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हरियाणा में हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीजों को बड़ी राहत, 10 नए इलाज केंद्र खुलेंगे, घर के पास मिलेगी मुफ्त जांच और दवा
Haryana: सरकार ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) के तहत राज्य में 10 नए वायरल हेपेटाइटिस उपचार केंद्र खोलने का निर्णय लिया है. इन नए केंद्रों के शुरू होने के बाद मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या बड़े अस्पतालों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे.
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Haryana: हरियाणा सरकार ने वायरल हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित लोगों को बेहतर और समय पर इलाज देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) के तहत राज्य में 10 नए वायरल हेपेटाइटिस उपचार केंद्र खोलने का निर्णय लिया है. इन नए केंद्रों के शुरू होने के बाद मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या बड़े अस्पतालों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे. उन्हें अपने घर के आसपास ही बीमारी की जांच, इलाज, दवाइयां, डॉक्टर की सलाह और नियमित जांच जैसी सभी जरूरी सुविधाएं मुफ्त में मिल सकेंगी. इससे खास तौर पर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है.
अब राज्य में कुल 36 उपचार केंद्र होंगे
इन 10 नए केंद्रों के खुलने के बाद हरियाणा में वायरल हेपेटाइटिस के इलाज के लिए कुल 36 सरकारी उपचार केंद्र हो जाएंगे. अभी तक राज्य में 26 केंद्र काम कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि इलाज की सुविधा जितनी ज्यादा लोगों के करीब होगी, उतनी ही जल्दी मरीजों की पहचान हो सकेगी और समय रहते उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा. इससे बीमारी को गंभीर होने से रोकने में भी मदद मिलेगी और संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होगा.
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किन-किन जगहों पर खुलेंगे नए केंद्र?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि नए उपचार केंद्र फरीदाबाद के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फतेहाबाद के रतिया और टोहाना, जींद के नरवाना, कैथल के गुहला, करनाल के असंध और नीलोखेड़ी, सिरसा के डबवाली और ऐलनाबाद तथा पानीपत के समालखा उपमंडल नागरिक अस्पताल में शुरू किए जाएंगे. इन क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को अब इलाज के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. सरकार ने ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी है जहां हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या अधिक है या जहां लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था.
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पहले से भी चल रहे हैं कई उपचार केंद्र
सरकार ने बताया कि फिलहाल राज्य में रोहतक के पीजीआईएमएस में एक मॉडल उपचार केंद्र, जिला नागरिक अस्पतालों में 22 उपचार केंद्र और सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में 4 उपचार केंद्र पहले से संचालित हैं। अब भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नए केंद्र भी जल्द शुरू किए जाएंगे. इससे पूरे राज्य में इलाज की सुविधा और मजबूत होगी तथा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी.
गर्भवती महिलाओं की जांच पर दिया गया खास जोर
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स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस-बी जांच को भी बेहद जरूरी बताया है.डॉक्टरों का कहना है कि अगर गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच हो जाए और संक्रमण का पता चल जाए, तो नवजात बच्चे को इस बीमारी से बचाया जा सकता है. यदि कोई गर्भवती महिला हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित पाई जाती है, तो बच्चे के जन्म के 24 घंटे के भीतर उसे हेपेटाइटिस-बी इम्यूनोग्लोब्युलिन (एचबीआईजी) का इंजेक्शन और हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाया जाता है. इससे बच्चे में संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.
सरकारी अस्पतालों में मिलेगी पूरी सुविधा मुफ्त
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हरियाणा सरकार ने साफ किया है कि हेपेटाइटिस-बी और सी से जुड़ी जांच, बीमारी की पुष्टि, जरूरी दवाइयां, डॉक्टरों की सलाह और नियमित फॉलोअप जैसी सभी सेवाएं सरकारी उपचार केंद्रों पर निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी. इसी तरह गर्भवती महिलाओं की जांच और जरूरत पड़ने पर नवजात को एचबीआईजी और हेपेटाइटिस-बी का टीका भी सभी जिला नागरिक अस्पतालों में मुफ्त लगाया जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक परेशानी की वजह से कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रहे और हर व्यक्ति को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके.