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कागजी साबित हुआ PAK-तुर्की-सऊदी रक्षा समझौता, एक हमला और शुरू होने से पहले ही जमींदोज हुआ 'इस्लामिक नाटो' का ख्वाब
पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी के बीच रक्षा समझौता, जिसे इस्लामिक नाटो की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही है वो 48 घंटे के अंदर फेल साबित हुआ है. यानी कि एक पर हमले का मतलब दूसरे पर हमला वाली थ्योरी कागजी साबित हुई है.
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पाकिस्तान की इस्लामिक नाटो बनाने की कोशिश की कलई खुल गई है. सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हाल ही में हुए रक्षा समझौते की हवा तो साइज में बेहद छोटे यमन के हूती विद्रोहियों ने निकाल दी है. यानी कि ये दूसरी बार है कि पाक ने सऊदी के साथ जो द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय समझौता किया था, उसका दोनों ही बार बुलबुला फूट गया है.
48 घंटे के अंदर फेल हुआ इस्लामिक नाटो!
सऊदी अरब से म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के बाद ही अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर ताबड़तोड़ हमले किए थे और पाक फौज का धुआं-धुआं कर दिया था. ठीक इसके बाद ईरान ने सऊदी पर सैकड़ों मिसाइल दागे, लेकिन पाकिस्तान की हिम्मत नहीं हुई कि वो ईरान पर पलटवार करे. अब हूती विद्रोहियों ने सऊदी की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी कंपनी अरामको पर बड़ा हमला किया है, जिसने बता दिया कि ये कागजी समझौता रद्दी साबित हुआ.
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इस्लामिक नाटो का सपना चकनाचूर!
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यानी कि जब मक्का समझौता के टेस्ट की बारी आई ये फेल साबित हुआ. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान के प्रॉक्सी यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जाजान स्थित अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला कर दिया. इस लिहाज से देखें तो NATO की तरह का ख्वाब देखने वाले इस त्रिपक्षीय समझौते जिसका मतलब ये है कि 'एक पर हमला, तीनों पर हमला' का दावा करने वाले इस गठबंध को ओर से कोई जवाबी कार्रवाई ना की गई और ना ही कोई बयान सामने आया है.
हूती विद्रोहियों के मिसाइल के आगे फेल हो गया पाक-सऊदी-तुर्की समझौता
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यमनी ग्रुप हूती ने रविवार सुबह जजान स्थित अरामको रिफाइनरी साइट पर किए ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली है. इसके बाद रिफाइनरी की एक साइट पर आग लग गई थी जिसे जल्द बुझा लेने का दावा सऊदी अरब प्रशासन ने किया था.
अल मसीरा टीवी के मुताबिक, यमनी ग्रुप ने जजान में सऊदी अरामको की तेल फैसिलिटी पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली. एक बयान में कहा कि उसने ड्रोन से फैसिलिटी को निशाना बनाया और यह हमला यमन के सादा और हज्जाह प्रांतों पर सऊदी ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया.
हूती विद्रोहियों ने सऊदी कंपनी अरामको पर किया बड़ा हमला
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रविवार को सुबह जुबैल और जजान में अरामको रिफाइनरी साइट पर आग लगने की पुष्टि खुद सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने की थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक जुबैल इलाके में एक तेज और शक्तिशाली धमाका सुना गया था. इसके साथ ही यह दावा भी सामने आया कि जुबैल इंडस्ट्रियल सिटी की गैस फैसिलिटी को निशाना बनाया गया, जहां आग लग गई.
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने कहा था कि फायरफाइटर्स ने जजान में सऊदी अरामको रिफाइनरी के एक साइट में "सुबह लगी आग बुझा दी थी," जो यमनी बॉर्डर के पास लाल सागर का एक पोर्ट है. मंत्रालय के मुताबिक इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था.
इस बीच, सऊदी विदेश मंत्रालय ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) के उस बयान का स्वागत किया है जिसमें देश और लाल सागर में कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमलों की निंदा की गई है.
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साथ आकर भी दूर ही दिख रहे सऊदी-तुर्की!
वहीं इस्लामिक नाटो को लेकर 'द यरूशलम पोस्ट' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 48 घंटे में इसका बुलबुला फट गया है. इसमें कहा गया कि मक्का समझौते में यह तय हुआ था कि किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. इसके बावजूद, जाजान हमले के बाद न तो तुर्की और न ही पाकिस्तान ने कोई प्रतिक्रिया दी. इससे असल संकट में इस समझौते के काम करने के तरीके पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
'द यरूशलम पोस्ट' ने कहा कि इस सैन्य गठबंधन की हकीकत सामने लाते हुए कहा कि इस्लामिक नाटो कहे जा रहे इस समझौते के महज़ 48 घंटे के अंदर ये फेल साबित हुआ. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने बीते शुक्रवार को सऊदी अरब के मक्का में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. यहां ये भी बताना जरूरी है कि इस समझौते में तुर्की-सऊदी का साथ आना अपने आप में बड़ी बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि सऊदी और तुर्की एक दूसरे के राइवल माने जाते रहे हैं. सऊदी एक ओर जहां ख़ुद को इस्लामिक उम्मा का लीडर मानता रहा है बल्कि उसको कस्टोडियन ऑफ द ग्रैंड मॉस्क कहा जाता है.
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वहीं तुर्की ख़ुद को यूरोपीय देशों और इस्लामिक वैल्यूज दोनों का मिक्सचर मानता है. यानी कि जो टेक्नोलॉजी में भी एडवांस है और इस्लाम भी फल-फूल रहा है. तुर्की भी ख़ुद को मुस्लिम देशों के लीडर के तौर पर पेश करना चाहता है क्योंकि उसका ऑटोमन अंपायर के वक्त बड़ी आबादी पर राज रहा है. उसी कारण तुर्की और सऊदी में मुस्लिम वर्ल्ड की लीडरशिप को लेकर एक जंग रही है.
इससे पहले PAK-तुर्किए-सऊदी रक्षा डील पर ईरान ने भी तंज कसा था और कहा था कि कोई भी कागजी समझौता लंबे समय तक सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता. इतना ही नहीं रियाद को ये भी चेतावनी दी कि जैसे उसके हमलों से अमेरिका भी नहीं बचा सका वैसे ही ये डील कुछ नहीं कर पाएगी.
ईरान ने सऊदी अरब को दी वॉर्निंग?
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ईरान की संसद और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति आयोग के सदस्य इब्राहिम रजाई ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए नए रक्षा समझौते की आलोचना की. उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने के बावजूद इससे सऊदी अरब की सुरक्षा लंबे समय तक सुनिश्चित नहीं होगी.
इब्राहिम रजई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सऊदी अरब को यह समझना चाहिए कि तुर्की और पाकिस्तान के साथ कागज़ी समझौते से उन्हें सुरक्षा नहीं मिलेगी, ठीक वैसे ही जैसे सालों तक अमेरिकियों को एकतरफ़ा तौर पर खुश करने से उन्हें सुरक्षा नहीं मिली. अपनी नीतियों में सुधार करें ताकि आपको सुरक्षा के लिए दूसरों के सामने गिड़गिड़ाना न पड़े.
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जहां तक हूती विद्रोहियों के हमले का सवाल है तो मंत्रालय ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से अपनी अपील भी दोहराई कि वे उन कामों और उल्लंघनों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाएं जो इस इलाके की सुरक्षा और स्थिरता, नेविगेशन और ग्लोबल कॉमर्स की सुरक्षा को खतरा पहुंचाते हैं, और यमन में शांति लाने की चल रही कोशिशों में रुकावट डालते हैं.
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बयान में, यूएनएससी सदस्यों ने 3 जुलाई को सना एयरपोर्ट और 13 जुलाई को होदेइदा एयरपोर्ट पर यमन की इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त सरकार की मंजूरी के बिना एयरक्राफ्ट लैंडिंग की भी निंदा की थी.
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काउंसिल ने दोहराया कि यूएनएससी रेजोल्यूशन 2216 यमन में बैन किए गए लोगों और संस्थाओं ( इसमें हूती भी शामिल) को हथियारों, उससे जुड़े सामान और मदद की सप्लाई, बिक्री या ट्रांसफर पर रोक लगाता है.