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'ये कांग्रेस का मंच है, कोई मस्जिद नहीं है', कौन थे विष्णु दिगंबर, जिन्होंने वंदेमातरम् के विरोध पर कांग्रेसियों को दिया था डांट

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् गाए जाने पर बवाल मचा हुआ है. कहा जा रहा है कि राष्ट्रगीत के सभी छंद गाने से सोनिया गांधी को कथित तौर पर दिक्कत हुई. ऐसे में वीडियो वायरल हुआ तो लोगों को विष्णु दिगंबर याद आने लगे कि अगर वो होते तो सोनिया को वहीं डांट देते.

Image Source-Gandharva Mahavidyalaya/Web
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कांग्रेस मुख्यालय में कथित तौर पर वंदे मातरम् के कथित अपमान के बाद वायरल दिग्गज संगीतज्ञ विष्णु दिगंबर की खूब चर्चा हो रही है. ऐसे में आप सोच रहे होंगे ये विष्णु दिगंबर पलुस्कर कौन हैं और अगर आज होते तो सोनिया गांधी को क्यों डांट देते तो उससे पहले 15 अगस्त को देश की राजधानी दिल्ली में स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन की वो तस्वीर देख लीजिये, जहां एक तरफ ध्वजारोहण के दौरान पूरा वंदे मातरम गाया जा रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे दिग्गज नेता सावधान की मुद्रा में खड़े रहने की बजाए बहस करते नजर आए.

वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे सोनिया गांधी का तमतमाया चेहरा बता रहा है वो किसी बात को लेकर बेहद खफा नजर आ रही हैं और इतनी खफा कि राष्ट्रीय गान खत्म होने का इंतजार भी नहीं किया. हालांकि किसी तरह से खड़गे ने उन्हें शांत कराया और जब ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो दावा किया जाने लगा कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम पूरा गाये जाने पर ऐतराज जताया था. जिसे बीजेपी ने वंदे मातरम का अपमान बता दिया.

जब बवाल बढ़ा तो कांग्रेस नेता जयराम रमेश सफाई देने लगे कि बुजुर्ग खड़गे देर तक खड़े थे. इसीलिये सोनिया गांधी ने उनके लिए कुर्सी मंगाने के लिए कहा था. तो वहीं दूसरी तरफ उसी कांग्रेस के दिग्गज सांसद मनोज कुमार ने दावा कर दिया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बावजूद वंदे मातरम पूरा गाया गया.

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जयराम रमेश भले ही कहते रह गये कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश नहीं की उन्हें खड़गे की चिंता हो रही थी. इसीलिये उनके लिए कुर्सी मंगवा रही थीं. तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने ही उनके दावे को गलत साबित करते हुए कह दिया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश की थी. फिर तो इसके बाद जैसे मानो बवाल मच गया. दिग्गज पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर गुस्सा जाहिर करते हुए विष्णु दिगंबर पलुस्कर की याद दिलाई और सोशल मीडिया पर लिखा.

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"काश! आज कांग्रेस के ध्वाजारोहण कार्यक्रम में विष्णु दिगम्बर पलुस्कर होते, वो होते तो वंदेमातरम् रोकने पर सोनिया गांधी को मौके पर ही डपट कर उनकी हैसियत बता देते, जानना चाहते हैं ये विष्णु दिगम्बर पलुस्कर कौन थे? तो सुनिए. ये बात 1923 के काकीनाड़ा में हुए कांग्रेस अधिवेशन अधिवेशन की है, जब मंच से महान शास्त्रीय गायक विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ने वंदेमातरम् गीत का गायन प्रारम्भ किया. तो तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद अली जौहर ने वंदे मातरम् को इस्लाम विरोधी बताकर रोकना चाहा, इस पर पलुस्कर ने कहा कि “ये कांग्रेस का मंच है, कोई मस्जिद नहीं है”. और उन्होंने पूरे ऊंचे स्वर में वंदे मातरम गाया, इस बात से मौलाना जौहर इतने नाराज हुए कि मंच से उतर गये, आपको यहां ये भी पता होना चाहिए कि पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर बचपन से दृष्टिहीन थे लेकिन उनकी आंखों में देशभक्ति की ज्योति हमेशा प्रज्जवलित रही, लेकिन आज कांग्रेस का हर नेता भले आंखों में रौशनी रखता है लेकिन देशभक्ति की ज्योति इनकी आंखों से बुझ चुकी है."

सोचिये… एक वो दौर था… जब 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में पूरा वंदे मातरम गाया तो तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मुहम्मद अली जौहर ने इसे इस्लाम विरोधी बताकर बंद करने की कोशिश की. लेकिन विष्णु दिगंबर जैसे देशभक्त ने भी उन्हें मुंहतोड़ जवाब दे दिया था कि ये कांग्रेस का मंच है कोई मस्जिद नहीं है. जब उन्होंने वंदे मातरम के अपमान पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मुहम्मद अली जौहर को नहीं बख्शा… उन्हें भी डांट दिया… तो आज कांग्रेस मुख्यालय में जिस तरह से वंदे मातरम का अपमान किया गया… उसे देख कर वो क्या करते… पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव ने तो साफ कह दिया कि अगर वो होते तो सोनिया गांधी को मौके पर ही डपट कर उनकी हैसियत बता देते. क्योंकि उनके सामने कोई राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का अपमान कर दे… ये बात विष्णु दिगंबर पलुस्कर को बर्दाश्त नहीं थी. 

कौन हैं विष्णु दिगंबर पलुस्कर?

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  • विष्णु दिगंबर पलुस्कर का जन्म 1872 में महाराष्ट्र के बॉम्बे में हुआ था
  • विष्णु दिगंबर शास्त्रीय संगीत के महान गायक और संगीत प्रचारक थे
  • शास्त्रीय संगीत को राज दरबारों से निकाल कर आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई
  • महात्मा गांधी के प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम की मूल धुन और लय विष्णु दिगंबर ने ही तैयार की थी
  • 1901 में लाहौर में गांधर्व महाविद्यालय की स्थापना की जो संगीत अकादमी का पहला व्यवस्थित प्रयास था
  • विशेष स्वर लिपि पद्धति विकसित की जिससे शास्त्रीय संगीत को किताबों से पढ़ना और सीखना संभव हुआ
  • कांग्रेस के अधिवेशनों में नियमित रूप से वंदे मातरम का गायन करके स्वतंत्रता सेनानियों में ऊर्जा भरते थे

ये भी पढ़ें: 'हमें गाने की जरूरत नहीं है...', कांग्रेस मुख्यालय में हुआ ‘वंदे मातरम्’ का किया अपमान! सोनिया-राहुल, खड़गे बात करते दिखे, नए VIDEO में क्या दिखा

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तो कुछ ऐसे थे विष्णु दिगंबर पलुस्कर… जिन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन… जन तक पहुंचाया… तो ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वंदे मातरम का गायन करके स्वतंत्रता आंदोलनकारियों में देशभक्ति का जज्बा भी भरते थे… और सबसे बड़ी बात ये है कि कांग्रेस अधिवेशन में भी वंदे मातरम गाया करते थे… इसी बात से समझ सकते हैं कि आज भले ही पूरा वंदे मातरम कांग्रेस को रास ना आ रहा हो… लेकिन इसी कांग्रेस के अधिवेशन में विष्णु दिगंबर जैसे राष्ट्र भक्त पूरा वंदे मातरम गाते थे. और जब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद जौहर ने इसे इस्लाम विरोधी बताया तो उन्हें भी फटकार लगाते हुए कह दिया था कि ये कांग्रेस का मंच है मस्जिद नहीं. यही वजह है कि उन्हें याद करते हुए पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि अगर वो होते तो सोनिया गांधी को मौके पर ही डपट कर उनकी हैसियत बता देते.

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