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‘दूसरी आजादी के लिए आपकी मदद चाहिए...’, 15 अगस्त से पहले सोनम वांगचुक की बड़ी अपील
Sonam Wangchuk: देश में बदलाव की शुरुआत इस बात से होनी चाहिए कि जनता अपने राजनीतिक नेताओं को किस तरह चुनती है. वांगचुक ने लोगों से एक ‘शांत क्रांति’ शुरू करने की अपील की है, यानी बिना हिंसा और टकराव के लोकतांत्रिक तरीके से व्यवस्था में बेहतर बदलाव लाने की कोशिश.
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Sonam Wangchuk: स्वतंत्रता दिवस से पहले सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देशवासियों से एक खास अपील की है. उन्होंने कहा है की अगर भारत को 2047 तक एक विकसित और सम्मानित देश बनाना है, तो सिर्फ सरकार बदलने से काम नहीं चलेगा. देश में बदलाव की शुरुआत इस बात से होनी चाहिए कि जनता अपने राजनीतिक नेताओं को किस तरह चुनती है. वांगचुक ने लोगों से एक ‘शांत क्रांति’ शुरू करने की अपील की है, यानी बिना हिंसा और टकराव के लोकतांत्रिक तरीके से व्यवस्था में बेहतर बदलाव लाने की कोशिश. सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. इस दौरान उन्हें देश और उसके भविष्य के बारे में सोचने का काफी समय मिला. उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को देखकर उन्हें चिंता होती है. इसी वजह से उन्होंने लोगों से ऐसे व्यक्तियों के नाम सुझाने को कहा है जो निस्वार्थ, निर्भीक, ईमानदार और अच्छे चरित्र वाले हों और देश को लेकर नई सोच रखते हों.
2047 के विकसित भारत को लेकर चिंता
वांगचुक ने कहा कि भारत से पीछे या उसके बराबर माने जाने वाले कई देश आज विकास के मामले में काफी आगे निकल चुके हैं. उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों का उदाहरण देते हुए प्रति व्यक्ति जीडीपी का जिक्र किया. उनका कहना है कि भारत के पास प्रतिभा और संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन विकास की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं है.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य मुश्किल हो सकता है. वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि अगर देश की शिक्षा व्यवस्था कमजोर रही तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियो और देश के भविष्य पर पड़ेगा.
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‘समस्या किसी एक राजनीतिक पार्टी की नहीं’
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वांगचुक ने साफ किया कि उनकी चिंता किसी एक राजनीतिक दल को लेकर नहीं है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकारें रही हैं और कई जगह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर कार्रवाई भी हुई है. इसलिए केवल एक पार्टी को हटाकर दूसरी पार्टी को सत्ता में लाने से व्यवस्था की मूल समस्याएं खत्म नहीं होंगी.
उन्होंने छात्रों के आंदोलनों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि बदलाव की मांग के बाद कुछ कदम जरूर उठे, लेकिन केवल मंत्री या सरकार का चेहरा बदलने से व्यवस्था में बड़ा बदलाव नहीं आता. उनके मुताबिक, जरूरत पूरी व्यवस्था में सुधार की है.
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‘नेता सही होंगे तो देश सही दिशा में जाएगा’
वांगचुक ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे नेताओं की जरूरत है जो ईमानदार हों, निडर हों और निजी फायदे से ऊपर देशहित को रखें. उन्होंने कहा कि जब तक नेता सही नहीं होंगे, देश गलत दिशा में जा सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि भारत में आज भी कई ऐसे नेता मौजूद हैं जो ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ काम कर रहे हैं और वह उनका सम्मान करते हैं.
उन्होंने संसद में आपराधिक मामलों वाले सांसदों को लेकर भी चिंता जताई. वांगचुक ने दावा किया कि करीब आधे सांसदों पर आपराधिक मामले हैं और करीब एक तिहाई पर हत्या, दुष्कर्म और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सवाल किसी एक पार्टी से नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था से जुड़ा है.
देश के ‘बेस्ट माइंड्स’ को साथ लाना चाहते हैं
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वांगचुक ने देशवासियों से ऐसे लोगों के नाम सुझाने को कहा है जो देश के भविष्य को लेकर गंभीर सोच रखते हों और जमीन पर कुछ करने की क्षमता रखते हों. उन्होंने कहा कि उनकी तलाश केवल बड़े बुद्धिजीवियों की नहीं है, बल्कि ऐसे निस्वार्थ और चरित्रवान लोगों की है जो देश के लिए योगदान देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि लद्दाख में रहने के कारण उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ऐसे लोगों के बारे में जानकारी नहीं है. इसलिए वह चाहते हैं कि लोग अपने राज्य और क्षेत्र से कम से कम एक योग्य व्यक्ति का नाम सुझाएं.
‘क्या भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू हो सकता है?’
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वांगचुक ने आखिर में लोगों से सवाल किया कि क्या मिलकर भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किया जा सकता है. उनका इशारा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बदलाव की ओर है. वह ऐसे लोगों के साथ देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में जाकर संवाद करना चाहते हैं और भारत के भविष्य पर सुझाव लेना चाहते हैं.
उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशवासियों से अपील की कि अगर वे उन्हें कोई तोहफा देना चाहते हैं, तो ऐसे योग्य लोगों के नाम सुझाएं जो भारत को बेहतर दिशा देने में योगदान दे सकते हैं. उनका संदेश साफ है कि देश का भविष्य केवल नेताओं से नहीं, बल्कि जनता के सही फैसलों से भी तय होता है.