ईरान जंग में अब चीन की सीधी एंट्री, अमेरिका ने तेहरान जा रहे जहाज को किया जब्त, तिलमिलाया ड्रैगन!
Iran: हाल ही में अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक ईरानी झंडे वाले जहाज को जब्त किया, जिससे तनाव और बढ़ गया. इस जहाज में ऐसे सामान मिलने की बात सामने आई है, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों कामों में हो सकता है.
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ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव फिलहाल कुछ समय के लिए शांत जरूर दिख रहा है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए है. इस बीच दोनों देशों के बीच बातचीत कि कोशिशें भी चल रही हैं और बताया जा रहा हैं कि इस्लामाबाद में किसी तरह की वार्ता की तैयारी पर विचार हो रहा हैं. लेकिन इसी सुकून भरे माहौल के बीच एक नया मुद्दा सामने आ गया हैं, चीन की कथित भूमिका, जिसने पूरे मामले को और जटिल बना दिया हैं. अब यह टकराव सिर्फ दो देशों तक सिमित नहीं लग रहा, बल्कि इसमें बड़े वैश्विक खिलाड़ी भी धीरे -धीरे जुड़ते दिख रहे हैं....
जहाज की जब्ती और बढ़ता विवाद
हाल ही में अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक ईरानी झंडे वाले जहाज को जब्त किया, जिससे तनाव और बढ़ गया. इस जहाज में ऐसे सामान मिलने की बात सामने आई है, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों कामों में हो सकता है. अमेरिका को शक है कि इनमें कुछ रसायन या उपकरण ऐसे हो सकते हैं जो मिसाइल तकनीक से जुड़े हों. इस घटना के बाद पूरा मामला और संवेदनशील हो गया है, क्योंकि यह इलाका पहले से ही तेल और व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है.
चीन पर लगाए जा रहे आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में चीन का नाम भी चर्चा में आ गया है. कुछ अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि चीन, ईरान को परोक्ष रूप से मदद दे सकता है. हालांकि चीन ने इन आरोपों को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव कम होना चाहिए और सभी देशों को संयम से काम लेना चाहिए. चीन का कहना है कि इस इलाके में शांति और व्यापारिक आवाजाही सबसे जरूरी है, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
निक्की हेली के दावे और अमेरिका की रणनीति
अमेरिका की पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत Nikki Haley ने इस मुद्दे पर गंभीर बयान दिए हैं. उनका कहना है कि अगर ईरान की सैन्य क्षमता को रोकना है, तो अमेरिका को कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं, यहां तक कि विशेष सैन्य बलों की तैनाती की भी जरूरत पड़ सकती है. उनके अनुसार, चीन की भूमिका को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है, क्योंकि यह पूरे संकट की दिशा बदल सकता है.
अमेरिका की रणनीति और ट्रंप का रुख
इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का नाम भी लगातार चर्चा में है. वे लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)को खुला रखा जाए ताकि वैश्विक तेल और व्यापार प्रभावित न हो. साथ ही वे चीन के साथ संबंधों को लेकर भी अलग रुख दिखा रहे हैं और बातचीत के संकेत दे रहे हैं.
हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर चीन किसी भी रूप में ईरान के साथ मजबूती से खड़ा होता है, तो यह संकट और गहरा सकता है. इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और बाजार पर भी पड़ सकता है.
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