32 की उम्र में संसद हिला दी, बड़े-बड़े तुर्रम खां से लड़कर असंभव को संभव कर दिखाया... Rajesh Verma का सांसद बनने का सफर

25 साल में देश के सबसे युवा डिप्टी मेयर और 32 साल में लोकसभा सांसद बनकर इतिहास रचा, भागलपुर से शुरू हुआ संघर्ष, परिवार और राजनीतिक विरोधियों की चुनौतियों को पार करते हुए राजेश वर्मा ने खगड़िया को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, तो आज बात खगड़िया के सांसद, LJP(R) के युवा नेता और चिराग़ के करीबी राजेश वर्मा के राजनीतिक सफ़र की

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25 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
01:54 PM )
32 की उम्र में संसद हिला दी, बड़े-बड़े तुर्रम खां से लड़कर असंभव को संभव कर दिखाया... Rajesh Verma का सांसद बनने का सफर

भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा की शपथ लेने वाले 32 साल के युवा की आवाज़ जब सदन में गूंजी तो ये महज़ एक आवाज़ नहीं थी, न ही एक सांसद बन जाने का सफ़र था….ये उस संघर्ष का पूरा हो जाना था, जो राजनीति में आने पर परिवार का विरोध झेल चुका था, ये उस सफ़र का पूरा होना था, जिस सफ़र को रोकने के लिए तमाम राजनीतिक विरोधियों ने कोशिश की, ये उस संघर्ष के पूरा होने की कहानी थी, जिसने तमाम परेशानियों को दरकिनार कर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया….तो आज बात खगड़िया के सांसद, LJP(R) के युवा नेता और चिराग़ के करीबी राजेश वर्मा के राजनीतिक सफ़र की…….

ना सियासत विरासत में मिली, ना दादा कोई मंत्री थे, ना पिताजी कोई विधायक, ना ही किसी पार्टी के सुप्रीमो से कोई रिश्ता था….राजनीति में कोई ऐसा भी आगे बढ़ सकता है क्या, ये सबसे बड़ा सवाल है…..तो इसका जवाब है, हां…. और इसका एक ही जवाब है….राजेश वर्मा…..

भागलपुर में शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद भोपाल के सागर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल जब उन्होंने हासिल की तो सामाजिक मुद्दों और नेतृत्व में रुचि बढ़ गई, इन्हीं वजहों से 2017 में जब भागलपुर नगर निगम के जरिए राजनीति में कदम रखा तो परिवार के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया, क्योंकि वैश्य समाज में व्यापार पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन राजेश वर्मा ने 24 साल की उम्र में ही बदलाव की राजनीति का रास्ता चुना, लेकिन कहां इतना आसान होता है राजनीति के इस खेल में आसानी से सफ़र तय करना, फिर भी राजेश वर्मा ने ठान लिया कि सफलता को हासिल करनी ही है, यही वजह रही कि, भागलपुर के डिप्टी मेयर बने, जीत तो मिल गई लेकिन काम करना कहां आसान होता है, जब विरोधी आपको गिराने में लगे हो, ऐसे में राजेश वर्मा ने जनता के लिए लड़ाई जारी रखी, जनता के काम के लिए उन्होंने संघर्ष शुरु किया, छोटे-छोटे काम के लिए अधिकारियों से बहस होने लगी, तो लगा अब डिप्टी मेयर रहते हुए जनता का काम नहीं कराया जा सकता, फिर राजेश वर्मा ने विधायक बनने की ज़िद पाल ली….विधायक बनने का सपना तो देख लिए लेकिन विधायकी में और ज़्यादा संघर्ष था…सबसे बड़ा संघर्ष था अपने राजनीतिक दुश्मनों से पार पाना, हुआ भी वही बीजेपी के विरोध में मोर्चा सँभाला तो एक बड़े बीजेपी नेता से तकरार हुई, बर्बाद करने की धमकी मिलने लगी, लेकिन राजेश कहां मानने वाले थे, उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा, हालांकि विधायक बनने में नाकाम रहे, लेकिन 20 हज़ार वोट हासिल करके ये तो तय कर दिया किया वो थमने वाले नहीं है..विधानसभा चुनाव के बाद खूब बवाल हुआ, राजेश वर्मा के घर छापेमारी हुई, परेशान करने का हर तरीक़ा अपनाया गया, राजेश यहां टूटने के बजाय मज़बूत होकर उभरे,तय कर लिया कि, अब राजनीति के साथ बिज़नेस शुरु करेंगे और पिता का विश्वास बनाए रखेंगे, बिजनेस और राजनीतिक का ऐसा समीकरण बैठा कि 2024 आते-आते राजेश ने पूरा का पूरा खेल पलट दिया, 2022 में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के भागलपुर जिला अध्यक्ष बने, काम ऐसा किया कि, उनकी मेहनत और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए चिराग पासवान ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में खगड़िया सीट से उम्मीदवार बना दिया, फिर तो जो हुआ वो इतिहास में दर्ज हो गया 32 साल के नौजवान ने 1,61,131 वोटों जीत हासिल कर दिल्ली में दस्तक दे दी और बन गए सांसद……
यानि….


25 साल में देश के सबसे युवा डिप्टी मेयर बने. 32 साल की उम्र में देश की संसद तक पहुंच गए.

ये कोई बच्चों का खेल नहीं था, ये राजेश वर्मा के संघर्ष, लगन और ज़िद की जीत थी, सांसद बनने के बाद उन्होंने खगड़िया के लिए सदन में आवाज़ उठाई, परिणाम के रुप में सामने कुछ दिखा तो वो रहा,, खगड़िया का विकास…

2024 के पहले तक नेताओं ने खगड़िया को सिर्फ दिल्ली भेजने का एक ट्रांज़िट पॉइंट बना डाला था, 2024 के बाद कोई ऐसा भी आया जिसने दिल्ली के दरवाज़े खगड़िया के लिए खोल दिए और सिर्फ़ एक साल में वो कर दिखाया जिसे कभी असंभव माना जाता था

राजेश वर्मा ने सिर्फ 1 साल में खगड़िया को क्या दिया ? 
2000 करोड़ रुपए से ज्यादा का उद्घाटन, शिलान्यास किया 
करीब 420 करोड़ रुपए से मेडिकल कॉलेज पहुंचाया
बख्तियारपुर, अलौली, बेलदौर में आधुनिक पुस्तकालयों की शुरुआत 

ये सब बस इसलिए संभव हो पाया क्योंकि, सांसद राजेश वर्मा ने सदन की कार्रवाई में लगातार हिस्सा लिया, बहस की, और खगडिया के मुद्दों को उठाते रहे, 
बिहारियों के लिए छठ में होने वाले रेल बोगी की परेशानी का मुद्दा उठाया 
किसानों की आय बढ़ाने, आपदा राहत को मजबूत करने की बात रखी
PM फसल बीमा और खगड़िया को मिलेट हब बनाने की मांग की
गढ्ढों से पटी सड़कों का कायाकल्प करने का संकल्प लिया
संसद में 17 बड़ी बहसों में हिस्सा लिया 
88 सवाल संसद में पूछे, 17 बहसों में भागीदारी रही
संसद में राजेश वर्मा की 90% उपस्थिति रही 

जहां कभी सोचा जाता था कि, कुछ नहीं हो पाएगा, वहां सांसद राजेश वर्मा ने वो सबकुछ पहुंचाने का ज़िम्मा उठाया जो बेहद जरुरी था, और अपनी ज़िद को पूरा भी किया, केवल संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए, 1 साल के भीतर ही राजेश वर्मा खगडिया के दिल में बस गए, ग़रीबों के लिए काम किया, हर ज़मीनी मुद्दे पर लोगों के साथ खड़े रहे, यही वजह रही कि, #VermaForVikas खगड़िया की पहचान बन गई……यहां लोगों के बीच मिलते हुए ज़िंदाबाद के नारे लगते हुए सुनाना है

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दुश्मनों की साजिशों को चीरकर, तमाम केस और लड़ाई को मात देकर, सिर्फ 32 साल की उम्र में राजेश वर्मा ने एक सांसद के तौर पर वो सबकुछ किया जो जनता अपने नेता से उम्मीद करती है, वैश्य समाज के उभरते नेता के तौर पर पूरी जनता की सुरक्षा का संकल्प ले चुके राजेश वर्मा की कहानी खत्म नहीं होती, अभी तो इसकी शुरुआत हुई है, जो नेता बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट को अपना मूल मंत्र मानता है, डिप्टी मेयर से लेकर लोकसभा सांसद तक का सफर तय किया है, 

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