लाठियां भी खाईं, संघर्ष भी किया... कौन हैं भोजशाला आंदोलन के 95 वर्षीय विमल गोधा? अब PM मोदी से की खास अपील
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में हाईकोर्ट के फैसले के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. 721 साल बाद परिसर मंदिर की प्राचीन पहचान के साथ सजता नजर आया. फूलों की सजावट, अखंडज्योति और वैदिक मंत्रों के बीच महाआरती की तैयारियां भी की गईं.
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मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में इस समय आस्था, इतिहास और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. शुक्रवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर भक्ति के रंग में डूबा नजर आया. करीब 721 वर्षों बाद भोजशाला एक बार फिर अपनी प्राचीन मंदिर पहचान के साथ सजी दिखाई दी. फूलों की सजावट, दीपकों की रोशनी, गर्भगृह में जलती अखंडज्योति और वैदिक मंत्रों की गूंज ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया.
सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
भोजशाला परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था. लोग मां वाग्देवी सरस्वती के जयकारों के साथ दर्शन के लिए पहुंचे. परिसर में भजन और श्लोकों की धुनें लगातार सुनाई देती रहीं. दोपहर एक बजे भोजशाला कूच यात्रा और महाआरती की तैयारी भी पूरे उत्साह के साथ की गई. श्रद्धालुओं का कहना है कि यह पल उनके लिए सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक बन गया है.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला माहौल
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे हाल ही में आया मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला है. अदालत ने ASI की 98 दिनों तक चली सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्थापत्य साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को मूल रूप से मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर माना. कोर्ट ने यह भी कहा कि यहां हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई. इसी फैसले के बाद भोजशाला में श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया है.
95 वर्षीय विमल गोधा को देखकर भावुक हुए लोग
शुक्रवार को सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब 95 वर्षीय विमल गोधा छड़ी के सहारे भोजशाला पहुंचे. धार जिले में विमल गोधा को भोजशाला आंदोलन की पहचान माना जाता है. वह वर्षों से इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं और लगातार मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग उठाते रहे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह लोगों को भावुक कर गया.
नरेंद्र मोदी से जुड़ा पुराना किस्सा भी किया साझा
विमल गोधा ने मीडिया से बातचीत में एक पुराना किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि साल 2003 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान जब Narendra Modi धार पहुंचे थे, तब उन्होंने ही उन्हें भोजशाला परिसर घुमाया था. गोधा के मुताबिक उस समय नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा था कि मौका मिलने पर मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से वापस भारत लाने का प्रयास किया जाएगा.
प्रतिमा वापसी को लेकर अब भी बनी हुई है उम्मीद
दरअसल, मां वाग्देवी की प्रतिमा फिलहाल British Museum में रखी हुई बताई जाती है. हाईकोर्ट ने प्रतिमा को वापस लाने का सीधा आदेश तो नहीं दिया, लेकिन यह जरूर कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार लंबित आवेदनों और प्रतिनिधित्वों पर विचार कर सकती है. इसके साथ ही अदालत ने भोजशाला परिसर के संरक्षण और निगरानी की पूरी जिम्मेदारी ASI को सौंप दी है.
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बताते चलें कि भोजशाला में उमड़ा यह जनसैलाब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे वर्षों पुराने संघर्ष, आस्था और सांस्कृतिक पहचान की वापसी के रूप में देखा जा रहा है. श्रद्धालुओं की आंखों में उम्मीद है कि आने वाले समय में मां वाग्देवी की प्रतिमा भी भारत लौटेगी और भोजशाला अपनी प्राचीन गरिमा के साथ फिर पूरी तरह स्थापित होगी.