किसी कानून में नहीं डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था...'योगी की पाती' में CM ने साइबर थ्रेट के प्रति किया जागरुक, कहा- घबराएं नहीं, बताएं
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता के नाम 'योगी की पाती' लिखकर और 'साइबर अपराध की चुनौतियों' विशेषकर डिजिटल अरेस्ट को लेकर प्रदेश की जनता को आगाह किया है. सीएम योगी ने बताया कि इसे रोकने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21वीं सदी में मोबाइल, कंप्यूटर और टेक की आवश्यकता के साथ-साथ सामने आ रही चुनौतियों को लेकर प्रदेशवासियों को आगाह किया है. उन्होंने कहा कि इसने हमारे जीवन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध के खतरे भी बढ़े हैं. उन्होंने डिजिटल अरेस्ट के सामने आ रहे मामलों के प्रति भी जागरूकता की अपील करते हुए कहा कि देश के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है. सीएम ने इसके साथ ही अपील की है कि इस तरह घटनाओं के प्रति जागरूक बनें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को.
साइबर अपराध के प्रति बनें जागरूक: CM योगी
सीएम योगी ने पत्र में लिखा, "मोबाइल और कंप्यूटर ने हमारे जीवन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया है, परंतु इसके साथ ही साइबर अपराध की चुनौतियां भी बढ़ी हैं. आपकी सरकार इसकी रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है."
75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने सक्रिय: CM योगी
सीएम योगी ने इस दौरान जानकारी दी कि 2017 से पूर्व प्रदेश में केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे. आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने क्रियाशील हैं. साथ ही सभी जनपदीय थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है. साइबर ठगों के विरुद्ध सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़े शस्त्र हैं.
मेरे सम्मानित प्रदेश वासियों,
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 5, 2026
मोबाइल और कंप्यूटर ने हमारे जीवन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया है, परंतु इसके साथ ही साइबर अपराध की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। आपकी सरकार इसकी रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
देश के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं… pic.twitter.com/08UP9bg94i
'भारत के कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' की कोई व्यवस्था नहीं'
ये अपराधी 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे झूठे और भ्रामक शब्दों का प्रयोग कर निर्दोष नागरिकों को डराते-धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं. देश के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है. पुलिस या अन्य कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, वॉट्सऐप, या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है.
सोशल मीडिया के यूज के प्रति रखें सावधानी!
सीएम योगी ने पत्र में कहा कि सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी सावधान रहना होगा. आप जो तस्वीरें, वीडियो या लोकेशन सार्वजनिक करते हैं, उसके माध्यम से अपराधी पहले आपके बारे में सूचनाएं जुटाते हैं और इन्हीं सूचनाओं को आपके विरुद्ध प्रयोग करते हैं. अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें. सावधानी के पश्चात भी यदि आपके साथ साइबर अपराध हो जाता है, तो सर्वप्रथम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें.
'शर्माएं नहीं पुलिस को जल्दी बताएं'
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सीएम योगी ने आगे कहा कि जितना जल्दी आप पुलिस को सूचित करेंगे, बचाव की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी. जागरूक बनें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को. आइए, हम सब मिलकर एक सुरक्षित और साइबर अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण करें.
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