाएं उपलब्ध कराना है. बैठक में आपसी सम्मान, कानून के शासन का पालन और राष्ट्रीय संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया. दोनों नेताओं ने कनाडा-भारत संबंधों के महत्व की पुष्टि करते हुए इन मूल्यों को द्विपक्षीय रिश्तों की आधारशिला बताया.

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गौरतलब है कि मोदी-कार्नी की यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब बीते वर्षों में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों और राजनयिक विवादों को लेकर गंभीर तनाव रहा है. लेकिन G7 समिट की इस मुलाक़ात को संबंधों में आई तल्ख़ी को पीछे छोड़कर भविष्य की दिशा तय करने वाला निर्णायक पल माना जा रहा है. 

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