राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजभूषण शरण समेत 19 बाहुबलियों को कैसे मिला हथियारों का लाइसेंस? कोर्ट ने मांग लिया ब्यौरा
बढ़ते गन कल्चर को लेकर हाई कोर्ट ने चिंता जताई है. कोर्ट ने पूछा दबंग नेताओं को किस आधार पर हथियारों के लाइसेंस दिए गए हैं?
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UP में अपराधिक बैकग्राउंड से जुड़े नेताओं पर हाई कोर्ट सख्त हो गया है. कोर्ट ने पुलिस को ऐसा आदेश दिया है जिससे बाहुबलियों में खलबली मच गई. हाई कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह समेत कई बाहुबली नेताओं के हथियार लाइसेंस की जांच करने के आदेश दिए हैं.
हाई कोर्ट ने UP पुलिस से सख्त लहजे में पूछा है कि इन नेताओं पर गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं, इनकी पृष्ठभूमि अपराधिक है, इसके बावजूद दबंग नेताओं को किस आधार पर हथियारों के लाइसेंस दिए गए?
हाई कोर्ट ने इन 19 चर्चित नामों का ब्यौरा मांगा
- राजा भैया
- अब्बास अंसारी
- बृजभूषण शरण सिंह
- धनंजय सिंह
- विनीत सिंह
- बृजेश सिंह
- खान मुबारक
- अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही
- संजय सिंह सिंगला
- अतुल वर्मा
- मोहम्मद साहब
- सुधाकर सिंह
- गुड्डू सिंह
- अनूप सिंह
- लल्लू यादव
- बच्चू यादव
- जुगनू वालिया
- सुशील सिंह
कोर्ट ने इन बाहुबलियों की अपराधिक कुंडली तलब करते हुए लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही उनका ब्यौरा भी मांगा है जिनका अपराधिक रिकॉर्ड हलफनामे से गायब है. जस्टिस विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दंबग नेताओं को मिली सुरक्षा और हथियारों का ब्यौरा 26 मई तक देने के निर्देश दिए हैं.
गन कल्चर पर कोर्ट की सख्ती
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट में संत कबीर नगर के रहने वाले जयशंकर ने एक याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया कि UP में लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण के नियमों को ताक पर रखकर लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं. इतना ही नहीं ऐसे लोग हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन भी कर रहे हैं. याचिकाकर्ता ने चिंता जताई कि प्रदेश में इस तरह से गन कल्चर बढ़ रहा है. इसी को लेकर अपर मुख्य सचिव (गृह) और संयुक्त सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे में दी गई, उस आंकड़े से कोर्ट भी हैरान रह गया.
UP में कितने हैं शस्त्र लाइसेंस धारक?
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UP सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि मौजूदा समय में 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं. इनमें अलग-अलग श्रेणियां हैं. हालांकि अभी भी 23,407 आवेदन लंबित हैं. हैरान कर देने वाली बात ये है कि 6,062 ऐसे मामले हैं, जहां दो या दो से ज्यादा आपराधिक मुकदमों वाले व्यक्तियों को हथियारों के लाइसेंस दिए गए हैं. जबकि 20,960 परिवारों के पास एक से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं. वहीं, पुलिस प्रमुख और जिलाधिकारियों के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपील भी कमिश्नरों के पास लंबित हैं.