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अपराधियों को छोड़ेंगे नहीं, छात्रों को छूएंगे नहीं...बंगाल सरकार का NEET पेपर लीक के प्रदर्शनकारियों को लेकर बड़ा फैसला

बंगाल में आपराधिक इतिहास वालों को सुवेंदु सरकार नहीं छोड़ेगी. सरकार ने बयान जारी कर साफ कर दिया कि छात्रों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जबकि जिनके ऊपर पहले से मामले हैं, उन्हें रियायत नहीं दी जाएगी.

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29 Jul 2026
( Updated: 29 Jul 2026
05:51 PM )
अपराधियों को छोड़ेंगे नहीं, छात्रों को छूएंगे नहीं...बंगाल सरकार का NEET पेपर लीक के प्रदर्शनकारियों को लेकर बड़ा फैसला
Image Source: IANS
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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों और नाबालिगों की रिहाई के आदेश दिए. इसके बाद छात्रों को हिरासत से छोड़ने की प्रक्रिया तेज हुई. कोर्ट ने इसके साथ ही 7 राज्यों को नोटिस भी जारी किया था. इसको लेकर बंगाल सरकार का बड़ा बयान सामने आया है. बंगाल के गृह विभाग द्वारा जारी एक आदेश में साफ कर दिया गया है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर किसी भी छात्र पर कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन अपराधियों के प्रति कोई रियायत नहीं बरती जाएगी. 

नीट पेपर लीक के प्रदर्शनकारियों को लेकर बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

जारी बयान में लिखा गया है कि 26 जुलाई 2026 को शाम 6 बजे तक NEET (UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के संबंध में पुलिस की शिकायत पर पश्चिम बंगाल राज्य में एक मामला दर्ज किया गया. इस मामले के सिलसिले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

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आपराधिक इतिहास वालों को नहीं छोड़ेगी बंगाल सरकार

पश्चिम बंगाल सरकार ने उक्त मामले और चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार किया है, जिसमें 'शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी बनाम भारत संघ और अन्य' मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 28 जुलाई को 2026 को पारित आदेश भी शामिल है.

ये भी पढ़ें: बंगाल में छात्रों के नाम पर हिंसा, पत्रकारों पर हमला...CM सुवेंदु के निर्देश पर 11 आरोपी गिरफ्तार, गुंडा एक्ट लगा

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इसके बाद सरकार ने उचित विचार-विमर्श के बाद फैसला लिया कि NEET (UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को यही सुरक्षा (बख्शा नहीं जाएगा) नहीं मिलेगी, जैसा कि कोर्ट ने भी अपने फैसले में बकौल बंगाल सरकार कहा है.

16 लोगों को कोर्ट से जमानत, क्रिमनल रिकॉर्ड वालों के खिलाफ रिव्यू करेगी सरकार?

इसी बीच बंगाल की एक मेट्रोपॉलिटन अदालत ने गिरफ्तार किए गए इन 16 में से 16 को जमानत दे दी है. हालांकि कहा जा रहा है कि पत्रकारों पर हमले के आरोपियों, जिनके खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है, उनके खिलाफ अपील की जाएगी, जैसा कि बंगाल सरकार ने संकेत दिया है.

आपको बता दें कि कोर्ट ने जिन 16 लोगों को जमानत दी है उनमें से 5 लोगों के खिलाफ पहले से दर्ज आपराधिक मामले हैं. 

ये भी पढ़ें: बंगाल में पुलिस वैन में मां काली की मूर्ति को ले जाने के आदेश देने वाले IPS नपे, CM सुवेंदु ने 5 अफसरों को किया सस्पेंड

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बंगाल की एक चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने मंगलवार को कोलकाता में वामपंथी छात्र संगठनों की संयुक्त रैली के दौरान हुई हालिया अशांति के सिलसिले में गिरफ्तार 16 लोगों को 500 रुपए के बॉन्ड पर जमानत दे दी. आरोपियों के वकीलों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से मना किया गया था. दूसरी ओर, दिल्ली या बिहार जैसे राज्यों से कोई साफ निर्देश न होने के बावजूद सरकारी वकीलों ने जमानत का विरोध नहीं किया और गिरफ्तार किए गए सभी 16 लोगों को जमानत मिल गई.

जब 24 जुलाई की रैली में हुई गड़बड़ी के सिलसिले में मंगलवार को 16 लोगों को कोर्ट में पेश किया गया तो उनके वकीलों ने जमानत की अर्जी दी. शुरू में, सरकारी वकीलों ने अर्जी का विरोध किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें 30 जुलाई तक हिरासत में रखने का आदेश दिया.

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हालांकि, दोपहर की सुनवाई के दौरान, आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट में केंद्र सरकार के समझौते का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली समेत पूरे भारत में नीट आंदोलन से जुड़े केस वापस लेने का फैसला किया है. उन्होंने बिहार और असम का उदाहरण दिया, लेकिन इन राज्यों से कोई साफ गाइडलाइन न होने के कारण, मजिस्ट्रेट ने मामले पर बुधवार को फिर से चर्चा करने की इजाजत दे दी.

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बाद में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी मिलने के बाद वकीलों ने कोर्ट से मंगलवार को ही मामले पर फिर से सुनवाई करने का अनुरोध किया. मजिस्ट्रेट ने अनुरोध मान लिया और सुनवाई फिर से शुरू हुई.

16 में से पांच के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड की पुष्टि!

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आरोपी यासीन रहमान, राजा सेन और प्रशांत बागची के वकीलों ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से मना किया था.
मजिस्ट्रेट ने पूछा कि कितने आरोपियों का आपराधिक इतिहास है, और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि पुराने अपराधों वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.

जांच अधिकारी ने बताया कि 16 में से पांच लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है. बचाव पक्ष के वकीलों ने सवाल किया कि क्या वे पांच लोग अपने पिछले मामलों में दोषी पाए गए थे. कोई साफ जवाब न मिलने पर, मजिस्ट्रेट ने सभी 16 लोगों को जमानत दे दी.

24 जुलाई को, एसएफआई समेत कई वामपंथी छात्र संगठनों ने नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर प्रदर्शन किया. सीलदाह से एस्प्लेनेड तक जुलूस और धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

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हिंसा के आरोप लगे और कथित तौर पर विवादित पोस्टर, प्लेकार्ड और देश-विरोधी नारे दिखाए गए. रिपोर्टिंग के दौरान कई पत्रकारों पर हमले हुए. गड़बड़ी के सिलसिले में पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया.

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