जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

बिना जांच, प्रक्रिया और दोषी साबित किए बगैर कैसे खत्म की नौकरी? झारखंड में नियुक्तियां रद्द कर फंसी सरकार, HC ने पूछे सवाल

झारखंड में आंख मूंदकर नियुक्तियां रद्द कर सोरेन सरकार फंस गई है. हाई कोर्ट ने इस मामले में अधिसूचना पर स्टे लगाने के बाद तीखे सवाल पूछे हैं कि आखिर कैसे बिना जांच किए, अभ्यर्थियों के दोष बताए बैगर नौकरी रद्द की जा सकती है.

Author
21 Aug 2026
( Updated: 21 Aug 2026
12:28 PM )
बिना जांच, प्रक्रिया और दोषी साबित किए बगैर कैसे खत्म की नौकरी? झारखंड में नियुक्तियां रद्द कर फंसी सरकार, HC ने पूछे सवाल
Image Source- IANS
Advertisement

झारखंड में विभिन्न पदों पर नियुक्ति से जुड़ी 22 परीक्षाओं को एक साथ रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सरकार के इस फैसले के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती की नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी. झारखंड हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए अदालत के आदेश ने सरकार की कार्रवाई के तरीके और उसके औचित्य को लेकर कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं.

झारखंड में नियुक्तियां रद्द करने को लेकर हाईकोर्ट ने पूछे तीखे सवाल

खासकर, बिना व्यक्तिगत जांच और सुनवाई के नियमित नियुक्तियों को समाप्त किए जाने तथा कथित गड़बड़ी के लिए दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों में अंतर किए जाने के सवाल पर अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने सरकार से जांच की पूरी स्थिति और आगे हुई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि नियमित नियुक्तियों को बिना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए खत्म नहीं किया जा सकता. 

सरकार ने नहीं बताया कि कौन-कौन से अभ्यर्थी भ्रष्टाचार में शामिल हैं: हाई कोर्ट 

फूड सेफ्टी ऑफिसर्स के पदों पर नियुक्ति से जुड़े मामले में अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि अभी तक सरकार के पास यह दिखाने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि कौन-कौन से अभ्यर्थी भ्रष्टाचार में शामिल हैं. सवाल यह है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है, तो क्या उस प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक अभ्यर्थी को बिना व्यक्तिगत जांच और सुनवाई के नियुक्ति से हटाया जा सकता है? सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि विभिन्न नागरिकों की शिकायतों के आधार पर सीआईडी ने गहन जांच शुरू की है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं. 

Advertisement

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और इसी वजह से पूरी नियुक्ति रद्द करने का फैसला लिया गया. हालांकि, अदालत ने इस तर्क के बावजूद नियुक्तियां तत्काल खत्म करने के तरीके पर आपत्ति जताई. 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े मामलों में अदालत ने पहली नजर में कहा कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना प्रभावित नहीं किया जा सकता. 

नियुक्तियां रद्द करने के पीछे उचित तर्क नहीं दे सकी सरकार

अदालत ने यह भी कहा कि सरकार की अधिसूचना में ऐसे कदम को उचित ठहराने वाले तथ्य दिखाई नहीं देते. अदालत ने परीक्षा में गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया है और यह भी माना है कि मामले की जांच पहले से चल रही है. लेकिन सवाल यह है कि जांच पूरी होने से पहले उन सभी अभ्यर्थियों की नियुक्तियां कैसे रद्द की जा सकती हैं, जिनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर कोई आरोप या भूमिका सामने नहीं आई है. 

Advertisement

हाईकोर्ट ने सरकार से जांच और उससे जुड़े आगे के घटनाक्रम का विस्तृत जवाब मांगा

झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेंद्र यादव के अनुसार, अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में ‘बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस’ और ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ को भी महत्वपूर्ण माना. जेपीएससी मामले में अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को प्रभावी रूप से बिना किसी विधिक प्रक्रिया के सेवा से हटा दिया गया है. ऐसी स्थिति में अंतरिम संरक्षण देना न्यायहित में जरूरी था. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अधिसूचना का क्रियान्वयन जनहित के प्रतिकूल है. हालांकि, अदालत के आदेश को नियुक्तियों को अंतिम रूप से वैध घोषित किए जाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता. हाईकोर्ट ने सरकार से जांच और उससे जुड़े आगे के घटनाक्रम का विस्तृत जवाब मांगा है. 

ये भी पढ़ें: 44 परीक्षाएं रद्द, कई स्थगित, फास्ट ट्रैक कोर्ट-निगरानी सेल का गठन…रंग लाया छात्र आंदोलन, झारखंड सरकार का बड़ा ऐलान

हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल सैकड़ों अफसरों की  त्काल बच गईं नौकरियां

Advertisement

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं को संबंधित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट के अंतिम फैसले का पालन करना होगा. इसके लिए उन्हें शपथपत्र या अंडरटेकिंग देने को कहा गया है. यदि आपराधिक मामले में आगे कोई ऐसा निष्कर्ष आता है, जो कानूनन कार्रवाई की मांग करता है, तो सरकार कानून के मुताबिक कदम उठा सकेगी. इसका अर्थ यह है कि हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल सैकड़ों अफसरों की नौकरियां तत्काल बच गई हैं, लेकिन जांच और अंतिम न्यायिक प्रक्रिया के रास्ते बंद नहीं किए हैं. 

ये भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: JPSC-JSSC भर्तियां नहीं होंगी रद्द, सरकार के आदेश पर रोक

यह भी पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेंद्र यादव के अनुसार, इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल अब यही बन गया है कि यदि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी हुई है तो दोषी कौन हैं और निर्दोष कौन? क्या पूरी भर्ती प्रक्रिया को एक झटके में रद्द करना इसका कानूनी समाधान है या जांच के आधार पर दोषियों को अलग कर बाकी नियुक्तियों को बचाने का रास्ता अपनाया जाना चाहिए? अब 15 सितंबर की सुनवाई में सरकार की जांच रिपोर्ट और उसके समर्थन में पेश किए जाने वाले साक्ष्य इस मामले की अगली दिशा तय करेंगे. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें