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त्रिपुरा के डीजीपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज

त्रिपुरा सरकार और राज्य पुलिस मुख्यालय ने अभी तक डीजीपी अनुराग की मौत के कारणों या परिस्थितियों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है.

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20 Jul 2026
( Updated: 20 Jul 2026
04:13 PM )
त्रिपुरा के डीजीपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज
Image Credit: IANS
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त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग सोमवार को राज्य पुलिस मुख्यालय में अपने चैंबर से जुड़े बाथरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए. अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी. 
 
अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

सीनियर आईपीएस अधिकारी को अगरतला के सरकारी मेडिकल कॉलेज और गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज और गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल के मेडिसिन विभाग प्रमुख डॉ. प्रदीप भौमिक ने बताया कि डीजीपी अनुराग को अस्पताल लाया गया था लेकिन उसमें जीवन के कोई संकेत नहीं थे. डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया.

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डॉ. भौमिक ने मीडिया को बताया, "डीजीपी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगी."

मौत के कारणों पर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं

त्रिपुरा सरकार और राज्य पुलिस मुख्यालय ने अभी तक डीजीपी अनुराग की मौत के कारणों या परिस्थितियों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है.

मई 2025 में संभाली थी डीजीपी की जिम्मेदारी

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त्रिपुरा कैडर के 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अनुराग ने पिछले साल 17 मई को राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पद संभाला था. उन्होंने 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी अमिताभ रंजन की जगह ली थी. डीजीपी बनने से पहले अनुराग त्रिपुरा में पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) के पद पर तैनात थे.

लंबा और विविध प्रशासनिक अनुभव

मैसूर के सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट अनुराग के पास उस्मानिया यूनिवर्सिटी से पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री भी थी. इसके अलावा, उन्होंने हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से साइबर क्राइम में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया था.

अधिकारियों ने बताया कि अनुराग अमेरिका की 'एसोसिएशन ऑफ सर्टिफाइड फ्रॉड एग्जामिनर्स' से सर्टिफाइड फ्रॉड एग्जामिनर भी थे. उन्हें त्रिपुरा में पुलिसिंग का लंबा अनुभव था क्योंकि उन्होंने 1995 से 2003 तक राज्य में सेवा दी थी.

त्रिपुरा में अपने कार्यकाल के दौरान अनुराग ने लॉन्गथराई वैली के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर और तत्कालीन अविभाजित पश्चिम त्रिपुरा व दक्षिण त्रिपुरा जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर काम किया था.

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उन्होंने स्पेशल ब्रांच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) (मुख्यालय) के पदों पर भी काम किया था.

त्रिपुरा से लेकर सीबीआई तक निभाईं अहम जिम्मेदारियां

2003-04 के दौरान अनुराग ने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ काम किया था. 2005 से 2013 के बीच वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में पुलिस अधीक्षक (एसपी) और बाद में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर कार्य किया.

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद अनुराग ने 2013 से 2016 तक त्रिपुरा में पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) के पद पर काम किया. 2016 से 2023 तक वह दोबारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे. इस दौरान उन्होंने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट में पुलिस महानिरीक्षक (रिसर्च और करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक) और बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक के पदों पर काम किया.

1984 दंगा एसआईटी के अध्यक्ष भी रहे

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अनुराग ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था.

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