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BSP में सुनामी...मायावती की वॉर्निंग के बाद अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, आकाश आनंद भी पार्टी से बाहर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में सियासी हलचल तेज है. पूर्व राज्यसभा सदस्य और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति व सामाजिक जीवन से संन्यास का ऐलान किया है. इसके बाद मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

BSP में सुनामी...मायावती की वॉर्निंग के बाद अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, आकाश आनंद भी पार्टी से बाहर
Image Source: IANS
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उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसकी तैयारी में सत्ताधारी दल बीजेपी से लेकर मुख्य विपक्ष की पार्टी सपा पूरी तरह से तैयारियों में लगी हुई है. लेकिन यूपी की सत्ता में 2007 वाले सोशल इंजीनियरिंग के दम पर फिर से सत्ता की वापसी की लालसा दिखा रही पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी में इन दिनों सियासी उठापटक देखने को मिल रहा है. वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है. इसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने बाद अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. 

सोशल मीडिया पर लिखी बड़ी बात 

अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी सुप्रीमो मायावती को टैग करते हुए 'एक्स' पर एक पत्र लिखा है. उन्होंने लिखा, 'आपको अवगत कराना है कि मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है. आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते-नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं. वे पिछले 35 वर्षों से बीएसपी और मान्यवर साहेब कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहे हैं. आप मेरी राजनीतिक गुरु हैं, मेरी बड़ी बहन हैं. आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया. आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्यसभा तक का सदस्य रहा हूं. आपने मुझे इस लायक समझा कि मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया. ये आपका ऋण है जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता.' उन्होंने तथागत भगवान गौतम बुद्ध और कांशीराम की कसम खाते हुए कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और मायावती के खिलाफ कुछ करने का तो वे सपने में भी नहीं सोच सकते.

अशोक सिद्धार्थ पर लग रहे थे आरोप 

अशोक सिद्धार्थ पर आरोप लग रहे थे कि वे पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और आकाश आनंद को गुमराह कर रहे हैं. इस पर सफाई देते हुए उन्होंने लिखा, 'आकाश आनंद को सलाह देना तो दूर, बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई, जब उनके कार्यक्रम चुनावी राज्यों में आयोजित किए गए, जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी.' उन्होंने कहा कि पार्टी के ही कुछ साथी उन्हें मिले सम्मान के कारण उन पर आरोप लगाते हैं, इसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है, यह उनके राजनीतिक विरोधियों की साजिश है जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, उन्होंने कहा कि उनके संन्यास लेने को आकाश आनंद की वापसी से न जोड़ा जाए, अशोक सिद्धार्थ ने लिखा, 'आकाश आनंद मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं और आनंद भाईसाहब के बेटे हैं. उन्होंने जीवन के दो दशक आपकी छत्रछाया में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा.'

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मायावती को लेकर क्या कहा?

बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य ने लिखा, 'आप खुद में त्याग और दया की मूर्ति हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्यमंत्री की कुर्सी और राज्यसभा सदस्य पद को भी ठोकर मार दी. आप हमारी मार्गदर्शक ही नहीं हमारी आदर्श भी हैं. अगर आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतों, गुरुओं और महापुरुषों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहा हूं. मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में संन्यास तो बहुत छोटी चीज है. आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी.'

मायावती ने फैसले पर दी प्रतिक्रिया 

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अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को मायावती ने उचित कदम बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी. मायावती ने कहा कि सिद्धार्थ ने भले ही राजनीति से दूरी बनाने का फैसला देर से लिया हो, लेकिन यह सही कदम है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह निर्णय पहले ही ले लिया गया होता, तो BSP, बहुजन समाज और बहुजन मूवमेंट के साथ-साथ उनके दामाद आकाश आनंद को भी लंबे समय तक मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता. इससे पहले बुधवार को मायावती ने भी 'एक्स' पोस्ट कर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी. मायावती ने लिखा था कि अशोक सिद्धार्थ ने अपने निजी स्वार्थ में आकाश आनंद और बीएसपी मूवमेंट की सही से परवाह नहीं की, जबकि उन्हें पार्टी और समाज के सामने त्याग और कुर्बानी की मिसाल पेश करनी चाहिए थी, लेकिन ठीक इसका उल्टा हुआ. मायावती ने कहा था कि बीएसपी पार्टी और मूवमेंट के हित के साथ-साथ खुद उनके परिवार और दामाद आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी मौका है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को त्याग कर निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें.

आकाश आनंद को पार्टी से किया बाहर 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, 'आकाश आनंद को पार्टी और मूवमेंट के वास्तविक हित व इससे जुड़े अपने करियर की परवाह कम, जबकि रिश्ते-नातों आदि का मोह अधिक है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश आनंद डबल माइंड होकर फिर बीएसपी पार्टी और मूवमेंट का भला कैसे कर सकते हैं?' मायावती ने लिखा, 'पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें (आकाश आनंद) पहले दिनांक 3 सितंबर को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था. उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से आजाद कर दिया जाए. अतः आकाश आनंद पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं. अब इनको पार्टी से पूरे तौर से मुक्त कर दिया गया है.' मायावती ने आगे लिखा, 'आकाश आनंद की ओर से भी अपने करियर से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव कायम है कि उन्होंने बीएसपी प्रमुख के सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा. हालांकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिए था.'

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बताते चलें कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के ऐलान के बाद बसपा की अंदरूनी सियासत एक बार फिर चर्चा में है. मायावती की प्रतिक्रिया से साफ है कि पार्टी नेतृत्व इस फैसले को बहुजन मूवमेंट और आकाश आनंद के भविष्य से जोड़कर देख रहा है. अब नजर इस बात पर है कि सिद्धार्थ के इस कदम का बसपा की आगे की रणनीति पर क्या असर पड़ता है.

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