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बंगाल में लागू होगा UCC और Anti-Social कानून, जानें क्या हैं इसके सख़्त प्रावधान, जिस पर मचा बवाल, भड़क गई TMC
पश्चिम बंगाल में अपधारियों और राजनीतिक हिंसा की नकेल कस दी जाएगी. विधानसभा में ऐसा बिल पेश हो रहा है जिसके बाद ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोचना होगा. वहीं UCC पेश करने वाला बंगाल चौथा राज्य बनने वाला है. सीएम सुवेंदु ने इस संबंध में ऐलान कर दिया है.
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पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भ्रष्टाचार, संगठित अपराध, धर्मांतरण और हिंसा को रोकने के लिए ताबड़तोड़ एक्शन ले रहे हैं. सीएम सुवेंदु ने ऐलान किया है कि राज्य में जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार जल्द ही एक सख्त कानून लाएगी. इतना ही नहीं सोमवार को विधानसभा में UCC और 'एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल' (Anti-Social Bill) पेश करने जा रही है, जिससे कि असमाजिक तत्वों पर नकेल कसी जाएगी. इसमें पुलिस को कार्रवाई के लिए विशेष अधिकार दिए जाएंगे.
मुख्यमंत्री ने भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के रचयिता ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श वाक्य को अपना मार्गदर्शक मानकर आगे बढ़ेगा. समान नागरिक संहिता के साथ-साथ राज्य सरकार भूमि जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाने जा रही है. इस अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब से पश्चिम बंगाल में राष्ट्रविरोधी ताकतों और व्यक्तियों के लिए कोई जगह नहीं होगी.
घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए हम प्रतिबद्ध: CM सुवेंदु
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल चैतन्य देव, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि है. भूमि जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाने के अलावा, हम अवैध घुसपैठियों को पहले हिरासत केंद्रों में भेजने और फिर वहां से उन्हें उनके मूल स्थान पर वापस भेजने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य सरकार पश्चिम बंगाल की धरती पर कभी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की जनता ने राज्य को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से बचाने का आधा काम कर दिया है. शेष कार्य हम पूरा करेंगे. पश्चिम बंगाल में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं होगी जो ऑपरेशन सिंदूर का मजाक उड़ाते हैं, राष्ट्र का अपमान करते हैं और पहलगाम हमले के दौरान चुप रहते हैं.
'क्या बोले सीएम सुवेंदु'
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CM सुवेंदु ने कहा कि, "भरोसा रखिए, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नारा दिया था- 'एक देश, एक प्रधानमंत्री, एक संविधान, एक झंडा.' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 और 35A को हटाया. आने वाले दिनों में, पश्चिम बंगाल में आपकी सरकार भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लाएगी..." इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने वाले सभी शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता प्रदान की जाएगी.
आपको बता दें कि सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल पांच नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें से दो सबसे महत्वपूर्ण विधेयक समान नागरिक संहिता और राज्य में असामाजिक गतिविधियों से निपटने के उपायों से संबंधित होंगे.
सोमवार को समान नागरिक संहिता विधेयक पेश होने के साथ ही पश्चिम बंगाल धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों को प्रतिस्थापित करने वाली एक एकीकृत नागरिक संहिता प्रणाली को अपनाने वाला चौथा भारतीय राज्य बन जाएगा. यह संहिता धर्म, जाति या जनजाति की परवाह किए बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगी. अन्य तीन राज्य जिन्होंने पहले ही समान नागरिक संहिता को अपना लिया है, वे हैं उत्तराखंड, गुजरात और असम.
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सोमवार को बंगाल विधानसभा में पेश होगा UCC Bill
आपको बता दें कि बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक सोमवार को राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एक एकीकृत नागरिक कानून से बदलने वाला चौथा भारतीय राज्य बन जाएगा, जो धर्म, जाति या जनजाति की परवाह किए बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा. यूसीसी को पहले ही अपना चुके अन्य तीन राज्य उत्तराखंड, गुजरात और असम हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विधेयक पेश करने का निर्णय गुरुवार शाम को अध्यक्ष रथेंद्र बोस द्वारा विधानसभा परिसर में बुलाई गई बैठक में लिया गया. बैठक कुछ देर तक चली. सोमवार को सदन में कुल पांच विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें से एक और संभवतः सबसे महत्वपूर्ण UCC विधेयक है.
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मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विधेयकों पर चर्चा के लिए कुल एक घंटे का समय आवंटित किया जाएगा, और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं चर्चा में भाग लेंगे. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी चर्चा में शामिल होने की संभावना है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित चुनावी रैलियों में किए गए वादे के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में असामाजिक नियंत्रण अधिनियम (यूसीसी) को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई थी.
'एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल' के जरिए कसी जाएगी असामाजिक तत्वों पर नकेल
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एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक, जिसे सोमवार को विधानसभा में पेश किया जाएगा, इसका शीर्षक है 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026', जिसका उद्देश्य राज्य में असामाजिक गतिविधियों से निपटना है.
आपको बता दें कि राजनीतिक, सामाजिक और चुनावी हिंसा के लिए मशहूर बंगाल में असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक नया विधेयक 29 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया जाएगा. 'द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' शीर्षक वाले इस विधेयक की राजपत्र अधिसूचना जारी हो चुकी है और इसे सोमवार को सदन में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा.
क्या है 'एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल'?
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मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सदन के चल रहे बजट सत्र पर चर्चा के दौरान इस सप्ताह की शुरुआत में ऐसे विधेयक को पेश करने की योजना की घोषणा की थी. कलकत्ता राजपत्र के एक विशेष अंक में प्रकाशित विधेयक में कहा गया है कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना, कानून व्यवस्था बनाए रखना और संगठित असामाजिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करना है.
Kolkata, West Bengal: CM Suvendu Adhikari says, "Have faith, Syama Prasad Mookerjee gave the slogan 'One Nation, One Prime Minister, One Constitution, One Flag.' Prime Minister Narendra Modi removed Articles 370 and 35A. In the coming days, your government in West Bengal will… pic.twitter.com/Hdg70zml98
— IANS (@ians_india) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 26, 2026
एक साल तक निवारक हिरासत (Preventive Detention) का प्रावधान
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यह अधिनियम मुख्य रूप से असामाजिक गतिविधियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं से दो मुख्य भागों में भिन्न है. पहले भाग में प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, तो इस विधेयक को अधिनियम में परिवर्तित किए जाने के बाद, उसे एक वर्ष तक निवारक हिरासत (प्रीवेंटिव डिटेंशन) में रखा जा सकता है.
'एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल' के जरिए हो जाएगी संपत्ति की जब्ती!
पहले भाग के तहत एक सलाहकार बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो यह तय करेगा कि किसी विशेष व्यक्ति के लिए निवारक गिरफ्तारी लागू होगी या नहीं. यह सलाहकार बोर्ड निवारक हिरासत की तर्कसंगतता का आकलन करेगा. वहां, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपना बचाव करने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार होगा. सलाहकार बोर्ड की अध्यक्षता कलकत्ता उच्च न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश करेंगे. इसमें दो अन्य सदस्य भी होंगे जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के योग्य हैं.
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दूसरा भाग के तहत राज्य सरकार को BNS की उपयुक्त धारा का प्रयोग करके ऐसे अपराध में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार देना है. नए कानून के तहत पुलिस को किसी व्यक्ति को किसी क्षेत्र से निष्कासित करने या प्रतिबंधित करने का अधिकार भी दिया जाएगा, यदि उन्हें आशंका हो कि वह व्यक्ति अशांति फैला सकता है. इस कानून के कार्यान्वयन में पुलिस और सरकारी कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रावधान भी शामिल होंगे.