चुनाव हारते ही टूटने लगी ममता की पार्टी! TMC के प्रोटेस्ट से 44 विधायक रहे नदारद, पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों ने बढ़ाई टेंशन
पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद टीएमसी में अंदरूनी नाराजगी बढ़ती दिख रही है. पार्टी के विरोध प्रदर्शन में सिर्फ 36 विधायक पहुंचे, जबकि दो नगरपालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों ने बगावत की चर्चाओं को तेज कर दिया है.
Follow Us:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों मिली हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है. नई सरकार बनने के बाद आयोजित पार्टी के पहले विरोध प्रदर्शन में विधायकों की कम मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, टीएमसी शासित दो नगरपालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी के भीतर बगावत की चर्चाओं को और तेज कर दिया है. ऐसे में मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि ममता बनर्जी के सामने अब सिर्फ बीजेपी से मुकाबला ही नहीं, बल्कि पार्टी को एकजुट बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
दरअसल, विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने टीएमसी ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था, लेकिन इसमें पार्टी की मौजूदगी उम्मीद से काफी कमजोर दिखी. 80 विधायकों वाली पार्टी में से सिर्फ 36 विधायक ही धरने में पहुंचे. यह प्रदर्शन राज्य की नई सरकार पर चुनाव बाद हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और फुटपाथ दुकानदारों के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर किया गया था. ऐसे वक्त में विधायकों की कम भागीदारी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि टीएमसी फिलहाल राज्य में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने की कोशिशों में जुटी हुई है.
कालीघाट बैठक में भी दिखी नाराजगी
इससे पहले 19 मई को कालीघाट में आयोजित टीएमसी की अहम बैठक में भी पार्टी के कई विधायक नदारद रहे थे. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी वाली इस बैठक में करीब 15 विधायक शामिल नहीं हुए, जिससे संगठन के भीतर असंतोष की चर्चा और तेज हो गई. बैठक के दौरान कुछ विधायकों ने पार्टी की मौजूदा रणनीति पर खुलकर चिंता जताई. नेताओं का कहना था कि सिर्फ बंद कमरे में बैठकों से जनता का भरोसा दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता. उनका मानना था कि पार्टी को जमीन पर सक्रिय होकर लोगों के बीच मजबूत संदेश देना होगा. सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने जहांगीर खान के चुनाव से हटने के मामले पर पार्टी नेतृत्व से सवाल किए. बताया जा रहा है कि तीनों विधायक एक ही गाड़ी में बैठक में पहुंचे थे, जिसे राजनीतिक गलियारों में खास संकेत के तौर पर देखा गया. विधायकों ने सवाल उठाया कि मतदान से महज दो दिन पहले चुनाव मैदान छोड़ने के बावजूद जहांगीर खान के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. बैठक में की गई कुछ टिप्पणियों को अप्रत्यक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी पर निशाना माना गया, क्योंकि फलता विधानसभा सीट उनके डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है.
नगरपालिकाओं में टीएमसी को बड़ा झटका
इसी बीच उत्तर 24 परगना जिले की कांचरापाड़ा और हलीशहर नगरपालिकाओं में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा. कांचरापाड़ा नगरपालिका में 24 में से 15 पार्षदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि हलीशहर में 23 में से 16 पार्षदों ने सामूहिक रूप से पद छोड़कर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दीं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही नगरपालिकाओं के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा था. कई स्थानीय नेताओं पर सक्रिय भूमिका नहीं निभाने और नगर सेवाओं के संचालन में कमजोरी के आरोप लग रहे थे. इन इस्तीफों को टीएमसी के अंदर बढ़ती नाराजगी और संगठनात्मक संकट के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
बीजेपी विधायक की बैठक के बाद बढ़ी हलचल
सूत्रों के अनुसार, बिजपुर से बीजेपी विधायक सुदिप्ता तेन ने हाल ही में नगरपालिका अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसके बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं. बताया जा रहा है कि 17 मई को कल्याणी में हुई टीएमसी पार्षदों की बैठक में सामूहिक इस्तीफे को लेकर सहमति बनी थी. इसके बाद 20 मई की दोपहर हलीशहर नगरपालिका में डिप्टी चेयरमैन की मौजूदगी में पार्षद राजू साहनी के नेतृत्व में एक आपात बैठक बुलाई गई. बैठक खत्म होने के बाद 16 पार्षदों ने एक साथ अपने इस्तीफे सौंप दिए. इस्तीफा देने वालों में पांच महिला पार्षद भी शामिल बताई जा रही हैं. हालांकि नगरपालिका चेयरमैन शुभंकर घोष ने पद नहीं छोड़ा और वे अब भी अपने दायित्व पर कायम हैं.
इस्तीफों के बाद बढ़ी सियासी अटकलें
बीजेपी विधायक सुदिप्ता तेन ने इस्तीफा देने वाले 16 पार्षदों की सूची सार्वजनिक करते हुए कहा कि नगरपालिका की सेवाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि आम लोगों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं पहले की तरह जारी रहेंगी.
यह भी पढ़ें
बताते चलें कि इन सामूहिक इस्तीफों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है. अब चर्चाएं इस बात को लेकर तेज हैं कि आने वाले दिनों में कुछ पार्षद बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. हालांकि पूरे मामले पर अब तक तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.