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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी खेमे में था ये मुस्लिम देश, जब बदल गए हालात तो मिला लिया भारत से हाथ

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की सहित एक और देश था जिसने पाकिस्तान का साथ दिया था. बाद में जब भारतीयों और भारत सरकार ने सख्त रुख दिखाया तो उसके सुर बदल गए. अब भारत से रिश्ते सुधारने के लिए हाथ मिला लिया है.

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04 Apr 2026
( Updated: 04 Apr 2026
10:41 AM )
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी खेमे में था ये मुस्लिम देश, जब बदल गए हालात तो मिला लिया भारत से हाथ
India Azerbaijan Meeting in Baku/ @MEA/X
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मिडिल ईस्ट में जंग के बीच भारत ने अपनी दमदार कूटनीति का नमूना पेश किया है. वो देश जो कभी दिल्ली के खिलाफ था, वो अब भारत से अपना रिश्ता सुधारना चाह रहा है. इसी सिलसिले में एक मुस्लिम देश है जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का विरोध किया था और आतंकिस्तान का साथ दिया था. हालांकि ग्लोबल साउथ के लीडर भारत से रिश्ते बिगाड़कर वो काफी घाटे में रहा और अब वह नई शुरुआत करना चाह रहा है. ये देश है अजरबैजान. इसने बीते साल जंग के दौरान हर वो चीज की जिससे कि भारतीयों को बुरी लगे और पाकिस्तानियों को खुश किया जा सके. 

इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को फिर से बेहतर और नई उचाईयों पर ले जाने की पहल की गई है. आपको बता दें कि विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बाकू में अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव से मुलाकात की और भारत-अजरबैजान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की. साथ ही, उन्होंने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान किया. 

बाकू में भारत-अजरबैजान विदेश कार्यालय परामर्श का छठा दौर भी आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता सचिव (पश्चिम) और विदेश मामलों के उप मंत्री एलनुर मम्मादोव ने की. पिछले कई वर्षों में दोनों देशों के बीच यह इस तरह की पहली व्यापक वार्ता है.

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान था पाकिस्तान का अजरबैजान ने दिया था साथ?

बीते साल अप्रैल 2025 में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछकर की गई निर्दोष हिन्दू पर्यटकों की हत्याओं और आतंकी हमले के जवाब में 7-10 मई 2025 तक हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान अजरबैजान खुलकर पाकिस्तानी खेमे में नजर आया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जैश, लश्कर के 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया.

भारत की कार्रवाई की अजरबैजान ने की थी निंदा!

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इसके बाद अजरबैजान और तुर्की ने आतंक के खिलाफ भारत की कार्रवाई का समर्थन करने की बजाय आतंकिस्तान और इस्लामिक भाईचारा निभाना चाहा.  तब अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर भारत की कार्रवाई की निंदा की थी और पाकिस्तान के साथ एकजुटता दिखाई थी और 'संयम' बरतने की अपील की थी.

भारतीयों ने चलाया था 'बॉयकॉट तुर्की-अजरबैजान' अभियान

इसके बाद भारत के लोगों की ओर से अजरबैजान के खिलाफ बॉयकॉट कैंपेन चलाया गया था, भारतीयों में भारी गुस्सा देखा गया था. सोशल मीडिया पर 'बॉयकॉट तुर्की-अजरबैजान' अभियान चलाया गया. इंडियंस के लिए छुट्टियों में घूमने के लिए एक महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन रहे अजरबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई.

भारत ने किया था अजरबैजान की SCO की पूर्ण मेंबरशिप का विरोध

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इसके बाद भारत ने भी अजरबैजान की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) पूर्ण सदस्यता का विरोध किया था. वहीं दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी पैदा हो गई और कूटनीतिक संबंध ठंडे पड़ गए.ऑपरेशन सिंदूर प्रकरण के बाद दोनों देशों के बीच हुई इस उच्च स्तरीय बातचीत के दौरान आपसी हित के क्षेत्रों को शामिल करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई.

अब भारत के साथ अजरबैजान ने की नई शुरुआत

चर्चा किए गए मुद्दों में व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, संस्कृति, लोगों के बीच आदान-प्रदान और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई शामिल थे. सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने अजरबैजान के राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार हिकमत हाजियेव से भी मुलाकात की. दोनों पक्ष नई दिल्ली में आपसी सुविधा की किसी तारीख पर विदेश कार्यालय परामर्श का अगला दौर आयोजित करने पर सहमत हुए.

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एक दिन पहले भारत के राजदूत अभय कुमार ने बुधवार को अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव से मुलाकात की और औपचारिक तौर पर अपने 'परिचय पत्र की एक प्रति' प्रस्तुत की. दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर सार्थक चर्चा की. अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में अजरबैजान-भारत के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और आगे के सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया.

मिडिल ईस्ट में तनाव पर भी हुई चर्चा

दोनों पक्षों ने मध्य पूर्व में जारी तनाव पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय राजदूत ने ईरान से भारतीय नागरिकों को निकालने के दौरान दिए गए सहयोग के लिए अजरबैजान सरकार के प्रति गहरी कृतज्ञता भी व्यक्त की.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्ट कर कहा, ''बाकू में भारत-अजरबैजान विदेश कार्यालय परामर्श का छठा दौर भी आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता सचिव (पश्चिम) और विदेश मामलों के उप मंत्री, एलनुर मम्मादोव ने की. उन्होंने आपसी हित के क्षेत्रों को शामिल करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति की व्यापक समीक्षा की.''

ईरान से भारतीयों को निकलने में मदद के लिए भारत ने अजरबैजान का जताया आभार

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आपको बताएं कि भारत और अजरबैजान के दौरान रिश्तों में जमी बर्फ उस वक्त पिघती नजर आई जब अजरबैजान ने ईरान में फंसे भारतीयों को निकालने में सहयोग किया, अपनी सीमा का इस्तेमाल करने दिया. अब भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों को जमीनी सीमा चौकियों के माध्यम से सुरक्षित निकासी कराने के लिए अजरबैजान सरकार का आभार व्यक्त किया है.

इस संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लगभग 204 भारतीय नागरिक सफलतापूर्वक ईरान से अजरबैजान में प्रवेश कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि कई लोग पहले ही भारत लौट चुके हैं, जबकि अन्य के आने वाले दिनों में पहुंचने की उम्मीद है.

MEA ने ईरान में फंसे भारतीयों को लेकर दी नई अपडेट

जायसवाल ने कहा, "अजरबैजान में हमारे राजदूत मौजूद हैं. हमारे कई भारतीय नागरिक, ठीक-ठीक कहें तो 204, ईरान से अजरबैजान के लिए जमीनी सीमा चौकियों के रास्ते निकलने में सफल रहे हैं. वो लोग वहां से, वे स्वदेश लौटेंगे. उनमें से कई लौट चुके हैं; बाकी अगले कुछ दिनों में लौट आएंगे." उन्होंने आगे कहा, "हम अजरबैजान सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने जमीनी रास्ते ईरान से भारतीय नागरिकों के निकलने में मदद की. हमारे दोनों पक्षों के बीच परामर्श और नियमित आदान-प्रदान होता रहता है."

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बुधवार को, भारत के राजदूत अभय कुमार ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव से मुलाकात की और औपचारिक तौर पर अपने 'परिचय पत्र की एक प्रति' प्रस्तुत की. दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर सार्थक चर्चा की. अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में अजरबैजान-भारत के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और आगे के सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया.

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दोनों पक्षों ने मध्य पूर्व में जारी तनाव पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय राजदूत ने ईरान से भारतीय नागरिकों को निकालने के दौरान दिए गए सहयोग के लिए अजरबैजान सरकार के प्रति गहरी कृतज्ञता भी व्यक्त की. पिछले महीने, एमईए ने बताया था कि ईरान में फंसे कम से कम 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र, पेशेवर और तीर्थयात्री शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते अपने घर लौट आए हैं.

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