'बॉस्टन जाकर जान बचेगी या फिर यहां हिसाब देना ही होगा...', दिल्ली पुलिस के पूर्व ACP का CJP-दिपके को अल्टीमेटम
दिल्ली के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस वेद भूषण ने कॉकरोच जनता पार्टी और अभिजीत दिपके को सीधी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सरकार-शासन भले केस वापस ले ले, हम एक-एक कर केस कोर्ट में ले जाएंगे, उससे कौन रोकेगा...दिपके को या तो बॉस्टन जाना होगा या फिर यहां हिसाब देना ही होगा.
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दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई छिटपुट हिंसा, लाठीचार्ज के बाद बवाल मचा हुआ है. इस दौरान आंदोलनकारियों के साथ-साथ कई पुलिस के आला अधिकारी, जवान, सिपाही घायल हुए. वहीं कोर्ट की ओर से सभी छात्र-प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के आदेश जारी किए गए, जिसके बाद सभी की रिहाई हो गई. इसके बाद इस आंदोलन के दौरान घायल हुए पुलिस कर्मियों के परिवार वाले भी आगे आए और न्याय की मांग की. इसी बीच दिल्ली पुलिस महासंघ की ओर से भी पूरे मामले में कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी है.
दिल्ली पुलिस के पूर्व ACP की सीजेपी को चेतावनी
इसी बीच दिल्ली पुलिस के पूर्व एसीपी वेद भूषण ने सीजेपी और उसके फाउंडर अभिजीत दिपके सीधे-सीधे निशाने पर लिया और कहा कि उन्हें जवाब देना होगा, हिसाब देना ही होगा. वेद भूषण ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आने वाला वक्त सीजेपी (CJP) पार्टी के लिए खतरनाक हो सकता है. या तो बॉस्टन (अमेरिका) जाकर दीप की एंड कंपनी की जान बचेगी या फिर इनको यहां जवाब देना ही होगा.
केस तो दर्ज करके रहेंगे, दिपके को हिसाब तो देना ही होगा: वेद भूषण
भूषण ने आगे कहा कि यहां जवाब नहीं देंगे, तो अदालतों में हम दबाव बनाकर रहेंगे. अभी हम तमाम पुलिसकर्मियों की फैमिलीज़ से व्यक्तिगत केस दर्ज करवाएंगे. प्रशासन-सरकार भले ही केस विड्रॉ (केस वापस ले ले) कर लें, लेकिन व्यक्तिगत क्षमता में मुझे पूरा हक है... मैं देश का नागरिक हूँ और मुझे अदालत जाने का पूरा अधिकार है. एक-एक खून के कतरे का हिसाब-किताब लिया जाएगा. व्यक्तिगत क्षमता में जो अधिकार है, उसका प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 156 में मौजूद है. हम अपनी अर्जी लेकर अदालत जा सकते हैं और इनके खिलाफ निजी तौर पर मुकदमा दर्ज करा सकते हैं. इतना ही नहीं, हम इनसे हर्जाना और क्षतिपूर्ति भी ले सकते हैं कि 'मुझे चोट लगी है, जिस वजह से मैं 6 महीने ड्यूटी पर नहीं जा पाया, इसलिए जिन्होंने इस अंडरटेकिंग पर दस्तखत किए हैं, उनसे हमें 1 करोड़ रुपये का जुर्माना दिलाया जाए.'
क्या है दिल्ली पुलिस महासंघ के प्रेस रिलीज में?
उन्होंने इस दौरान कहा कि प्रेस रिलीज़ में ये जो कागज़ मेरे पास है, वह एक अंडरटेकिंग है. इसका विषय ही 'Organisers' Undertaking for Jantar Mantar' है. जब भी कोई प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर, रामलीला मैदान या बुराड़ी जाता है, तो उसे यह अंडरटेकिंग देनी होती है. यह केवल दिल्ली पुलिस की बनाई हुई अंडरटेकिंग नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों पर आधारित है. वर्ष 2017 की क्रिमिनल रिट पिटीशन (1153/2017) की गाइडलाइंस के आधार पर दिल्ली पुलिस ने एक एसओपी (SOP 48/2022) बनाई थी, जिसमें 22 बिंदु हैं और आयोजकों को इन पर हस्ताक्षर करके देना होता है कि वे इन सभी शर्तों का पालन करेंगे और कानून मानेंगे.
उन्होंने आगे बताया कि इस अंडरटेकिंग में जो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं, उनमें बिंदु संख्या 5 में स्पष्ट लिखा है कि आयोजक यह सुनिश्चित करेंगे कि धरना और प्रदर्शन पूरी तरह से कानूनी और अनुशासित तरीके से चलाया जाएगा. छठा बिंदु कहता है कि 1,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ एकत्र नहीं होने दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी आयोजक पर होती है. शर्त संख्या 9 के अनुसार धरना केवल सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच ही आयोजित किया जा सकता है, जिसका इन्होंने पहले ही दिन से उल्लंघन किया. इसके अलावा, प्रदर्शन में इस्तेमाल होने वाले बैनर और झंडों की लंबाई-चौड़ाई 9x6 फीट तय की गई है और झंडों का इस्तेमाल केवल दिखाने के लिए किया जा सकता है, उनका दुरुपयोग नहीं किया जा सकता. उसमें कोई ऐसी बात नहीं लिखी जा सकती जो किसी की भावनाओं को आहत करती हो या किसी देश के खिलाफ आपत्तिजनक हो.
'या तो बॉस्टन, अमेरिका में जाकर जान बचेगी या यहां तो हिसाब देना होगा...'
दिल्ली पुलिस महासंघ की कॉकरोच जनता पार्टी को खुली चेतावनी.#DelhiPolice #DelhiPoliceMahasangh #CJP #AbhijitDipke pic.twitter.com/TLRL9xneNJ— NMF NEWS (@NMFNewsNational) August 1, 2026Advertisement
क्या सीजेपी के प्रदर्शन में उड़़ीं नियमों की धज्जियां?
वेद भूषण के मुताबिक इसके साथ ही इसमें एक और सबसे अहम शर्त यह है कि आयोजक यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी प्रतिभागी भड़काऊ भाषण नहीं देगा और न ही ऐसी भाषा का प्रयोग करेगा जिससे भीड़ में उत्तेजना फैले या लोग भड़कें. जिस तरह से इन्होंने 'संसद चलो' का आह्वान किया (जबकि 20 तारीख को संसद का मानसून सत्र चल रहा था), यह पूरी तरह से भड़काऊ था. इसी भड़कावे की वजह से प्रदर्शनकारियों ने पहला, दूसरा और तीसरा बैरिकेड तोड़ दिया और संसद से मात्र 200 गज की दूरी पर पुलिस को बल प्रयोग करके उन्हें रोकना पड़ा. इस हिंसा में पुलिस को भारी नुकसान हुआ और हमारे 128 अधिकारियों व जवानों को चोटें आईं. नियम कहते हैं कि आप धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, आवास या भाषा के आधार पर कोई विवाद नहीं करेंगे, लेकिन यहां 100% नियमों का उल्लंघन हुआ है.
इस 22 सूत्रीय दस्तावेज़ का 21वां बिंदु सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिसमें लिखा है कि 'मैं अपने समर्थकों को नियंत्रण में रखने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहूँगा और विफल रहने पर मेरे और अन्य आयोजकों के खिलाफ मौजूदा कानून के तहत मुकदमा चलाया जाए.' यह दस्तावेज़ इन्होंने खुद लिखकर दिल्ली पुलिस को सौंपा है, जो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप है. अब इन्हें हिसाब-किताब देना होगा कि इन सभी उल्लंघनों के लिए आयोजक जिम्मेदार हैं या कोई और.
क्या है दिल्ली पुलिस के परिवारों की अगली रणनीति?
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उन्होंने पुलिस परिवारों और पुलिस महासंघों की अगली रणनीति के बारे में बात करते हुए कहा कि किसी के पति तो किसी के पिता पुलिस में हैं-वे बेहद दुखी हैं और उनका दुखी होना स्वाभाविक भी है. आपने एक बैनर देखा होगा जिस पर लिखा था: 'हमारे भी पापा हैं, हम भी किसी के पिता हैं.' पुलिस में नौकरी करने वाले लोग कोई लावारिस तो हैं नहीं. उनके परिजनों का यह पूरा अधिकार है कि अपने परिजनों के साथ हुई हिंसा के खिलाफ अदालत में जाकर अपनी बात रखें. सरकार चाहे केस करे या न करे, व्यक्तिगत क्षमता में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 156 के तहत हमें अधिकार है कि हम अदालत जाकर प्राइवेट मुकदमा दर्ज कराएं और 6 महीने ड्यूटी से वंचित रहने व शारीरिक चोट के बदले 1 करोड़ रुपये तक का मुआवजा वसूलें. इसलिए मेरा बार-बार यही कहना है कि आने वाले समय में इनकी कानूनी दिक्कतें बहुत ज्यादा बढ़ने वाली हैं.
बिल्कुल सही यह तो होना ही चाहिए।
Is poore dange ka responsibility deepke,sourav das ka hi hai iske alawa jo criminals police karmiyon pur upadrav kiya aur sarkari,private property ka nuksan pahunchaya hai unpar private case karne ka adhikar police karmiyon ka parivar ko hai.
Deepake gaddar h, isko punishment milna hi chahiye
The whole country should and would stand with and support ACP Ved Bhusan.
Yes. Agreed and Salute