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सत्ता से पहले और सत्ता के बाद संतों के कदमों में नतमस्तक हुए सुवेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार बेलूर मठ पहुंचे. हावड़ा स्थित रामकृष्ण मठ और मिशन मुख्यालय में उन्होंने संतों से आशीर्वाद लिया और आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताया.

सत्ता से पहले और सत्ता के बाद संतों के कदमों में नतमस्तक हुए सुवेंदु अधिकारी
Image Source: Screengrab
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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद राज्य में सनातन और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. इसकी बड़ी वजह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का सनातन परंपरा के प्रति झुकाव और उनकी खास कार्यशैली मानी जा रही है. इसी कड़ी में गुरुवार को मुख्यमंत्री बनने के बाद वह पहली बार बेलूर मठ पहुंचे. कोलकाता के पास हावड़ा में स्थित यह मठ रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है. 

दरअसल, मुख्यमंत्री के आगमन पर मठ के संतों ने उनका स्वागत किया, जबकि सुवेंदु अधिकारी संतों के सामने नतमस्तक नजर आए. हुगली नदी के किनारे स्थित इस विशाल परिसर में उन्होंने कुछ समय बिताया और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह दौरा पूरी तरह आध्यात्मिक था. मुख्यमंत्री ने संतों से आशीर्वाद लिया और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े इस प्रतिष्ठित स्थल में शांत वातावरण के बीच समय बिताया. स्वामी विवेकानंद द्वारा 1897-98 में स्थापित बेलूर मठ आज भी देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

शपथ के बाद से लगातार चर्चा में हैं सुवेंदु

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से सुवेंदु अधिकारी कई मौकों पर अपनी खास शैली की वजह से चर्चा में बने हुए हैं. 13 मई 2026 को जब वह पहली बार पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे थे, तब उन्होंने विधानसभा की सीढ़ियों पर घुटनों के बल बैठकर सिर झुकाया और पूर्ण दंडवत प्रणाम किया था. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी. राजनीतिक गलियारों में उनकी इस शैली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साष्टांग प्रणाम परंपरा से प्रेरित बताया गया. कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान का प्रतीक भी माना.

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सीएम योगी का भी भरे मंच पर छू चुके हैं पैर

शपथ ग्रहण के दिन सुवेंदु अधिकारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था. यह तस्वीर भी काफी चर्चा में रही थी. इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान कांथी विधानसभा में आयोजित एक रैली में भी सुवेंदु अधिकारी ने मंच पर पहुंचते ही सीएम योगी के चरण स्पर्श किए थे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी अपनी इस शैली के जरिए खुद को सनातन परंपरा और विनम्र राजनीति से जोड़ने की कोशिश करते हैं. वहीं बेलूर मठ को बीजेपी लंबे समय से हिंदू सांस्कृतिक पुनर्जागरण और स्वामी विवेकानंद की विचारधारा से जोड़कर देखती रही है. चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी बेलूर मठ का दौरा किया था, जिसके बाद यह स्थान राजनीतिक और आध्यात्मिक दोनों कारणों से लगातार चर्चा में बना हुआ है.

बहरहाल, बेलूर मठ का यह दौरा केवल एक आध्यात्मिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक और सांस्कृतिक तस्वीर से भी जोड़कर देखा जा रहा है. यही वजह है कि सुवेंदु अधिकारी की शैली और उनके संदेश दोनों लगातार चर्चा में बने हुए हैं.

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