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‘भारत नहीं सुनेगा दूसरों की बात’ ट्रंप के टैरिफ से लेकर पश्चिमी देशों के पाखंड तक… एस जयशंकर ने सुनाई खरी-खरी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका का बिना नाम लिए टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की नीति पर निशाना साधा. उन्होंने वेनेजुएला पर भी भारत के रुख को साफ किया.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील और भारी भरकम एकतरफा टैरिफ लगाए को दबाव की नीति करार दिया. जयशंकर ने निशाना साधा. उन्होंने कहा, यह पहली बार नहीं है, जब भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. एस जयशंकर ने लक्जमबर्ग के दौरे में टैरिफ, पश्चिमी देशो के दोहरे रवैये और वेनेजुएला के हालातों पर बात की. उन्होंने लक्जमबर्ग में भारतीयों से बात की. 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका का बिना नाम लिए टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की नीति पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, आज के वक्त में देश वही काम करते हैं, जिनसे उनका सीधा फायदा होता है, लेकिन दूसरों को फ्री की सलाह दी जाती है. जयशंकर ने अटल बिहारी वाजपेयी के वक्त हुए 1998 के परमाणु परीक्षणों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, उस वक्त भी भारत के खिलाफ प्रतिबंध और दूसरे कड़े निर्णय देखे गए.

जयशंकर ने आगे कहा कि देशों को इन सब चुनौतियों के बावजूद कड़े फैसले लेने पड़ते हैं और उन पर कायम रहना पड़ता है. एस जयशंकर ने अमेरिका का नाम तो नहीं लिया लेकिन कड़ा संदेश दे दिया. उन्होंने इशारा किया कि दबाव की रणनीति कोई नई नहीं है, लेकिन ये भी सच है कि दबाव को भारत ने कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया.

वेनेजुएला की सुरक्षा पर चिंतित- जयशंकर 

एस जयशंकर ने वेनेजुएला के हालातों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा, वेनेजुएला के साथ भारत के अच्छे संबंध रहे हैं. इस समय सभी पक्षों को ऐसा हल निकालना चाहिए जो वहां के लोगों के हित में हो. 

जयशंकर ने कहा, हम वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं. यह एक ऐसा देश है जिसके साथ हमारे बहुत अच्छे रिश्ते हैं. हम सभी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे लोगों के हित में एक समाधान पर पहुंचें. अमेरिका-वेनेजुएला तनाव पर भारत का स्टैंड शांति का पक्षधर रहा है. भारत ने दोनों को शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की. 

पश्चिमी देशों पर साधा निशाना 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कई देशों की ओर से सवाल उठाने को पाखंड करार दिया. उन्होंने कहा, कुछ पश्चिमी देश केवल अपने स्वार्थ के हिसाब से ही काम करते हैं. फिर भी भारत को ‘मुफ़्त सलाह’ देने की कोशिश करते हैं. दरअसल, पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. जिसमें पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया. इस सैन्य कार्रवाई पर कई देशों ने सवाल उठाया था. 

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एस जयशंकर ने दो टूक कहा, भारत-पाकिस्तान संबंध सामान्य नहीं रहे हैं और यह एक अपवाद है. दशकों तक पाकिस्तान में आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चलते रहे हैं जिनको सेना का भी साथ मिलता रहा. पाकिस्तान ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया और उसे सामान्य बनाने की कोशिश भी की, जिसका भारत ने लगातार विरोध किया है.

भारत अपनी नीतियों को प्रभावित नहीं होने देगा

विदेश मंत्री ने साफ किया कि कोई भी प्रतिक्रिया भारत की नीति को प्रभावित नहीं कर सकती. खासकर मुद्दा जब देश की सुरक्षा का हो. उन्होंने पश्चिमी देशों को आईना दिखाते हुए कहा, अगर इतनी चिंता है तो वे अपने ही इलाकों में फैली हिंसा पर क्यों नहीं गौर करते. उन्होंने कहा, ‘लोग कहते एक बात हैं और करते दूसरी हैं’ और भारत को इस वास्तविकता को स्वीकार करते हुए अपनी विदेश नीति और सुरक्षा नीतियों को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए.

एस जयशंकर ने साफ किया कि भारत बाहरी टिप्पणियों से न तो अपने रुख में बदलाव करेगा और न ही विचलित होगा. उन्होंने कहा, आप (पश्चिमी देश) अपने ही क्षेत्र को क्यों नहीं देखते और खुद से पूछते कि वहां हिंसा का स्तर क्या है? आपने क्या रिस्क उठाए हैं और बाकी लोग आपके कार्यों को लेकर कितनी चिंता रखते हैं? गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर 6 दिवसीय लक्जमबर्ग दौरे पर हैं. जहां उन्होंने कई वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार रखे और भारत के रुख को क्लियर किया. 

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