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बलूचिस्तान चाहता था भारत का साथ, लेकिन नेहरू के फैसले ने पलट दी पूरी बाजी!

Pakistan: अलगावादी संगठनों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों क बीच संघर्ष तेज हुआ है. इसी बीच सोशल मीडिया पर 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' के नाम से कुछ दावे वायरल हुए, जिनमें अलग सरकार और अलग झंडे की बात कही गई.

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18 Jul 2026
( Updated: 18 Jul 2026
11:43 AM )
बलूचिस्तान चाहता था भारत का साथ, लेकिन नेहरू के फैसले ने पलट दी पूरी बाजी!
Image Source: Xinhua via IANS
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Pakistan: पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर चर्चा में है. हाल के दिनों में वहां अलगावादी संगठनों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों क बीच संघर्ष तेज हुआ है. इसी बीच सोशल मीडिया पर 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' के नाम से कुछ दावे वायरल हुए, जिनमें अलग सरकार और अलग झंडे की बात कही गई. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. इन घटनाओं के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि आखिर बलूचिस्तान में पाकिस्तान से अलग होने की मांग क्यों बार-बार सामने आती है और इसका इतिहास क्या है.

आजादी से पहले कैसी थी बलूचिस्तान की स्थिति?

भारत के विभाजन से पहले बलूचिस्तान की स्थिति बाकी इलाकों से कुछ अलग थी. उस समय एक हिस्सा सीधे ब्रिटिश शासन के अधीन था, जबकि कई रियासतें अलग-अलग शासकों के अधीन थीं. इनमें सबसे बड़ी और प्रभावशाली रियासत कलात थी, जिस पर खान मीर अहमद यार खान का शासन था. जब अंग्रेज भारत छोड़ने की तैयारी कर रहे थे, तब इन रियासतों के सामने यह विकल्प था कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों या फिर कोई अलग रास्ता चुनें.

कलात ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया

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बलूच राष्ट्रवादी संगठनों के अनुसार, अगस्त 1947 में कलात को एक विशेष दर्जा दिए जाने पर सहमति बनी थी. इसके बाद 15 अगस्त 1947 को कलात ने खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया. उस समय वहां अपनी संसद भी बनाई गई थी, जिसमें दो सदन थे और शासन चलाने की अलग व्यवस्था बनाई गई थी. हालांकि पाकिस्तान इस दावे से पूरी तरह सहमत नहीं है और उसका अपना अलग कानूनी पक्ष है.

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पाकिस्तान में शामिल होने पर क्यों हुआ विवाद?

भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद कलात और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू हुई. बलूच राष्ट्रवादियों का कहना है कि कलात की संसद ने पाकिस्तान में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया था. उनका तर्क था कि बलूचिस्तान की अपनी अलग पहचान, भाषा और संस्कृति है.
वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उस समय रियासत के शासक के पास अंतिम फैसला लेने का अधिकार था और उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत पाकिस्तान में विलय का निर्णय लिया. यही वजह है कि इस मुद्दे को लेकर आज भी दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं.

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क्या बलूचिस्तान भारत के साथ आ सकता था?

इतिहास से जुड़े कुछ विवरणों के अनुसार, 1948 की शुरुआत में जब हालात तनावपूर्ण होने लगे, तब कलात के शासक ने भारत से भी संपर्क करने की कोशिश की थी. बताया जाता है कि उन्होंने भारत के साथ किसी तरह के समझौते या सहयोग की इच्छा जताई थी. लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. इतिहासकारों का मानना है कि उस समय भारत कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा था. भारत और कलात के बीच सीधी सीमा भी नहीं थी और नई सरकार किसी नए सैन्य या राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ना चाहती थी.

आखिर कैसे हुआ पाकिस्तान में विलय?

1948 में पाकिस्तान ने कलात के आसपास की कुछ अन्य रियासतों के साथ अलग-अलग समझौते किए. इसके बाद हालात तेजी से बदले और क्षेत्र में सैन्य दबाव भी बढ़ा. अंत में 27 मार्च 1948 को कलात के शासक ने पाकिस्तान में विलय के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए.
पाकिस्तान इस विलय को पूरी तरह कानूनी और वैध मानता है, जबकि कई बलूच राष्ट्रवादी संगठन इसे दबाव में लिया गया फैसला बताते हैं. यही मतभेद आज भी विवाद की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है.

विलय के बाद शुरू हुआ विरोध

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पाकिस्तान में शामिल होने के कुछ समय बाद ही विरोध शुरू हो गया. कलात के शासक के भाई प्रिंस अब्दुल करीम ने पाकिस्तान के खिलाफ हथियार उठाए. इसके बाद अलग-अलग समय पर बलूचिस्तान में कई बार विद्रोह और हिंसक घटनाएं सामने आती रही. पिछले कई दशकों से यह क्षेत्र समय-समय पर अशांति का सामना करता रहा है.

प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है बलूचिस्तान

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों से काफी समृद्ध माना जाता है. यहां प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना और कई अन्य खनिज बड़ी मात्रा में मौजूद हैं. बलूच संगठनों का आरोप है कि उनके क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों को विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिलता. दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह बलूचिस्तान के विकास के लिए लगातार निवेश कर रही है और वहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य विकास परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है.

आज भी क्यों बना हुआ है विवाद?

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बलूचिस्तान का मुद्दा सिर्फ इतिहास का नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीति, सुरक्षा और विकास से भी जुड़ा हुआ है. एक तरफ पाकिस्तान इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि कुछ अलगाववादी संगठन स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग करते हैं. इसी वजह से समय-समय पर वहां तनाव और संघर्ष की स्थिति बनती रहती है.
हाल की घटनाओं ने एक बार फिर इस पुराने विवाद को चर्चा में ला दिया है. आने वाले समय में वहां की स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक राजनीतिक बातचीत, सुरक्षा हालात और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

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